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Dharmendra Singh

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May 16, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

कटनी: चारों विधायकों ने पुलिस कार्यप्रणाली पर विधानसभा में उठाए सवाल, मुख्यमंत्री ने दिए निष्पक्ष जांच के निर्देश

कटनी: चारों विधायकों ने पुलिस कार्यप्रणाली पर विधानसभा में उठाए सवाल, मुख्यमंत्री ने दिए निष्पक्ष जांच के निर्देश

भोपाल। कटनी जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर पहली बार जिले के चारों विधायकों— संदीप जायसवाल, संजय पाठक, प्रणय पांडे और अभिलाष पांडे—ने एक साथ विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्तुत करते हुए गंभीर सवाल उठाए। विधायकों ने माधवनगर थाना प्रभारी संजय दुबे पर एक प्रकरण में कथित मिलीभगत, अवैध दबाव और गलत धाराएँ लगाने के आरोपों की जांच की मांग की।

ध्यानाकर्षण पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से अधिकृत मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सीसीटीवी फुटेज समेत समूचे प्रकरण की पुनः जांच कराई जाएगी और जांच में दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी विधायकों से कहा कि वे बिंदुवार जानकारी लिखित में दें, जिसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी।

शुभम त्रिपाठी से पुलिस अभिरक्षा में अवैध पूछताछ का आरोप

विधायकों द्वारा दिए गए ध्यानाकर्षण में यह आरोप लगाया गया कि हाउसिंग बोर्ड अग्निकांड मामले में न्यायालय द्वारा पुलिस रिमांड में दिए गए शुभम त्रिपाठी से, टीआई संजय दुबे की मौजूदगी में, कांग्रेस नेता एवं पूर्व हथियार सप्लायर द्वारा कथित रूप से प्रश्नोत्तर किए गए। आरोप है कि इस दौरान शुभम पर एक प्रतिष्ठित व्यक्ति का नाम लेने का दबाव भी बनाया गया।

विधायकों का कहना है कि पुलिस अभिरक्षा में किसी बाहरी व्यक्ति का आरोपी से पूछताछ करना नियमविरुद्ध है और इससे मामले में मिलीभगत की आशंका मजबूत होती है।

कथित रूप से गलत धाराएँ लगाने का आरोप

घटना के अनुसार, 26–27 अगस्त की रात हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी नाजिम खान की बाउंड्रीवाल पर लगी नेम प्लेट में आग लगाई गई थी। आग कुछ ही सेकंड में बुझ गई और किसी प्रकार की हानि नहीं हुई।
इसके बावजूद शुभम त्रिपाठी पर बीएनएस की धारा 326(जी) जैसी गैरजमानती धाराएँ लगाकर उन्हें जेल भेज दिया गया।

विधायकों ने कहा कि—

घर और बाउंड्री के बीच लगभग 15 फीट का अंतर है

कोई जान–माल नुकसान नहीं हुआ

न कोई ठोस सबूत जुटाए गए, न स्वतंत्र गवाह

प्रकरण में नाजिम खान व पुलिस की कथित मिलीभगत स्पष्ट दिखती है

इसके कारण ब्राह्मण समाज के लोगों ने भी बड़ी संख्या में पहुँचकर निष्पक्ष जांच की मांग का ज्ञापन सौंपा था

निर्दोष साबित होने पर प्रकरण निरस्त करने की मांग

विधायकों ने शासन को बताया कि शुभम त्रिपाठी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और प्रकरण राजनीति तथा व्यक्तिगत प्रभाव में आकर दर्ज किया गया है। उन्होंने निष्पक्ष जांच कराने, गलत धाराएँ हटाने और दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

सरकार ने निष्पक्ष जांच का दिया आश्वासन

सरकार ने सदन में आश्वासन दिया है कि—

सीसीटीवी फुटेज सहित पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच होगी

पुलिस अभिरक्षा में अवैध पूछताछ के आरोपों की भी जांच की जाएगी

लापरवाही या मिलीभगत की पुष्टि होने पर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी