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Dharmendra Singh

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July 22, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

जज को फोन लगाने के आपराधिक अवमानना मामले में विधायक संजय सत्येंद्र पाठक को हाई कोर्ट से बड़ी राहत हाई कोर्ट ने स्वीकार की बिना शर्त माफी; भविष्य के लिए दी कड़क चेतावनी

जज को फोन लगाने के आपराधिक अवमानना मामले में विधायक संजय सत्येंद्र पाठक को हाई कोर्ट से बड़ी राहत

हाई कोर्ट ने स्वीकार की बिना शर्त माफी; भविष्य के लिए दी कड़क चेतावनी
जबलपुर।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (जबलपुर की मुख्य पीठ) ने विजयराघवगढ़ से विधायक संजय सत्येंद्र पाठक के खिलाफ दर्ज आपराधिक अवमानना मामले का निपटारा कर दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की डबल बेंच ने विधायक द्वारा प्रस्तुत की गई बिना शर्त लिखित माफीनामा को स्वीकार करते हुए उन्हें सख्त चेतावनी दी है कि भविष्य में इस प्रकार के कृत्य की पुनरावृत्ति न हो।

क्या था पूरा मामला?
मामला कटनी जिले से जुड़ी तीन खदान कंपनियों द्वारा ₹1,200 करोड़ रुपये के कथित अवैध उत्खनन (₹1000 करोड़ मुख्य राशि + 18% GST) की जांच की मांग से जुड़ा है। याचिकाकर्ता आशुतोष दीक्षित ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर EOW शिकायत पर FIR दर्ज करने का निर्देश मांगा था।
इस मामले की सुनवाई के दौरान 1 सितंबर 2025 को संबंधित सिंगल जज की पीठ ने अपने आदेश में दर्ज किया था कि “संजय पाठक द्वारा प्रकरण के संबंध में चर्चा करने हेतु मुझे फोन करने का प्रयास किया गया है, अतः मैं इस याचिका पर सुनवाई करने का इच्छुक नहीं हूँ”
इसके बाद, 02 अप्रैल 2026 को हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने मामले का संज्ञान लेते हुए संजय सत्येंद्र पाठक के खिलाफ स्वतः संज्ञान आपराधिक अवमानना मामला (Suo Motu Contempt Petition Criminal No. 5/2026) दर्ज करने का आदेश दिया था।

अदालत में विधायक का पक्ष
विधायक संजय पाठक की ओर से देश के वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और अनिल खरे ने पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि:
गलती से लगा था कॉल: 30 अगस्त 2025 को गलती से जज साहब का नंबर डायल हो गया था, जिसे तुरंत डिस्कनेक्ट कर दिया गया था।
सौजन्य संदेश: फोन कटने के बाद शिष्टाचार के नाते केवल परिचय का मैसेज भेजा गया था।
कोई बातचीत नहीं: मामले को लेकर जज साहब से किसी भी तरह की कोई सीधी बातचीत या प्रभाव डालने की कोशिश नहीं की गई।
न्यायपालिका का सम्मान: विधायक संस्थागत न्यायपालिका का गहरा सम्मान करते हैं और बिना शर्त माफी मांगते हैं।

हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
हाई कोर्ट ने अवमानना अधिनियम की धारा 2(c), धारा 12 और धारा 13 के प्रावधानों का हवाला देते हुए माना कि किसी भी व्यक्ति द्वारा सुनवाई कर रहे जज से संपर्क करने का प्रयास करना आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी पाया कि:
विधायक ने अपनी गलती स्वीकार की और बिना शर्त माफी मांगी है।
यह कृत्य न्याय की स्वाभाविक प्रक्रिया में इतना बड़ा सीधा व्यवधान नहीं था कि इसके लिए सजा या जुर्माना ही लगाया जाए।

कोर्ट की टिप्पणी:
“हम विधायक संजय सत्येंद्र पाठक का बिना शर्त माफीनामा स्वीकार करते हैं। हालांकि, जन प्रतिनिधि होने के नाते उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे भविष्य में इस तरह के आचरण से बचें और सतर्क रहें।”