विशाल भौरासे रिपोटर


#गुरुपूर्णिमा_उत्सव
गुरु परम्परा हमारी संस्कृति को महान बनाती है ।
बैतूल,भारत भारती आवासीय विद्यालय में गुरूपूर्णिमा के अवसर पर छात्रों ने सभी शिक्षकों का सम्मान वस्त्र और श्रीफल भेंट कर किया । कार्यक्रम का शुभारम्भ मां सरस्वती की वंदना के साथ हुआ। मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में भारत भारती शिक्षा समिति के सचिव श्री मोहन नागर, विद्यालय के प्राचार्य श्री गोविन्द कारपेन्टर उपस्थित थे ।
इस अवसर पर श्री नागर ने सम्बोधित करते हुए कहा कि जीवन में गुरू का बहुत महत्व है। बिना गुरू के हमें जीवन की सही दिशा नही मिल सकती। भारत के महापुरूषों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमने महापुरूषों से त्याग, समर्पण, बलिदान, परोपकार आदि गुण सीखे हैं तो ये महापुरूष भी हमारे गुरू हुए। गुरु परम्परा ने हमारी संस्कृति को महान बनाया है ।
प्राचीनकाल में सैंकड़ों प्रकार की विद्याऐं गुरूकुल के माध्यम से शिष्य को प्राप्त होती थीं। उस काल में गुरू का दायित्व केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं शिष्य के संपूर्ण जीवन में काम आने वाली युक्तियों की शिक्षा देना था। उन्होंने कहा कि अंतर हाथ सहार दै की भावना से गुरू हमारे दुर्गुणों और बुराइयों को दूर कर हमारे आने वाले जीवनकाल की चुनौतियों से लडऩे में सामथ्र्यवान बनाता है। गुरू का दायित्व शिष्य के प्रति केवल उसके अध्ययनकाल तक सीमित नहीं रहता। एक श्रेष्ठ गुरू अपने शिष्य के समूचे जीवनकाल को सुखमय, आनन्दमय और ज्ञानमय प्रकाश से भर देता है। विद्यार्थी जीवन में हम हमारे गुरूजन से शिक्षा के साथ साथ नैतिक मूल्य, व्यवहार, सदाचार, सत्यवादिता आदि गुण सीखते हैं। ये गुण हमारे जीवन भर हमें यश और सम्मान दिलाते हैं। गुरू का ऋण हम जीवन भर चुका नहीं सकते। ऐसे गुरूजनों को सादर वन्दन.. ..
कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य श्री गोविन्द कारपेन्टर समेत समस्त शिक्षक गण उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन कक्षा 12 वी के छात्र हिमेन्द्र बैरागी ने और आभार प्रदर्शन छात्र दीपक जाट ने किया।

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