
खुशी के आँसू ठंडे, और दुःख में निकले आँसू गर्म होते है- पंडित सुरेश द्विवेदी
*उगमनावास धर्मशाला पर पितृपक्ष में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का समापन हुआ भंडारा का आयोजन*
सरदारपुर से राहुल राठौड़
सरदारपुर – राजोद श्री राम धाकड़ धर्मशाला में पितृपक्ष में चल रही श्रीमद् भागवत कथा दि.15-9-25 से 21-9-25 रविवार तक पंडित श्री सुरेश द्विवेदी के तरोभाव में मद्भागवत गीता का समापन रविवार को हुआ। कथा में भगवान श्री कृष्ण की लिलाओ, सुभद्रा हरण, सुदामा मित्रता के प्रसंगों विषेश रूप में वर्णन किया गया। कथा व्यास ने बताया कि कृष्ण सुदामा की मित्रता हमें सच्चे मित्र सच्चे भक्ति का महत्व समझाती है कथा के दौरान अनेक भजन प्रस्तुत कर नृत्य किए गए जिससे वातावरण भक्ति में आनंदित हो गया । कथा में उपस्थित सारे श्रद्धालुगण कथा श्रवण करते रहे। भागवत कथा का श्रवण करने से जीवन में सुख शांति और समृद्धि आती है संकट में परमात्मा को याद करने से वह दौड़े चले आते हैं:

पं. द्विवेदी ने आगे कहा कि एक समय में एक ही निर्णय लेने वाला व्यक्ति सफल होता है। बार-बार निर्णय बदलने वाला व्यक्ति जीवन में कभी सफल नहीं होता। लाभ हमारे पुण्य कर्मों और नुकसान पाप कर्मों से होता है। गौसेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं। भागवत ज्ञान गंगा में गुरुवार को गिरिराज पर्वत पूजा, माखन लीला, ब्रिज की रासलीला सहित विभिन्न धार्मिक विषयों के महत्व पर प्रकाश डाला। बताया एकादशी का व्रत करने वाले व्यक्ति के पूर्वजों को नरक गति नहीं मिलती है। ब्राह्मण पूरे संसार की भलाई के लिए कर्म करते हैं।
भगवान की भक्ति में डूब कर कथा का आनंद लिया। हुआ भंडारे का आयोजन।


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