महाराष्ट्र राज्य जिला “गढ़चिरौली के लिए स्वतंत्र विजन तैयार करें; राष्ट्रीय औसत से आगे निकलने का लक्ष्य रखें” संयुक्त सचिव प्राजक्ता लवंगारे-वर्मा द्वारा प्रधानमंत्री धनधान्य किसान योजना की समीक्षा

गढ़चिरौली प्रधानमंत्री धनधान्य किसान योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए गढ़चिरौली जिले की प्रत्येक एजेंसी को अपना स्पष्ट विजन, लक्ष्य और भविष्योन्मुखी योजना बनाकर काम करना चाहिए। केंद्रीय परमाणु ऊर्जा विभाग की संयुक्त सचिव तथा गढ़चिरौली जिले के लिए इस योजना की समन्वयक प्राजक्ता लवंगारे-वर्मा ने निर्देश दिए कि प्रत्येक विभाग को अपने विकास कार्यों के मापन के लिए उचित लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए और उनकी नियमित समीक्षा करनी चाहिए।
जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित प्रधानमंत्री धनधान्य किसान योजना की समीक्षा बैठक में बोल रही थीं। इस अवसर पर जिलाधिकारी अविशांत पांडा, जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी प्रीति हिरलकर, ग्रामीण विकास यंत्रणा के परियोजना अधिकारी राहुल कालभोर, सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता राहुल मोरघडे, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रताप शिंदे, मत्स्य पालन सहायक आयुक्त समीर डोंगरे, जिला पशुपालन उपायुक्त डॉ. गणेश मेश्राम, जिला रेशम विकास अधिकारी अजय वासनिक और संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
संयुक्त सचिव लवंगारे-वर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री धनधान्य किसान योजना के तहत जिले की प्रगति को नियमित रूप से डैशबोर्ड के माध्यम से दर्ज किया जाता है। इसी डेटा के आधार पर केंद्र सरकार जिले की प्रगति का मूल्यांकन करती है। इसलिए डैशबोर्ड में सटीक, अद्यतन (updated) और पारदर्शी जानकारी भरना अत्यंत आवश्यक है। बैठक के दौरान डेटा की त्रुटियों और गलतफहमियों को दूर कर सही प्रविष्टि (entry) करने के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई।
गढ़चिरौली का कृषि विजन क्या है?
बैठक में उन्होंने यह प्रश्न उठाया कि गढ़चिरौली जिले का दीर्घकालिक कृषि विजन (vision) क्या है? जिले में कौन सी फसलें बड़े पैमाने पर ली जाती हैं, उनका मूल्यवर्धन (value addition) कैसे किया जाए और राष्ट्रीय तथा राज्य औसत से आगे बढ़ने के लिए कौन सी नीतियां लागू की जाएं, इस पर एक स्पष्ट खाका होना आवश्यक है।
उन्होंने इस बात की जानकारी मांगी कि धान की फसल के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध कराने हेतु क्या उपाय किए गए हैं, क्या बाहरी व्यापारियों के साथ कोई अनुबंध (करार) किया गया है, और क्या मार्केटिंग चेन विकसित करने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृषि उत्पादों की बिक्री के लिए एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) बनाना आवश्यक है।
जैविक ब्रांडिंग और बढ़ी हुई दरों का लाभ
गढ़चिरौली जिला जैविक उत्पादन (organic production) के लिए जाना जाता है। इस पृष्ठभूमि में, जैविक खेती की ब्रांडिंग करना, किसानों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में जैविक उत्पादों को मिलने वाली बढ़ी हुई कीमतों के बारे में जानकारी देना और उन्हें प्रोत्साहित करना आवश्यक है, ऐसा उन्होंने स्पष्ट किया।
रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने के लिए टिकाऊ और प्राकृतिक खेती पद्धतियों को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए, उन्होंने किसानों को सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ दिलाने के लिए समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए।
रेशम उत्पादन के लिए वन संपदा का लाभ लें
जिले में रेशम उत्पादन की अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए, उन्होंने ‘संयुक्त वन प्रबंधन समितियों’ के माध्यम से वन क्षेत्रों में रेशम उत्पादन बढ़ाने के लिए नियोजन करने को कहा। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्र का लाभ उठाकर स्थायी रोजगार निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।
निधि कन्वर्जेंस (अभिसरण) के जरिए योजना को बल
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि ‘जिला खनिज प्रतिष्ठान निधि’ (DMF), ‘जिला विकास निधि’ और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं की निधि का कन्वर्जेंस (एकत्रीकरण) करके योजनाओं को गति दी जाए।
जिसमें जिले के विकास और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए हुई बैठक की जानकारी दी गई है।
निधि कन्वर्जेंस (अभिसरण) के माध्यम से योजना को मजबूती
जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि जिला खनिज प्रतिष्ठान निधि (DMF), जिला विकास निधि और राज्य सरकार की योजनाओं की निधि का कन्वर्जेंस (मेल) करके केंद्र सरकार की योजनाओं के लिए पूरक निधि उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
पारदर्शी और इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली विकसित करें
सह-सचिव ने निर्देश दिए कि किसानों को सभी जानकारी पारदर्शी और इलेक्ट्रॉनिक तरीके से उपलब्ध हो, इसके लिए एक सुसंगत प्रणाली विकसित की जाए। उन्होंने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तकनीक-आधारित नियोजन, डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया लागू करने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
“गढ़चिरौली जिले में अपार क्षमता है। केवल लक्ष्य (टारगेट) पूरा करना ही काफी नहीं है, बल्कि जिले के लिए एक स्वतंत्र विकास दृष्टिकोण (Vision) निश्चित कर राज्य और देश के औसत से आगे बढ़ने का प्रयास होना चाहिए।”
उन्होंने सभी विभागों से एकीकृत नियोजन (Integrated Planning) पर ध्यान देने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की ओर से हर संभव मदद दिलाने के प्रयास किए जाएंगे।
इस बैठक में विभिन्न विभागों के संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
महेश पांडुरंग शेंडे की रिपोर्ट….

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