सिलोंडी में सिहोरा मंडी जांच के नाम पर वसूली का बड़ा खेल…? सिलोंडी के किसानों-व्यापारियों ने लगाए गंभीर आरोप
डीएस फ्लाइंग दल और सिहोरा मंडी से जुड़े कर्मचारियों पर कार्रवाई का डर दिखाकर हजारों रुपये लेने के आरोप, उच्च स्तरीय जांच की उठी मांग
कटनी/ढीमरखेड़ा। कटनी जिले की ढीमरखेड़ा तहसील अंतर्गत ग्राम सिलोंडी में सिहोरा मंडी विभाग से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों पर गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय छोटे कृषकों और व्यापारियों का कहना है कि जांच और कार्रवाई का भय दिखाकर उनसे अवैध वसूली की जा रही है। मामले में सिहोरा गल्ला मंडी से जुड़े कुछ बाबुओं और डीएस फ्लाइंग दल के सदस्यों के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, सिलोंडी क्षेत्र के किसान और छोटे व्यापारी अपनी कृषि उपज बेचने के लिए सिहोरा मंडी जाते हैं। आरोप है कि मंडी से जुड़े कुछ कर्मचारी कथित रूप से सुविधा शुल्क की मांग करते हैं। पैसा नहीं देने पर जांच, जब्ती और प्रकरण दर्ज करने की धमकी दी जाती है।
सेवाराम साहू सहित कई व्यापारियों को डराने का आरोप
स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि सिहोरा डीएस फ्लाइंग दल के सदस्य विवेक गुप्ता (एसआई) एवं उनके साथियों ने सिलोंडी के व्यापारी सेवाराम साहू सहित अन्य व्यापारियों को जांच के नाम पर रोककर पूछताछ की, कार्रवाई का डर दिखाया और प्रकरण बनाने का दबाव बनाया। आरोप यह भी लगाया गया है कि बाद में कथित रूप से राशि लेकर मामला बिना किसी औपचारिक कार्रवाई के समाप्त कर दिया गया।
“बड़े बाबुओं के नाम भी आ सकते हैं सामने”
ग्रामीणों और व्यापारियों का कहना है कि यह कोई एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि लंबे समय से चल रहा संगठित खेल हो सकता है। उनका दावा है कि यदि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तो मंडी विभाग से जुड़े कई प्रभावशाली बाबुओं और कर्मचारियों की भूमिका उजागर हो सकती है।
जबलपुर से आने वाले अधिकारियों पर भी सवाल
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जबलपुर जिले के सिहोरा से आने वाले गल्ला मंडी अधिकारी और फ्लाइंग टीम कटनी जिले के सिलोंडी क्षेत्र में पहुंचकर छोटे कृषकों और व्यापारियों को जांच का हवाला देकर परेशान करते हैं। कार्रवाई का भय दिखाकर हजारों रुपये की वसूली किए जाने की बात कही जा रही है।
किसानों ने प्रशासन से की ये मांग
– सिलोंडी में हुई कथित जांच और वसूली की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
सिहोरा – डीएस फ्लाइंग दल की गतिविधियों की सीसीटीवी और दस्तावेजी जांच हो।
– किसानों और छोटे व्यापारियों से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए जाएं।
– मंडी जांच की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए।
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
मामले में लगाए गए आरोपों को लेकर अभी तक मंडी विभाग या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि सिलोंडी क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और किसान-व्यापारी अब जिला प्रशासन, मंडी बोर्ड और राज्य शासन से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला न केवल मंडी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करेगा, बल्कि किसानों और छोटे व्यापारियों के हितों से जुड़ा बड़ा मुद्दा भी बन सकता है।

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