महाराष्ट्र राज्य महाराष्ट्र दिन के अवसर पर अनोखी पहल कर्तव्यदक्ष पोलीस अधीक्षक श्री एम. रमेश द्वारा जिले में नशीले पदार्थों के सेवन, उपयोग और बिक्री पर अंकुश लगाने के लिये पुलिस प्रशासन ऍक्शन मोड पर….

कामकाज की समीक्षा जिसमें नशीले पदार्थों के खिलाफ विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा झिरो टोलारन्स के तहत कार्रवाई के निर्देश
शिक्षा विभाग: स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में शराब, गांजा और तंबाकू का सेवन न हो, यह सुनिश्चित करें। साथ ही, निबंध प्रतियोगिताओं, वाद-विवाद स्पर्धा और रैलियों के माध्यम से नशा मुक्ति के प्रति जन-जागरूकता फैलाएं।
अन्न एवं औषधि प्रशासन (FDA): सहायक आयुक्त जिले के चालू और बंद मेडिकल स्टोर्स का औचक निरीक्षण करें और अवैध ड्रग्स की बिक्री की जांच करें।
कृषि विभाग: इस बात का ध्यान रखें कि जिले के खेतों में अफीम (खसखस) या गांजे की अवैध खेती न हो।
स्वास्थ्य विभाग: नशीले पदार्थों के सेवन के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की जानकारी तुरंत पुलिस प्रशासन को दें।
डाक और परिवहन विभाग: यदि डाक के माध्यम से आने वाले पार्सल में नशीले पदार्थों का संदेह हो, तो डाक विभाग और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) इसकी सूचना पुलिस को दें।
पुलिस स्टेशन प्रमुख: सभी थाना प्रभारी निजी कूरियर एजेंसियों के संपर्क में रहें और नशीले पदार्थों के परिवहन के संबंध में जानकारी प्राप्त करें।
पुलिस और अन्य विभागों के लिए निर्देश:
पुलिस विभाग: नशीले पदार्थ रखने वालों पर समय-समय पर छापेमारी करें और नशा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।
इस पहल के चलते तेज तर्रार और सक्त कर्तव्यनिष्ठ SDPO श्री अजय कोकाटे ने कहा की –
नदी घाट : तेलंगाना और अन्य राज्यों से आने वाले संदिग्ध यात्रियों के सामान और लावारिस सामानों की गहन जांच करें और उचित कानूनी कार्रवाई करें।
मुख्य संदेश: यह निर्देश नशीली दवाओं के नेटवर्क को तोड़ने और समाज, विशेषकर युवाओं को इसके दुष्प्रभाव से बचाने के लिए एक संयुक्त अभियान का हिस्सा हैं।
कॉलेजों पर विशेष ध्यान: आज की युवा पीढ़ी के नशे की ओर जाने की संभावना को देखते हुए कॉलेजों में विशेष निगरानी रखी जाए।
सतर्कता: जिले में कहीं भी नशीले पदार्थों की बिक्री, भंडारण या उपयोग न हो, इस संबंध में पूरी सावधानी बरती जाए।
स्कैनिंग: बाहर से आने वाले पार्सल/डाक की जांच स्कैनर के माध्यम से करना आवश्यक है।
जागरूकता: 16 से 18 आयु वर्ग के छात्रों को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के बारे में अवगत कराया जाए। इसके लिए स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यशालाएं (Workshops) आयोजित की जाएं।
मुखबिर नेटवर्क: जिले में नशीले पदार्थों की आवक और बिक्री की जानकारी प्राप्त करने के लिए पुलिस विभाग को अपना मुखबिर (Informer) नेटवर्क मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
महेश पांडुरं
ग शेंडे की रिपोर्ट….

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