*पवन चक्की के भारी वाहन रौंद रहे प्रधानमंत्री सड़क, प्रशासन मौन!…*
*किसानों और ग्रामीणों की जीवनरेखा बनने जा रही सड़क अब गड्ढों में तब्दील…*
सरदारपुर से राहुल राठौड़
सरदारपुर – सरदारपुर तहसील के दसाई रोड से भीलगुन तक तथा धार तहसील के छट्टीया से धामन्दा मार्ग पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बनी ग्रामीण सड़कें इन दिनों भारी औद्योगिक वाहनों की बेरोकटोक आवाजाही से सड़क खराब दिखाई दे रही है। पवन चक्की कंपनियों के विशाल ट्रेलर और मशीनरी ढोने वाले भारी वाहन इन सड़कों से गुजर रहे हैं, जिससे सड़क की कई जगह सतह उखड़ती नजर आ रही है…
*फोटो बयां कर रही हकीकत…*
मौके पर खींची गई तस्वीर में साफ दिखाई दे रहा है कि संकरी ग्रामीण सड़क पर एक विशाल ट्रेलर, जिस पर पवन चक्की का लंबा ब्लेड लदा हुआ है, मुश्किल से गुजर रहा है। सामने से आ रहे छोटे वाहन को कच्चे किनारे पर उतरना पड़ा।
तस्वीर यह भी दर्शाती है कि सड़क इतनी संकरी है कि भारी वाहन निकलते समय दोनों ओर के किनारों को घेर रखा है, एक ओर खेत, दूसरी ओर कच्चा हिस्सा — ऐसे में बाइक सवारों और छोटे चार पहिया वाहनों को जान जोखिम में डालकर साइड लेना पड़ता है।
विशेषकर दसाई–भीलगुन और छट्टीया–धामन्दा मार्ग पर कई मोड़ ऐसे हैं जहां सामने से यदि भारी ट्रेलर आ जाए तो साइड देने की पर्याप्त जगह नहीं बचती। यदि इसी दौरान एम्बुलेंस या स्कूल बस फंस जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
*क्या प्रशासन को नहीं दिख रही हकीकत…?
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की गाइडलाइन के अनुसार ग्रामीण सड़कों को एक निश्चित भार क्षमता के अनुसार डिजाइन किया जाता है। ये सड़कें मुख्यतः ग्रामीण आवागमन, किसानों की उपज ढुलाई, एम्बुलेंस एवं स्कूल वाहनों की सुविधा के लिए बनाई जाती हैं।
*राहगीरों की सुरक्षा किसके भरोसे…?*
जहां-जहां भारी वाहनों से मुरम और पत्थर गिरे हैं, वहां सड़क फिसलन भरी हो गई है। बाइक सवार धीरे-धीरे निकलने को मजबूर हैं। कई बार बड़े वाहन साइड तक नहीं देते, जिससे छोटे वाहन चालकों को कच्चे और असमतल हिस्से में उतरना पड़ता है। सड़क की बदहाल स्थिति समय के साथ जान के लिए भी खतरा बन सकती है।
सबसे चिंताजनक स्थिति उन स्थानों पर है जहां बड़े वाहनों से मुरम और पत्थर सड़क पर गिर गए हैं। दोपहिया वाहन चालकों के लिए ये जगहें फिसलन भरी और दुर्घटना संभावित बन चुकी हैं। बावजूद इसके, न तो चेतावनी संकेतक लगाए गए हैं और न ही कोई गति अवरोधक या सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
जहां पत्थर और मुरम फैली हुई है, वहां दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। यदि किसी दिन कोई बड़ा हादसा हो जाता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
*सवालों के घेरे में प्रशासन….*
क्या प्रधानमंत्री सड़क भारी औद्योगिक वाहनों के लिए बनाई गई थी..?
क्या पवन चक्की कंपनियों को विशेष अनुमति दी गई है..?सड़क क्षतिग्रस्त हो रही है तो मरम्मत का खर्च कौन वहन करेगा..?
दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदार कौन होगा — कंपनी या प्रशासन..?
क्या संबंधित विभाग ने कभी स्थल निरीक्षण किया है..?
*सबसे चौंकाने वाली बात..*
ना चेतावनी बोर्ड, ना डायवर्जन, ना स्पीड ब्रेकर,
ना सुरक्षा संकेत, क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है..?
*विकास या विनाश..?
*पवन चक्की परियोजना को विकास का प्रतीक बताया जा रहा है, लेकिन यदि इस विकास की कीमत ग्रामीण सड़कों की बर्बादी और राहगीरों की सुरक्षा है, तो यह मॉडल सवालों के घेरे में है।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब संज्ञान लेता है। फिलहाल धार जिले के ग्रामीण एक ही सवाल पूछ रहे हैं —
क्या प्रधानमंत्री सड़क की रक्षा होगी, या यह भी भारी वाहनों के पहियों तले कुचलती रहेगी..?
*ऐसे में सवाल उठता है —*
क्या इन सड़कों को भारी औद्योगिक ट्रेलरों के लिए अनुमति दी गई है?
यदि हां, तो किस विभाग ने अनुमति दी?
यदि नहीं, तो रोक क्यों नहीं लगाई जा रही?
न तो चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और न ही सुरक्षा के कोई विशेष इंतजाम किए गए हैं।

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