श्रीमति एस .पाटीदार रिपोर्टर

पुरानी परंपरा को जीवित रखने और आध्यात्मिक क्षेत्र में उन्नति हेतु कावड़ यात्रा करते हैं । प्रतिवर्ष मनावर में भी कावड़ियों द्वारा “बंक नाथ अटल दरबार शिव मंदिर ” में जलाभिषेक करते हैं।
कावड़ यात्रा की परंपरा समुद्र मंथन से प्रारंभ हुई थी ।
पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन से निकले विष को पी लेने कारण भगवान शिव का कंठ नीला हो गया। इस नकारात्मक प्रभाव को दूर करने के लिए उनके खास अनन्य भक्त- प्रकांड विद्वान, ज्ञानी , लंकापति रावण ने ध्यान किया ।
रावण ने कांवड़ में जल भरकर “पुरा महादेव” स्थित शिव मंदिर में शिव जी का अभिषेक किया । सचमुच कावड़ यात्रा की परंपरा यही से शुरू की गई ।
देवताओं ने सर्वप्रथम समुद्र मंथन से निकले हला- हल को दूर करने के लिए देवताओं ने शिव पर पवित्र नदियों से “जलाभिषेक” किया । परशुराम ऋषि मुनि, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ,श्रवण कुमार ने भी कावड़ यात्रा की। राधेश्याम मुवेल मित्र मंडल, गोलु दरबार मित्र मंडल, गण राज मित्र मंडल -जुनी मनावर के द्वारा भगवा ध्वज में कावड़ यात्रा का शुभारंभ किया ,जबकि जयस के लालू बर्मन द्वारा जयस के झंडे तले कावड़ यात्रा प्रारंभ की ।रविंद्र पाटीदार, रोटी बैंक अध्यक्ष भी सम्मिलित हुए।
मोरार के लगभग 500 कावड़ियों द्वारा उनके गांव में शिव जी का जलाभिषेक किया गया।
परम पूज्य पूज्यनीय , प्रातः स्मरणीय , ईश्वर के समतुल्य श्री योगेश जी महाराज श्रीधाम बालीपुर द्वारा सभी कावडियो का स्वागत कर शिवजी का जलाअभिषेक किया गया।

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