महाराष्ट्र राज्य जिला गडचिरोली कर्तव्यदक्ष पोलीस अधीक्षक श्री निलोउत्पल द्वारा प्रतियोगी विध्यार्थीयो को जीवनदायी महत्वपूर्ण संदेश…
लालच के कारण मनुष्य स्वास्थ्य से समझौता करने लगा है, जिसकी तुलना किसी और चीज़ से नहीं की जा सकती।
विद्यार्थियों को मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखनी चाहिए। उनमें पढ़ने की रुचि पैदा हो और उन्हें इस बात का ज्ञान मिले कि देश और दुनिया में क्या हलचल हो रही है, इसी उद्देश्य से सरकार ने हाल ही में राज्य के सभी स्कूलों को प्रतिदिन समाचार पत्र पढ़ना अनिवार्य करने का आदेश दिया है। क्योंकि समाचार पत्र पढ़ने से सामान्य ज्ञान बढ़ता है और समसामयिक घटनाओं (current affairs) की जानकारी मिलती है। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना आसान हो जाता है।
भाषा में सुधार होता है, शब्दावली बढ़ती है और विवेकपूर्ण विचार करने की क्षमता विकसित होती है।
एकाग्रता बढ़ाने में मदद मिलती है। साथ ही स्थानीय और वैश्विक समाचारों को समझकर समाज के साथ जुड़ाव मज़बूत होता है।
इसके अलावा, ज्ञान अर्जन के लिए विद्यार्थियों को तकनीक का उपयोग करना चाहिए, लेकिन इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि ‘सूचनाओं के ओवरलोड’ (Information Overload) से दिमाग थक जाता है और कुछ भी नया सीखने को नहीं मिलता। इसे ध्यान में रखते हुए उचित तरीके से ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। तकनीक की उड़ान और जंगलों को काटकर होने वाले विकास को रोका नहीं जा सकता, लेकिन उनसे संबंधित विवेकपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता आप में निश्चित रूप से विकसित होगी, जो एक दिन पूरी मानवता को सही दिशा दिखाएगी।
उन्होने कहा की
“तैयारी करने में विफल रहने का अर्थ है, विफल होने की तैयारी करना।”
इसका सीधा अर्थ है कि यदि आप किसी काम के लिए पहले से योजना, अनुशासन और सही वातावरण तैयार नहीं करते हैं, तो असफलता निश्चित है
साक्षात्कार: अंतिम और महत्वपूर्ण चरण
किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में लिखित परीक्षा के सभी चरणों को पार करने के बाद, अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साक्षात्कार (Interview) होता है। कई छात्रों को लगता है कि साक्षात्कार की तैयारी अंत समय में की जा सकती है, लेकिन वास्तव में साक्षात्कार आपके व्यक्तित्व और वर्षों से तैयार किए गए आपके स्वभाव का परिणाम होता है। यह केवल एक मानसिक परीक्षण ही नहीं, बल्कि आपके बौद्धिक स्तर की जांच भी है।
SP महोदय ने कहा
“हम वही हैं जो हम बार-बार करते हैं।” इसका मतलब है कि हमारी आदतें और विचार ही हमारी पहचान बनाते हैं। साक्षात्कार इसी व्यक्तित्व का प्रतिबिंब होता है। साक्षात्कार में आपसे जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं, जैसे:
स्वयं के बारे में जानकारी।
शैक्षिक योग्यता और पृष्ठभूमि।
आपकी रुचियां (Hobbies)।
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समसामयिक घटनाएं (Current Affairs)।
आपके आस-पास का वातावरण और भौगोलिक ज्ञान।
समय का सदुपयोग
आजकल कई छात्र सोशल मीडिया (जैसे इंस्टाग्राम रील्स) पर बहुत समय बर्बाद करते हैं। जबकि इसी समय में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते जैसी वैश्विक घटनाओं का भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसे समझना चाहिए। जागरूक रहना और अनजाने में ही सही, खुद को हर विषय के लिए तैयार रखना ही साक्षात्कार की असली तैयारी है।
यही तो महत्वपूर्ण है
कई लोगों को यह समझ में नहीं आता कि साक्षात्कार (इंटरव्यू) के प्रति जागरूक होना ही काफी नहीं है, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना भी साक्षात्कार की ही तैयारी है। सब कुछ समय पर ही करना चाहिए, ऐसा नहीं है। आपको खुद पर विश्वास होना चाहिए कि आज नहीं तो कल, आप एक अधिकारी जरूर बनेंगे!
अधिकारी पद के लिए साक्षात्कार में किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं, इसे जानने की जिज्ञासा कम से कम हर किसी में होनी चाहिए। और अपनी इस जिज्ञासा को शांत करने के लिए यदि आप उस दिशा में कदम बढ़ाते हैं, तो आप खुद देखेंगे कि पढ़ाई में आपकी एकाग्रता, पढ़ने की रुचि और लगन कैसे बढ़ती है।
साक्षात्कार की तकनीक और मंत्र बदलाव का मतलब क्या है? ऐसी कई छोटी-छोटी बातें बताई गई जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। इसलिए, पुस्तक पढ़ने वाले हर विद्यार्थी में पढ़ाई के प्रति रुचि और समय का महत्व समझना जरुरी है l
महेश पां
डुरंग शेंडे की रिपोर्ट….

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