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Dharmendra Singh

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सच दिखाने की हिम्मत

स्टेट ब्यूरो हेड प्रियंका माली की रिपोर्ट

जयपुर, 15 जून 2026।
गलवान संघर्ष की छठी वर्षगांठ के अवसर पर 15 जून 2026 को अमर जवान ज्योति पर वीर शहीदों को नमन करने हेतु एक विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत संध्या समय मोमबत्तियां जलाकर गलवान के वीर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस कार्यक्रम का आयोजन जय हिंद सल्यूट तिरंगा संस्था द्वारा किया गया, जबकि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कर्नल देव आनंद लोहमरोड़, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भूतपूर्व सैनिक विकास समिति रहे।
जय हिंद सल्यूट तिरंगा द्वारा प्रतिवर्ष इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाओं, बच्चों, पूर्व सैनिकों एवं नागरिकों ने भाग लेकर गलवान के वीर सपूतों को पुष्पांजलि अर्पित की। उपस्थित जनसमूह ने राष्ट्रभक्ति के नारों और भारत माता के जयघोष के साथ वीर जवानों के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को याद किया। कार्यक्रम में महिलाओं का प्रतिनिधित्व आईएएस अभ्यर्थी कनिका द्वारा किया गया।
अपने संबोधन में कर्नल देव आनंद लोहमरोड़ ने गलवान संघर्ष का विस्तार से उल्लेख करते हुए बताया कि जून 2020 में चीन द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर यथास्थिति बदलने के प्रयास का भारतीय सेना ने दृढ़ता और साहस के साथ मुकाबला किया। उन्होंने कहा कि 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल बी. संतोष बाबू के नेतृत्व में भारतीय सैनिकों ने अद्वितीय वीरता का प्रदर्शन करते हुए चीनी सैनिकों को पीछे हटने पर मजबूर किया। इस संघर्ष में भारतीय सेना के वीर जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया, जिसने भारतीय सैन्य इतिहास में साहस, नेतृत्व और राष्ट्रभक्ति का एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया।
कर्नल लोहमरोड़ ने उपस्थित नागरिकों को उन 20 अमर वीरों का स्मरण कराते हुए बताया कि गलवान घाटी में मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वालों में कर्नल बी. संतोष बाबू, नायब सूबेदार नुदूराम सोरेन, नायब सूबेदार मंदीप सिंह, नायब सूबेदार सतनाम सिंह, हवलदार के. पलानी, हवलदार सुनील कुमार, हवलदार बिपुल रॉय, नायक दीपक कुमार, सिपाही राजेश ओरांग, सिपाही कुंदन कुमार ओझा, सिपाही गणेश राम, सिपाही चंद्रकांत प्रधान, सिपाही अंकुश, सिपाही गुरबिंदर सिंह, सिपाही गुरतेज सिंह, सिपाही चंदन कुमार, सिपाही अमन कुमार, सिपाही जय किशोर सिंह, लांस नायक भगवान सिंह तथा सिपाही गुरविंदर सिंह शामिल थे। उपस्थित सभी नागरिकों ने इन अमर वीरों के सम्मान में मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके बलिदान को नमन किया।
अपने संबोधन के दौरान कर्नल लोहमरोड़ ने पिछले छह वर्षों में भारत सरकार एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य अवसंरचना, सड़क, सुरंग, पुल, संचार एवं सामरिक तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि गलवान संघर्ष के बाद भारत ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य और आधारभूत संरचना विकास को नई गति प्रदान की है। कैलाश रेंज पर भारतीय सेना की रणनीतिक सफलता, दौलत बेग ओल्डी क्षेत्र सहित पूर्वी लद्दाख में विकसित की गई आधुनिक सैन्य अवसंरचना तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में तीव्र गति से हुए विकास कार्यों ने भारत की सामरिक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ बनाया है।
कर्नल लोहमरोड़ ने इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण विषय उठाते हुए चिंता व्यक्त की कि भारतीय सेना में सेवाकाल के दौरान किसी भी कारणवश सैनिक की मृत्यु होने पर उसके आश्रित परिवार को अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान करने के संबंध में आज तक राष्ट्रीय स्तर पर समुचित कानूनी व्यवस्था नहीं बनाई गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि राजस्थान में लागू व्यवस्थाओं की तर्ज पर पूरे देश के सैनिक परिवारों के लिए भी एक प्रभावी एवं स्पष्ट कानून शीघ्र बनाया जाए, जिससे वीर सैनिकों के परिवारों को सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उनके इस सुझाव का उपस्थित नागरिकों ने भारत माता के जयघोष के साथ समर्थन किया।
कर्नल लोहमरोड़ ने कहा कि गलवान के वीरों का बलिदान देश को सदैव प्रेरित करता रहेगा और राष्ट्र उनकी वीरता को कभी नहीं भूलेगा। कार्यक्रम के दौरान “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” और “वीर शहीद अमर रहें” के उद्घोषों से वातावरण राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत रहा।
कार्यक्रम के अंत में जय हिंद सल्यूट तिरंगा के राज कुलदीप जी ने सभी उपस्थित नागरिकों का आभार व्यक्त किया तथा गलवान के वीर बलिदानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि भारतवासी गलवान के बलवानों के अद्वितीय साहस, पराक्रम और बलिदान को सदैव स्मरण रखेंगे तथा आने वाली पीढ़ियों तक उनकी वीरगाथा पहुंचाते रहेंगे।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान एवं वीर शहीदों को सामूहिक श्रद्धांजलि के साथ हुआ।
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