महाराष्ट्र राज्य जिला गडचिरोली जिलाधिकारी द्वारा मानसून पूर्व समीक्षा बैठक में निर्देश; दुर्गम गांवों में अन्न, औषध और ईंधन का स्टॉक उपलब्ध कराने पर जोर……

मानसून अवधि के दौरान संभावित बाढ़ और आपदा की स्थितियों को ध्यान में रखते हुए सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करें और एक ठोस कार्य योजना (Action Plan) तैयार करें, ऐसे निर्देश प्रभारी जिलाधिकारी श्री नितिन गावंडे ने दिए हैं। उन्होंने आपदा प्रबंधन कक्ष को 24 घंटे चालू रखने, खतरनाक इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट तुरंत पूरा करने और दुर्गम क्षेत्रों में पूर्व-नियोजन के माध्यम से खाद्यान्न और दवाओं का स्टॉक उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया।
जिलाधिकारी कार्यालय के नियोजन भवन में आयोजित जिला आपदा प्रबंधन प्रणाली की ‘मानसून पूर्व समीक्षा बैठक’ में वे बोल रहे थे। इस अवसर पर जिला परिषद के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री राजेंद्र भुयार, निवासी उप जिलाधिकारी श्री आशीष वानखेड़े सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे। तहसील स्तर के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।
बैठक के मुख्य बिंदु:
सतर्कता और पहचान: जिलाधिकारी श्री गावंडे ने निर्देश दिया कि जिले के बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों की सूची तैयार की जाए और उन क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जाए।
क्षेत्रीय फोकस: भामरागड़, एटापल्ली, सिरोंचा जैसे बाढ़ संभावित क्षेत्रों में आवश्यक उपाय और जन-जागरूकता अभियान प्रभावी ढंग से चलाए जाएं।
विभागीय समन्वय: बाढ़ या किसी अन्य आपदा के समय विभागों के बीच समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए प्रत्येक विभाग अपनी जिम्मेदारियों को स्पष्ट कर तत्काल कार्रवाई करे।
स्वयंसेवकों की भूमिका: ग्राम स्तर पर स्थानीय युवाओं, तैराकी में प्रशिक्षित स्वयंसेवकों और बचाव कार्य में मदद करने वाले व्यक्तियों की सूची तैयार रखने के निर्देश दिए गए।
आपूर्ति सुनिश्चित करना: दुर्गम और संपर्क टूटने की संभावना वाले गांवों में अगले चार महीनों के लिए खाद्यान्न, दवाइयां और आवश्यक वस्तुओं का स्टॉक उपलब्ध कराया जाए और इसकी पुष्टि की जाए।
मॉनसून पूर्व तैयारी और आपदा प्रबंधन निर्देश :
नदी-नालों पर बने छोटे पुलों, सड़कों और नालों की मरम्मत तथा स्वच्छता मानसून से पहले पूरी करने के निर्देश देते हुए, यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि यातायात बाधित न हो। संबंधित निकायों को राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों के साथ-साथ ग्रामीण और शहरी सड़कों के चल रहे कार्यों को समय पर पूरा करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जहाँ काम अधूरा रहने की संभावना है, वहाँ वैकल्पिक यातायात व्यवस्था और सुरक्षा के उपाय किए जाने चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग के लिए निर्देश :
स्वास्थ्य विभाग को सांप के काटने (सर्पदंश), मलेरिया, दिमागी बुखार (मेनिनजाइटिस) और गैस्ट्रो जैसी बीमारियों के लिए आवश्यक दवाओं का स्टॉक सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध रखना चाहिए। प्रदूषित पानी से होने वाली बीमारियों से बचने के लिए, ग्राम पंचायतों को कुओं, हैंडपंपों और जल स्रोतों की सफाई करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पीने के पानी के स्रोतों के पास गंदा पानी जमा न हो।
आपदा प्रबंधन और रसद
जिलाधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि आपदा निवारण कार्यों में कोई बाधा न आए, इसके लिए एम्बुलेंस, बचाव नौकाओं (रेस्क्यू बोट) और अन्य सहायता प्रणालियों के लिए डीजल और पेट्रोल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध रखा जाए।
नदी तटीय क्षेत्रों के लिए सुरक्षा
नदी किनारे बसे गाँवों को संभावित खतरों की चेतावनी समय पर देने के लिए प्रशासन को तैयार रहना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
बाढ़ के दौरान पुल के ऊपर से पानी बहते समय वाहन न चलाएं।
बिना अनुमति के नदी में नाव या डोंगी ले जाने पर पाबंदी रहेगी।
गाँवों में स्वच्छता, स्वास्थ्य और आपदा निवारण के संबंध में बैठकें आयोजित कर व्यापक जन जागरूकता पैदा की जाए।
इस अवसर पर जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी श्री नीलेश तेलतुंबड़े ने बाढ़ की स्थिति में उत्पन्न होने वाले संभावित खतरों, संवेदनशील क्षेत्रों और विभागवार किए जाने वाले उपायों पर प्रस्तुतीकरण (प्रेजेंटेशन) दिया।
महेश पांडुरंग शेंडे की रिपोर्ट…..

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