
भारतीय सनातन संस्कृति के अनुसार हमारी प्राचीनतम भाषा संस्कृत है। भारत की जनगणना 2023 मे होगी।
सनातनी हिन्दू होने के नाते अपनी मातृ भाषा जुड़वाना अनिवार्य है।
हम हर दिन अपनी प्रार्थना ,मन्त्रोच्चार ,श्लोक,सम्पूर्ण, धार्मिक गतिविधियाॅ निश्चित रूप से संस्कृत भाषा मे ही बोलते है।
संस्कृत तो भारत वर्ष की सबसे प्राचिन,सुन्दर,दिव्य,भाषा है। इस देवीय भाषा संस्कृति को जीवित रखने की संपूर्ण जिम्मेदारी हम सबकी है।धीरे-धीरे उसको प्रचलित भाषा में लेना प्रत्येक सनातनी हिंदुत्व का परम कर्तव्य है।
इसी के तहत श्री श्री 1008 श्री गजानन जी महाराज, श्री अम्बिका आश्रम, श्रीधाम बालीपुर मे परम पूज्यनीय बाबा जी के लक्ष्यो के अनुसार सभी कार्य हो रहे है। उनके परम शिष्य एवम् ईश्वरतुल्य रूप श्री श्री योगेश जी महाराज के सानिध्य मे पं . बंटी महाराज द्वारा लगभग 209 भक्तो को संस्कृत विद्यापीठ आश्रम मे श्रीदुर्गा सप्तशती संस्कृत भाषा मे सिखाई गई ।
जिसमेबालक -बालिकाए, महिलाऐ भी शामिल है। बहुत सारी महिलाओं ने गुरू कृपा से श्रीदुर्गा सप्तशती का पाठ करना भी संस्कृत मे अच्छी तरह से सीख लिया है।
सायम् काल के समय मे आचार्य द्वारा प्रतिदिन संस्कृत मे भाषा सिखाई जाती है।
उक्त जानकारी सद्गुरु सेवा समिति के जगदीश चंद्र पाटीदार ने दी है।

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