Chief Editor

Dharmendra Singh

Office address -: hanuman colony gole ka mandir gwalior (m.p.) Production office-:D304, 3rd floor sector 10 noida Delhi Mobile number-: 9806239561, 9425909162

April 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
27282930  
April 26, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

बालाघाट में 62 हेक्टेयर वन भूमि पर बॉक्साइट खनन प्रस्ताव केंद्र सरकार ने रोका खनन कंपनी पर लगे है वन्यजीव अपराध के आरोप

बालाघाट में 62 हेक्टेयर वन भूमि पर बॉक्साइट खनन प्रस्ताव केंद्र सरकार ने रोका

खनन कंपनी पर लगे है वन्यजीव अपराध के आरोप

​भोपाल । ​बालाघाट जिले की बैहर तहसील में 62 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि (रिजर्व फॉरेस्ट) को बॉक्साइट खनन के लिए डायवर्ट करने का प्रस्ताव फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है। केंद्र सरकार की वन सलाहकार समिति (FAC) ने पर्यावरणीय संवेदनशीलता और वन्यजीवों की सुरक्षा को देखते हुए न केवल इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला टाल दिया है, बल्कि मध्य प्रदेश सरकार से कई कड़े बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है।
​प्रस्तावित प्रोजेक्ट और पर्यावरणीय चिंता
​वारजीरी डादर और बेयर हिल बॉक्साइट ब्लॉक के लिए मेसर्स निसर्ग इस्पात प्राइवेट लिमिटेड को खनन लीज दी जानी प्रस्तावित है। कुल 117.51 हेक्टेयर के इस प्रोजेक्ट में 62 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है, जिसके लिए 16,648 पेड़ों की कटाई होनी है।
समिति ने रिपोर्ट में पाया कि यह क्षेत्र कान्हा–पेंच कॉरिडोर से महज 21 किमी दूर है और यहाँ बाघ, तेंदुआ, स्लॉथ भालू, गौर (बाइसन), सांभर और चीतल जैसे महत्वपूर्ण वन्यजीवों की सघन मौजूदगी है।

​समिति द्वारा उठाई गई मुख्य आपत्तियां:

​अपूर्ण क्षतिपूरक वृक्षारोपण (CA): कंपनी ने 62.7 हेक्टेयर गैर-वन भूमि पर वृक्षारोपण का प्रस्ताव दिया था, लेकिन जमीन छोटे-छोटे टुकड़ों में होने के कारण कमेटी ने इसे नामंजूर कर दिया और इसे एक साथ समेकित (Consolidated) रूप में देने को कहा है।

– PCCF (वाइल्डलाइफ) की टिप्पणी: वन्यजीवों पर संभावित प्रभाव को देखते हुए वाइल्डलाइफ विंग की आधिकारिक रिपोर्ट अनिवार्य की गई है।

​NOC का अभाव : प्रस्तावित क्षेत्र से गुजर रही ट्रांसमिशन लाइन के लिए संबंधित विभाग की अनापत्ति अभी तक प्राप्त नहीं हुई है।

——————
​ कंपनी पर है एक तेंदुए की हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप
​एक ओर केंद्र सरकार ने तकनीकी कारणों से फाइल रोकी है, वहीं दूसरी ओर कंपनी के विरुद्ध पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) में एक गंभीर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। जबलपुर के एक वकील द्वारा दर्ज शिकायत के मुख्य बिंदु:
​वन्यजीव अपराध: आरोप है कि कंपनी (निसर्ग इस्पात) के परिसर में अनुसूची-I के तहत संरक्षित एक तेंदुए की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी।
​साक्ष्यों से छेड़छाड़: शिकायत में कहा गया है कि तेंदुए के अंगों के साथ छेड़छाड़ की गई और साक्ष्यों को नष्ट करने का प्रयास किया गया, जिसकी जांच फिलहाल लंबित है।
​पट्टे निरस्त करने की मांग: अधिवक्ता ने मांग की है कि ऐसे गंभीर अपराध में संलिप्त कंपनी और उसके निदेशक महेंद्र गोयनका को आवंटित सभी वर्तमान वन पट्टे निरस्त किए जाएं और भविष्य में किसी भी प्रकार का भूमि आवंटन न किया जाए।

_ _ _ _ _ _ _ _ _ _
​प्रोजेक्ट डिटेल:
वारजीरी डादर एवं बेयर हिल बॉक्साइट ब्लॉक (बालाघाट)।
​कुल प्रभावित वन भूमि: 62 हेक्टेयर (लगभग 16,648 पेड़ों की बलि)।
​स्थित: ‘डिफर्ड’ (स्थगित) – केंद्र ने मप्र सरकार से संशोधित रिपोर्ट मांगी है।
​कानूनी पेच: कंपनी पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (1972) और वन अधिनियम (1980) के उल्लंघन के आरोप में निष्पक्ष जांच की मांग।
​कमेटी ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी बिंदुओं पर संशोधित और पूर्ण जानकारी नहीं मिल जाती, तब तक खनन की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार अब इस मामले में वन्यजीव अपराध के आरोपों और तकनीकी कमियों पर विस्तृत जवाब तैयार कर रही है।