Chief Editor

Dharmendra Singh

Office address -: hanuman colony gole ka mandir gwalior (m.p.) Production office-:D304, 3rd floor sector 10 noida Delhi Mobile number-: 9806239561, 9425909162

March 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031  
March 25, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

देश की आजादी पूरे 75 साल की हो गई। बड़ी शान से इतराते हुए दोनों हाथों से हम भरपूर जश्न मना रहे हैं। आजादी की तरह यह अमृत महोत्सव भी आने वाली पीढ़ी के लिए इतिहास बन जाएगा। कागजों पर सिर्फ दर्ज नहीं होगा, तो मप्र के आदिवासी जिले डिंडौरी का शर्मसार करने वाला विषमत नंदा की मौत का किस्सा…जिसकी लाश को अंतिम संस्कार के लिए ट्यूब पर बांधकर ले जाना पड़ा। आजादी के जश्न के बीच ये मौत भी कुछ बोलने मजबूर है। पढ़िए ये पूरी खबर…

हम आजाद है, 75 साल की आजादी का अमृत दोनों हाथों से संवारा है। बोलने की आजादी है, लिखने की आजादी है, आजादी को ‘आजादी’ साबित करने की आजादी है। लेकिन ज़रा, इसके जश्न में सराबोर देश की आंखे इन तस्वीरों को भी देखें। उफनती नदी में टायर ट्यूब पर लाश की ये तस्वीर मप्र के आदिवासी जिले डिंडौरी की है। जिसे अपने अंतिम पड़ाव यानी मुक्ति धाम पहुंचने सिर्फ और सिर्फ यही सहारा नसीब हुआ।

अनूपपुर जिला के ठाड़पथरा के रहने वाले 55 वर्षीय विषमत नंदा को दिल का दौरा पड़ा था। गांव से ज्यादा नजदीक डिंडौरी जिले का सरकारी अस्पताल था, तो परिजन किसी तरह उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बाद, उन्हें बचाया नहीं जा सका। 14 अगस्त की दोपहर विषमत की मौत हो गई।

विषमत की मौत से परिवार के लोग मातम में डूबे थे। अब शव को अंतिम संस्कार के लिए वापस गांव ले जाना था। तभी पता चला कि लगातार बारिश की वजह से गांव पहुंचने के रास्ते में पड़ने वाली नर्मदा नदी उफान पर है। अस्पताल से करीब 40 किलोमीटर दूर पथरकूचा गांव तक नदी के नजदीक एम्बुलेंस के जरिए तो पहुंच गए, लेकिन वहां से नदी के दूसरी छोर ठाड़पथरा गांव तक शव लेकर कैसे पहुंचा जाए, यह सबसे बड़ी चुनौती थी। इसलिए भी क्योकि बारिश थम नहीं रही थी और सूरज ढलने के पहले परिजनों को अपने गांव तक पहुंचना भी जरुरी था।

कई जिम्मेदारों से कोई मदद न मिलने के बाद परिजनों के लिए टायर ट्यूब ही सहारा बना। ये दृश्य दिल को झकझोर देने वाले है। विषमत के शव को ट्यूब में बांधा गया, फिर उसे तैराते हुए नदी के दूसरे छोर ले जाना पड़ा। जब तक शव के साथ परिजन दूसरी तरफ नहीं पहुंचे, तब तक नर्मदा के तेज बहाव में उनकी जिंदगी भी बड़े जोखिम के साथ तैरती रही।

ख़ास बात यह है कि नर्मदा नदी का यह हिस्सा डिंडौरी और अनूपपुर दोनों जिलों को जोड़ता हैं। मृतक जिस गांव का रहने वाला था, उससे लगे करीब दर्जन भर छोटे-बड़े गांव के लोगों के लिए डिंडौरी नजदीक पड़ता हैं। लिहाजा चिकित्सा सुविधा से लेकर अन्य कामों के लिए ग्रामीण डिंडौरी पर ही निर्भर रहते हैं। ग्रामीण यहां पुल बनाने की कई सालों से मांग करते आ रहे हैं, लेकिन किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। सामान्य दिनों में नाव के जरिए यहां ग्रामीणों का आवागमन होता है।