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Dharmendra Singh

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May 14, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

उमरियापान पंचायत में विकास या विनाश, 80-90 लाख के कथित घोटाले से गांव में उबाल, जांच और खाते फ्रीज करने की उठी मांग

 

कटनी | उमरियापान की शांत फिजाओं में इन दिनों विकास नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के आरोपों की गूंज सुनाई दे रही है। ढीमरखेड़ा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत उमरियापान में निर्माण कार्यों और स्वच्छता मद में लाखों रुपये के कथित गबन का मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों का आक्रोश सातवें आसमान पर पहुंच गया है। गांव के लोगों ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी को शिकायत सौंपते हुए पंचायत में हुए कार्यों की निष्पक्ष जांच और पंचायत खाते को तत्काल फ्रीज करने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि बीते लगभग सात महीनों में 80 से 90 लाख रुपये तक की राशि बिना उचित मूल्यांकन और बिना धरातल पर कार्य कराए निकाल ली गई। गांव की जनता पूछ रही है कि आखिर कागजों में चमकता विकास गांव की टूटी सड़कों, गंदगी से भरी नालियों और अधूरे निर्माणों में क्यों दिखाई नहीं देता?

सफाई के नाम पर खेल, गांव में गंदगी का अंबार

शिकायत में सबसे बड़ा आरोप स्वच्छता और सफाई मद को लेकर लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि न्यू बस स्टैंड क्षेत्र में सफाई के नाम पर भारी भरकम भुगतान निकाला गया, लेकिन जमीन पर कोई विशेष सफाई कार्य दिखाई नहीं देता।गांव की गलियों में कीचड़, नालियों में जमा गंदगी और बदबू आज भी व्यवस्था की पोल खोल रही है। लोगों का कहना है कि यदि सफाई पर लाखों खर्च हुए हैं तो फिर गांव की हालत इतनी बदहाल क्यों है? आखिर किसकी जेब भरने के लिए सरकारी खजाना खाली किया गया?

रंगमंच बना सवालों का मंच

वार्ड क्रमांक 16 और 20 में बनाए गए रंगमंच भी अब सवालों के घेरे में हैं। ग्रामीणों के अनुसार स्वीकृत राशि के अनुरूप निर्माण नहीं हुआ और गुणवत्ता भी बेहद खराब बताई जा रही है। आरोप है कि निर्माण कार्यों में मानकों की खुलेआम अनदेखी की गई और जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखें मूंद लीं।गांव में चर्चा है कि निर्माण की मजबूती से ज्यादा “बिलों की मजबूती” पर ध्यान दिया गया। जनता अब पूछ रही है कि क्या पंचायतों में विकास सिर्फ कागजों और फोटोग्राफ तक सीमित रह गया है?

सीसी रोड अधूरी, मशीनों से काम कर मजदूरों का हक छीना

ग्रामीणों ने कई स्थानों पर बनी सीसी रोड को अधूरा और घटिया गुणवत्ता का बताया है।आरोप है कि मजदूरों से काम कराने के बजाय मशीनों का उपयोग किया गया, जिससे मजदूरी मद का भी कथित दुरुपयोग हुआ। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि पहले पंचायतें रोजगार का जरिया होती थीं, लेकिन अब मशीनों और फर्जी बिलों का खेल बनती जा रही हैं। विकास की सड़क बनने से पहले ही टूटने लगे तो जनता भरोसा किस पर करे?

श्मशान घाट से लेकर नल-जल योजना तक सवाल

विरखा श्मशान घाट में टीन शेड निर्माण, नल-जल योजना और सफाई कार्यों में भी अनियमितताओं की शिकायत की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि कई योजनाएं अधूरी पड़ी हैं, लेकिन भुगतान पूरे कर दिए गए। इससे यह आशंका गहरा गई है कि सरकारी योजनाओं को कुछ लोगों ने कमाई का जरिया बना लिया है।

हाट बाजार क्षेत्र का सीसीकरण भी विवादों में

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हाट बाजार क्षेत्र में कराया गया सीसीकरण घटिया स्तर का है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पहले जांच में दोष पाए गए थे तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की फाइलें भी रिश्वत के बोझ तले दब गई हैं? जनता का गुस्सा इस बात को लेकर भी है कि शिकायतों और जांच प्रतिवेदनों के बावजूद यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तो फिर शासन की “जीरो टॉलरेंस” नीति केवल भाषणों तक सीमित होकर रह जाती है।

पुरानी सड़क पर नई सड़क, सरकारी धन का दुरुपयोग?

शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि सरपंच द्वारा अपने घर के सामने पुरानी सीसी रोड के ऊपर ही नई सड़क बनवा दी गई। यदि यह आरोप सही साबित होता है तो यह सीधे-सीधे सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला माना जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के कई हिस्सों में लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, लेकिन कुछ स्थानों पर सिर्फ निजी लाभ के लिए सरकारी पैसा बहाया जा रहा है।

पंचों को भी नहीं जानकारी, आखिर किसके आदेश से निकल रही राशि?

मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पंचायत से राशि निकालने में पंचों तक को जानकारी नहीं दी जा रही। यदि पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों को ही जानकारी नहीं है तो फिर निर्णय कौन ले रहा है? यह सवाल केवल उमरियापान पंचायत का नहीं, बल्कि पूरे पंचायत तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।

जनता की मांग जांच हो, खाते फ्रीज हों

ग्रामीणों ने मांग की है कि पंचायत में हुए सभी निर्माण कार्यों और 70-80 लाख रुपये के भुगतान की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक पंचायत खाते को फ्रीज किया जाए, ताकि आगे किसी भी प्रकार के वित्तीय दुरुपयोग को रोका जा सके।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है। क्या भ्रष्टाचार के आरोपों पर सख्त कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा? उमरियापान की जनता अब जवाब चाहती है विकास के नाम पर निकली रकम आखिर गई कहां?