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Dharmendra Singh

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August 26, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

गिरिडीह/ऑनलाइन। हिंदी साहित्य भारती (अंतरराष्ट्रीय) द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय तरंग गोष्ठी “सबमें राम – शाश्वत श्री राम” के अंतर्गत 17 फरवरी 2026 को सायं 7 बजे आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. जवाहर द्विवेदी का ओजस्वी और विचारोत्तेजक उद्बोधन पूरे आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा।

“शबरी के राम: नवधा भक्ति की शाश्वत शिक्षा” विषय पर अपने विस्तृत व्याख्यान में पूर्व प्राचार्य डॉ. द्विवेदी ने शबरी प्रसंग की गहन आध्यात्मिक व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि शबरी की भक्ति केवल श्रद्धा का प्रतीक नहीं, बल्कि धैर्य, समर्पण और अटूट विश्वास की सर्वोच्च मिसाल है। उन्होंने नवधा भक्ति के नौ रूपों — श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन — को सरल एवं जीवनोपयोगी उदाहरणों के माध्यम से समझाया।

डॉ. द्विवेदी ने अपने वक्तव्य में स्पष्ट किया कि भगवान श्रीराम द्वारा शबरी के जूठे बेर स्वीकार करना इस बात का प्रमाण है कि ईश्वर के लिए बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि निष्कपट प्रेम और सच्ची भावना ही सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज को शबरी जैसी निष्कलुष भक्ति और राम जैसे समरस दृष्टिकोण की अत्यंत आवश्यकता है।

उनके उद्बोधन की शैली गंभीर, शोधपूर्ण और प्रेरणादायी रही, जिसने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उपस्थित साहित्यकारों एवं श्रोताओं ने उनके विचारों को अत्यंत सारगर्भित एवं युगानुकूल बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. अरुण सज्जन ने की, जबकि अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रविन्द्र शुक्ल की गरिमामयी उपस्थिति रही। संचालन श्रीमती नीलम झा ने किया।

गोष्ठी के अंत में आयोजकों ने डॉ. जवाहर द्विवेदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शी विचारों ने कार्यक्रम को नई ऊंचाई प्रदान की और शबरी की भक्ति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।