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Dharmendra Singh

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February 2026
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February 23, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

महाराष्ट्र राज्य जिला गडचिरोली राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा श्रीमती रूपाली चाकणकर के निर्देश मे ​महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए समीक्षा बैठक….

महाराष्ट्र राज्य जिला गडचिरोली राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा श्रीमती रूपाली चाकणकर के निर्देश मे ​महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए समीक्षा बैठक….

 

​गडचिरौली, राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा श्रीमती रूपाली चाकणकर ने निर्देश दिए हैं कि महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए सभी विभाग समन्वय (coordination) के साथ काम करें।

​रूपाली चाकणकर ने २० तारीख को जिलाधिकारी कार्यालय में विभिन्न विभागों की विस्तृत समीक्षा की। इस अवसर पर महिला आयोग की सदस्य सचिव नंदिनी आवडे, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुहास गाडे, कर्तव्यदक्ष जिला पुलिस श्री अधीक्षक नीलोत्पल, विधायक डॉ. मिलिंद नरोटे, अतिरिक्त जिलाधिकारी श्री संजय आसवले, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्रीमती ज्योति कडू, जिला शल्य चिकित्सक डॉ. वर्षा लहाडे, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रताप शिंदे, उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री दीपक बानाईत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

​श्रीमती चाकणकर ने निर्देश दिए कि सरकारी और निजी प्रतिष्ठानों में महिलाओं की सुरक्षा के लिए स्थापित ‘आंतरिक शिकायत निवारण समितियों’ को सक्षम और सक्रिय रखने के लिए उनका नियमित ऑडिट किया जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं के यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए बने कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु ये समितियाँ केवल कागजों पर न रहकर वास्तव में सक्रिय होनी चाहिए।

​*गडचिरौली : महिलाओं का सम्मान करने वाला जिला*

 

​समीक्षा बैठक में विभिन्न विभागों ने प्रस्तुतीकरण (presentation) के माध्यम से अपने कामकाज का विवरण दिया। इस अवसर पर बोलते हुए अध्यक्ष चाकणकर ने कहा कि लड़कियों की बढ़ती जन्म दर, पुनर्विवाह के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और महिलाओं के प्रति सामाजिक सम्मान जैसी बातें दर्शाती हैं कि गडचिरोली महिलाओं का सम्मान करने वाला जिला है।

​हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर जिले की अपनी चुनौतियां होती हैं। गडचिरोली में स्त्री भ्रूण हत्या या दहेज प्रताड़ना के मामले तुलनात्मक रूप से कम हैं, लेकिन:

​अंधविश्वास के कारण अस्पताल में प्रसव (delivery) के लिए न आना।

​अल्पायु लड़कियों का गर्भधारण।

​दुर्गम क्षेत्रों में अपर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं।

​अवैध शराब के कारण परिवारों पर होने वाले दुष्प्रभाव।

​ये आज भी गंभीर सामाजिक चुनौतियां बनी हुई हैं।

​नक्सलवाद उन्मूलन के साथ महिलाओं का विकास महत्वपूर्ण

​केंद्र और राज्य सरकार गडचिरोली से नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए व्यापक अभियान चला रही है। उन्होंने कहा कि जिले को विकास की मुख्यधारा में शामिल करते समय महिलाओं को रोजगार, कौशल प्रशिक्षण और आर्थिक अवसर देकर सशक्त बनाना अत्यंत आवश्यक है।

​बाल विवाह के लिए कानून में कोई छूट नहीं

​बाल विवाह के संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़कियों की शादी करना कानूनन अपराध है। इसके लिए किसी भी परंपरा या संस्कृति को कानूनी छूट नहीं दी गई है। ग्राम स्तर पर समन्वय स्थापित कर बाल विवाह रोकने के लिए तंत्र को सक्षम बनाया जाना चाहिए।

 

​गडचिरौली की एक बैठक की जानकारी देती है, जो मुख्य रूप से महिला सशक्तिकरण और उनकी सुविधाओं पर केंद्रित है।

​मुख्य विवरण: महिला सुविधाओं और योजनाओं की समीक्षा

​सभी सरकारी कार्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों और बस स्टैंडों पर महिलाओं के लिए स्वतंत्र शौचालय होने चाहिए। वहाँ स्वच्छता और पानी की नियमित व्यवस्था रखी जाए। साथ ही, आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण देने के बाद उन्हें रोजगार के साधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए।

​विभिन्न योजनाओं की समीक्षा

​बैठक में महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, पुलिस, शिक्षा, आदिवासी विकास, श्रम और राज्य परिवहन जैसे विभिन्न विभागों द्वारा महिलाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी गई।

​बैठक में मुख्य रूप से इन विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई:

​आंतरिक शिकायत निवारण समिति।

​बाल विवाह रोकथाम।

​अल्पायु लड़कियों के प्रसव को रोकने के उपाय।

​महिलाओं के लिए स्वतंत्र स्वास्थ्य केंद्र।

​विशाखा समिति।

​प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान।

​जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम।

​परिवार कल्याण सर्जरी (नसबंदी)।

​गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष उपाय।

महेश पांडुरंग शेंडे की रिपोर्ट….

महाराष्ट्र राज्य जिला गडचिरोली राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा श्रीमती रूपाली चाकणकर के निर्देश मे ​महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए समीक्षा बैठक….

​गडचिरौली, राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा श्रीमती रूपाली चाकणकर ने निर्देश दिए हैं कि महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए सभी विभाग समन्वय (coordination) के साथ काम करें।
​रूपाली चाकणकर ने २० तारीख को जिलाधिकारी कार्यालय में विभिन्न विभागों की विस्तृत समीक्षा की। इस अवसर पर महिला आयोग की सदस्य सचिव नंदिनी आवडे, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुहास गाडे, कर्तव्यदक्ष जिला पुलिस श्री अधीक्षक नीलोत्पल, विधायक डॉ. मिलिंद नरोटे, अतिरिक्त जिलाधिकारी श्री संजय आसवले, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्रीमती ज्योति कडू, जिला शल्य चिकित्सक डॉ. वर्षा लहाडे, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रताप शिंदे, उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री दीपक बानाईत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
​श्रीमती चाकणकर ने निर्देश दिए कि सरकारी और निजी प्रतिष्ठानों में महिलाओं की सुरक्षा के लिए स्थापित ‘आंतरिक शिकायत निवारण समितियों’ को सक्षम और सक्रिय रखने के लिए उनका नियमित ऑडिट किया जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं के यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए बने कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु ये समितियाँ केवल कागजों पर न रहकर वास्तव में सक्रिय होनी चाहिए।
​*गडचिरौली : महिलाओं का सम्मान करने वाला जिला*

​समीक्षा बैठक में विभिन्न विभागों ने प्रस्तुतीकरण (presentation) के माध्यम से अपने कामकाज का विवरण दिया। इस अवसर पर बोलते हुए अध्यक्ष चाकणकर ने कहा कि लड़कियों की बढ़ती जन्म दर, पुनर्विवाह के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और महिलाओं के प्रति सामाजिक सम्मान जैसी बातें दर्शाती हैं कि गडचिरोली महिलाओं का सम्मान करने वाला जिला है।
​हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर जिले की अपनी चुनौतियां होती हैं। गडचिरोली में स्त्री भ्रूण हत्या या दहेज प्रताड़ना के मामले तुलनात्मक रूप से कम हैं, लेकिन:
​अंधविश्वास के कारण अस्पताल में प्रसव (delivery) के लिए न आना।
​अल्पायु लड़कियों का गर्भधारण।
​दुर्गम क्षेत्रों में अपर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं।
​अवैध शराब के कारण परिवारों पर होने वाले दुष्प्रभाव।
​ये आज भी गंभीर सामाजिक चुनौतियां बनी हुई हैं।
​नक्सलवाद उन्मूलन के साथ महिलाओं का विकास महत्वपूर्ण
​केंद्र और राज्य सरकार गडचिरोली से नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए व्यापक अभियान चला रही है। उन्होंने कहा कि जिले को विकास की मुख्यधारा में शामिल करते समय महिलाओं को रोजगार, कौशल प्रशिक्षण और आर्थिक अवसर देकर सशक्त बनाना अत्यंत आवश्यक है।
​बाल विवाह के लिए कानून में कोई छूट नहीं
​बाल विवाह के संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़कियों की शादी करना कानूनन अपराध है। इसके लिए किसी भी परंपरा या संस्कृति को कानूनी छूट नहीं दी गई है। ग्राम स्तर पर समन्वय स्थापित कर बाल विवाह रोकने के लिए तंत्र को सक्षम बनाया जाना चाहिए।

​गडचिरौली की एक बैठक की जानकारी देती है, जो मुख्य रूप से महिला सशक्तिकरण और उनकी सुविधाओं पर केंद्रित है।

​मुख्य विवरण: महिला सुविधाओं और योजनाओं की समीक्षा
​सभी सरकारी कार्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों और बस स्टैंडों पर महिलाओं के लिए स्वतंत्र शौचालय होने चाहिए। वहाँ स्वच्छता और पानी की नियमित व्यवस्था रखी जाए। साथ ही, आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण देने के बाद उन्हें रोजगार के साधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
​विभिन्न योजनाओं की समीक्षा
​बैठक में महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, पुलिस, शिक्षा, आदिवासी विकास, श्रम और राज्य परिवहन जैसे विभिन्न विभागों द्वारा महिलाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी गई।
​बैठक में मुख्य रूप से इन विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई:
​आंतरिक शिकायत निवारण समिति।
​बाल विवाह रोकथाम।
​अल्पायु लड़कियों के प्रसव को रोकने के उपाय।
​महिलाओं के लिए स्वतंत्र स्वास्थ्य केंद्र।
​विशाखा समिति।
​प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान।
​जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम।
​परिवार कल्याण सर्जरी (नसबंदी)।
​गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष उपाय।

महेश पांडुरंग शेंडे की रिपोर्ट….