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Dharmendra Singh

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February 2026
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February 21, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

महाराष्ट्र राज्य जिला गडचिरोली ‘महिला आयोग आपके द्वार’ पहल के तहत राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा श्रीमती रूपाली चाकणकर की अध्यक्षता में आयोजित जनसुनवाई…..

महाराष्ट्र राज्य जिला गडचिरोली ‘महिला आयोग आपके द्वार’ पहल के तहत राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा श्रीमती रूपाली चाकणकर की अध्यक्षता में आयोजित जनसुनवाई…..

 

महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए राज्य महिला आयोग प्रतिबद्ध; राज्य में 5 हजार मामले सुलझाए गए –श्रीमती रूपाली चाकणकर

प्राप्त सभी 44 शिकायतों पर कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि राज्य महिला आयोग महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

नियोजन भवन में आयोजित इस जनसुनवाई में आयोग की सदस्य सचिव श्रीमती नंदिनी आवडे, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सुहास गाडे, अपर पुलिस अधीक्षक श्री एम. रमेश, अतिरिक्त जिलाधिकारी श्री संजय आसवले, जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री ए.पी. खानोलकर, उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी (महिला एवं बाल कल्याण) दीपक बानाईत, नगर अध्यक्षा श्रीमती प्रणोती निंभोरकर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य बातें:

स्थानीय स्तर पर समाधान: उद्घाटन सत्र के दौरान श्रीमती रूपाली चाकणकर ने बताया कि महिलाओं को न्याय पाने के लिए मुंबई के चक्कर न काटने पड़ें और उनकी शिकायतों का निपटारा स्थानीय स्तर पर ही हो सके, इसी उद्देश्य से आयोग स्वयं जिले में आकर जनसुनवाई कर रहा है।

बड़ी उपलब्धि: उन्होंने जानकारी दी कि अब तक पूरे राज्य में जनसुनवाई के माध्यम से 5,000 मामलों का निपटारा किया जा चुका है

 

४४ शिकायतों पर कार्रवाई

जनसुनवाई में कुल ४४ शिकायतों पर कार्रवाई की गई। इनमें पारिवारिक समस्याएँ – २२, सामाजिक समस्याएँ – ५, आर्थिक समस्याएँ – ३ और अन्य १४ शिकायतों का समावेश था। जनसुनवाई में प्राप्त शिकायतों का त्वरित और प्रभावी निपटारा हो सके, इसके लिए चार स्वतंत्र पैनल बनाए गए थे। प्रत्येक पैनल में संबंधित विभागों के अधिकारी, कानूनी विशेषज्ञ और पुलिस प्रशासन के प्रतिनिधि शामिल थे। सभी संबंधित प्राधिकरणों के एक ही स्थान पर उपस्थित होने के कारण कई मामलों का मौके पर ही समाधान निकाला गया।

मदद के लिए टोल-फ्री नंबर

अध्यक्षा चाकणकर ने कहा कि महिलाओं को कोई भी समस्या होने पर वे टोल-फ्री नंबर १०९१ (महिला हेल्पलाइन), ११२ (आपातकालीन सेवा), वन स्टॉप सेंटर, भरोसा सेल और दामिनी पथक के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज कराएं; शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

‘गर्भ न मारने वाले ही गर्भश्रीमंत’

दहेज निषेध कानून अस्तित्व में होने के बावजूद लड़कियों का उत्पीड़न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दहेज देने वाला और लेने वाला दोनों ही अपराधी हैं। लड़कियों को अच्छी शिक्षा देकर उनकी योग्यता के आधार पर विवाह होना चाहिए। साथ ही, उन्होंने अभिभावकों से बाल विवाह रोकने के लिए जागरूक रहने का आह्वान भी किया।

आदिवासी क्षेत्रों में गर्भपात की दर बहुत कम होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने अपने विचार व्यक्त किए कि “जो गर्भ की हत्या नहीं करते, वही वास्तव में गर्भश्रीमंत (भाग्यशाली/अमीर) हैं।”

ज़िला सूचना कार्यालय गडचिरोली

आयोग की सदस्य सचिव श्रीमती नंदिनी आवडे, ज़िला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सुहास गाडे, विधि सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री खानोरकर, अतिरिक्त ज़िलाधिकारी श्री संजय आसवले ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए और अपने विभागों के माध्यम से महिलाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी।

कार्यक्रम की प्रस्तावना ज़िला महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्रीमती ज्योति कडू ने दी।

 

महेश पांडुरंग शेंडे की रिपोर्ट…..