महाराष्ट्र राज्य जिला गडचिरोली मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस की अनोखी पहल….

गडचिरोली में एकमुश्त नकद हस्तांतरण का पायलट प्रोजेक्ट; जिला प्रशासन और प्रोजेक्ट ‘दीप’ के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर
मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस की पहल से गडचिरोली जिले में वंचित वर्गों के सर्वांगीण सशक्तिकरण के लिए एक अभिनव पायलट प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत गडचिरोली जिला प्रशासन और प्रोजेक्ट दीप (वन स्टेप फॉरवर्ड फाउंडेशन) के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। जिला प्रशासन की ओर से जिलाधिकारी श्री अविश्यांत पंडा ने और ‘दीप’ की ओर से इसके सह-संस्थापक श्री मुजामिल बैग ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।
इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत पात्र और वंचित परिवारों को बिना किसी शर्त और बिना वापसी (Non-refundable) के एकमुश्त नकद राशि सीधे उनके बैंक खातों में स्थानांतरित की जाएगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह है कि लाभार्थी—विशेषकर महिलाएँ—इस निधि का उपयोग दीर्घकालिक निवेश जैसे कि:
आजीविका के साधन
लघु उद्योग,कृषि-पूरक व्यवसाय,आवास सुरक्षा आदि के लिए करके अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकें।
पारंपरिक कल्याणकारी योजनाओं में अक्सर मासिक अनुदान पर जोर दिया जाता है; लेकिन इस परियोजना में “रूपांतरकारी निवेश” की अवधारणा को प्राथमिकता दी गई है। इस प्रयोग के पीछे मुख्य विचार यह है कि एकमुश्त बड़ी राशि उपलब्ध होने से परिवारों की आर्थिक यात्रा में मौलिक बदलाव आ सकता है और परिवार के भीतर महिलाओं की निर्णय लेने की स्थिति और अधिक मजबूत हो सकती है।
शोध-आधारित नीति निर्माण का आधार
इस सहयोग के माध्यम से गडचिरोली जिला प्रशासन का ज़मीनी अनुभव और ‘प्रोजेक्ट डीप’ (Project DEEP) के विशेषज्ञों का ‘नकद हस्तांतरण’ (Cash Transfer) योजनाओं की रूपरेखा व मूल्यांकन का अनुभव एक साथ आ रहा है। तीन साल की अवधि में व्यक्तिगत सर्वेक्षणों और समूह चर्चाओं के माध्यम से इस परियोजना के गरीबी उन्मूलन और सामाजिक-आर्थिक उन्नति पर होने वाले दीर्घकालिक प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा।
इस पायलट प्रोजेक्ट से उत्पन्न होने वाली साक्ष्य-आधारित (Evidence-based) जानकारी भविष्य में राज्य और राष्ट्रीय स्तर की कल्याणकारी नीतियों के लिए एक मार्गदर्शक साबित होगी।
राज्य सरकार को शोध-आधारित नीति सहायता प्रदान करने वाले ‘प्रोजेक्ट डीप’ के सह-संस्थापक मुजामिल बैग ने कहा कि:
“हम केवल गुजारे लायक सहायता देने के बजाय निवेश-केंद्रित दृष्टिकोण की ओर बढ़ रहे हैं। हम एक ऐसा मॉडल बना रहे हैं जो नागरिकों की क्षमता पर विश्वास रखता है। यह साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण भविष्य की कल्याणकारी नीतियों के लिए एक आदर्श बन सकता है।”
इस तीन साल की साझेदारी का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि धन का प्रभाव केवल तत्काल खर्च तक सीमित न रहे, बल्कि गडचिरोली के परिवारों के जीवन स्तर में स्थायी और सकारात्मक बदलाव लाने पर ध्यान केंद्रित किया जाए।
महेश पांडुरंग शेंडे की रिपोर्ट…..

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