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Dharmendra Singh

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August 10, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

₹75 लाख के ऑफर ने पलटी बाजी! कोर्ट ने आरोपी की डिफॉल्ट बेल की निरस्त। कटनी के चर्चित हत्याकांड में बड़ा फैसला, कोर्ट ने आरोपी की डिफॉल्ट बेल की निरस्त, गवाहों को प्रभावित करने और ₹75 लाख के प्रस्ताव को माना गंभीर आधार

₹75 लाख के ऑफर ने पलटी बाजी! कोर्ट ने आरोपी की डिफॉल्ट बेल की निरस्त।

कटनी के चर्चित हत्याकांड में बड़ा फैसला, कोर्ट ने आरोपी की डिफॉल्ट बेल की निरस्त, गवाहों को प्रभावित करने और ₹75 लाख के प्रस्ताव को माना गंभीर आधार

कटनी के बहुचर्चित हत्याकांड में विशेष न्यायालय एससी-एसटी एक्ट ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए आरोपी आकाश उर्फ गोलू लोधी को पहले दी गई डिफॉल्ट बेल को निरस्त कर दिया है। विशेष न्यायाधीश अनुज कुमार मित्तल की अदालत ने अपने आदेश में माना कि आरोपी के खिलाफ सामने आए तथ्य इतने गंभीर हैं कि उसे जमानत का लाभ जारी रखना न्यायहित में उचित नहीं होगा।

मामला थाना कुठला में दर्ज अपराध क्रमांक 271/2026 से जुड़ा है। आरोपी को पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 187(3) के तहत डिफॉल्ट बेल का लाभ मिला था। इसके बाद मृतक की मां ने अदालत में आवेदन प्रस्तुत कर आरोप लगाया कि जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी लगातार अभियोजन पक्ष और गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।

सुनवाई के दौरान फरियादी पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी और उसके सहयोगियों द्वारा गवाहों पर दबाव बनाने, जान से मारने की धमकी देने तथा साक्ष्य प्रभावित करने का प्रयास किया गया। इतना ही नहीं, अदालत के समक्ष एक वीडियो क्लिप और अन्य दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए, जिनमें कथित तौर पर मृतक की मां को ₹75 लाख का प्रस्ताव दिए जाने की बात सामने आई। आरोप था कि यह रकम समझौते और मामले को कमजोर करने के उद्देश्य से प्रस्तावित की गई थी।

बचाव पक्ष ने इन आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि वीडियो मात्र 28 सेकंड का है और पूरे घटनाक्रम को नहीं दर्शाता। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि किसी प्रकार की राशि स्वीकार नहीं की गई और आरोप निराधार हैं। लेकिन अदालत ने पाया कि स्वयं बचाव पक्ष ने यह स्वीकार किया कि बातचीत के दौरान ₹75 लाख देने का प्रस्ताव रखा गया था, भले ही उसे स्वीकार नहीं किया गया। अदालत ने माना कि इतना मात्र तथ्य भी अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित करने के प्रयास की आशंका को बल देता है।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपी की ओर से सुनवाई के दौरान लगातार कई अंतरिम आवेदन प्रस्तुत किए गए, जिनमें मृतक की मां, उसके परिवार और यहां तक कि पुलिस अधिकारियों को लेकर भी विभिन्न आरोप लगाए गए। न्यायालय ने माना कि इन आवेदनों का प्रभाव अभियोजन साक्ष्यों और गवाहों पर पड़ सकता है।

अपने आदेश में विशेष न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक निर्णय का भी उल्लेख किया और कहा कि यदि जमानत मिलने के बाद आरोपी न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करे, गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास करे या जमानत की शर्तों का उल्लंघन करे, तो अदालत को जमानत निरस्त करने का अधिकार है।

इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपी आकाश उर्फ गोलू लोधी की 7 जुलाई 2026 को दी गई डिफॉल्ट बेल निरस्त कर दी। साथ ही आदेश दिया कि आरोपी 10 दिनों के भीतर न्यायालय के समक्ष समर्पण करे, अन्यथा उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

यह आदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि डिफॉल्ट बेल मिलने का अर्थ यह नहीं है कि आरोपी को गवाहों को प्रभावित करने या न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की छूट मिल जाती है। यदि ऐसा पाया जाता है, तो अदालत जमानत निरस्त करने से भी पीछे नहीं हटेगी। यही कारण है कि इस मामले में ₹75 लाख के कथित प्रस्ताव और गवाहों को प्रभावित करने के आरोप अदालत के निर्णय के प्रमुख आधार बने।

 

 

उक्त पूरे मामले में फरियादी की तरफ से अधिवक्ता कमलेश शुक्ला के द्वारा पैरवी की गई है