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Dharmendra Singh

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February 4, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

ब्यूरो चीप भुजबल जोगी

भारत को विश्वगुरु जनजाति समाजों की ज्ञान संपदा ने बनाया- केंद्रीय राज्य मंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते एवं केन्द्रीय इस्पात एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री भारत
सरकार मुख्य वक्ता
जनजाति इतिहास योगदान को विश्वविद्यालय संरक्षित करेगा- कुलपति
नीलिमा गुप्ता ने कहा कि
जनजाति समाजों ने परम्परा एवं मूल्यों के साथ अस्मिता की लड़ाई लड़ी- नरेन्द्र सिंह मरावी सामाजिक चिंतन एवं पूर्व अध्यक्ष मध्यप्रदेश अनुसुचित जनजाति आयोग मध्यप्रदेश

डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग नई दिल्ली द्वारा आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत ‘स्वतंत्रता संग्राम में जनजाति नायकों का योगदान’ पर स्वर्ण जयंती सभागार में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. संगोष्ठी में मुख्य अतिथि मंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते, केन्द्रीय इस्पात एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री, भारत सरकार, मुख्य वक्ता श्री नरेन्द्र सिंह मरावी, सामाजिक चिंतक एवं पूर्व अध्यक्ष मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति आयोग,म.प्र., विषय विशेषज्ञ के रूप में सुश्री दीपिका खन्ना, सहायक निदेशक, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, नई दिल्ली उपस्थित थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने की. कार्यक्रम की अकादमिक संयोजक प्रो चन्दा बेन ने स्वागत भाषण दिया. कार्यक्रम के संयोजंक अर्थशास्त्र विभाग के डॉ. केशव टेकाम ने संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत की.
मुख्य अतिथि केंद्रीय इस्पात एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री फागन सिंह कुलस्ते ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत पूरे देश के विशाविद्यालयों में स्वतंत्रता संग्राम में जनजाति नायकों के योगदान पर संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि आजादी के इतिहास में जनजाति समाज के नायकों के योदगान पर बहुत कम चर्चा होती है. हम सभी जानते हैं कि अंग्रेजों ने भारतीय समाज के साथ काफी दुर्व्यवहार किया. जनजाति समाज के ऐसे असंख्य नायक रहे हैं जिन्होंने बिना कोई समझौता किये हुए अंग्रेजों से लोहा लिया और देश की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया. आजादी के ऐसे अमर शहीदों को याद करना आवश्यक है जिनको इतिहास में भुला दिया गया. हमें अपनी इतिहास को फिर से देखने की जरूरत है ताकि आने वाली पीढ़ी सही इतिहास से परिचित हो सके. हमें ऐसे महानायकों पर गर्व है और हमें उनसे प्रेरणा लेते हुए देश की उन्नति और प्रगति के लिए कार्य करना चाहिए. उन्होंने राष्ट्रीय जनजाति आयोग के माध्यम से देश में जनजाति समाजों के लिए किये जाने वाले कार्यों को भी बताया.
अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने कहा कि स्वतन्त्रता संग्राम में जनजाति नायकों के योगदान पर केंद्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी एक अकादमिक प्रयास है जिसके माध्यम से हम आजादी के ऐसे कई नायकों को जान पायेंगे जिनकी कम चर्चा की जाती है. हम चित्र प्रदर्शनी के माध्यम से ऐसे नायकों का पुनः स्मरण कर रहे हैं. हमारा प्रयास होगा कि हम ऐसे वीर बलिदानियों की शौर्य गाथा पर शोध-अध्ययन करें. उन्होंने मध्य प्रदेश की भूमि पर जन्मे जनजाति समाज के नायकों के आजादी में योगदान पर चर्चा करते हुए कहा कि उनकी क्रान्ति की ज्वाला ने पूरे देश में आजादी के प्रति जूनून पैदा करने का काम किया. उन्होंने रघुनाथ सिंह, रंजन सिंह, बंजारी सिंह, बादल भाई, तिलका मांझी, बिरसा मुंडा जैसे वीर बलिदानियों की चर्चा करते हुए उनके योगदान को रेखांकित किया.
विशिष्ट वक्तव्य देते हुए नरेन्द्र सिंह मरावी ने कहा आजादी के जनजाति महानयों की विस्तारपूर्वक चर्चा की और देश के विभिन्न हिस्सों में आजादी के जनजाति समाज के क्रांतिवीरों की गाथा को बतलाया. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में भी जनजाति के नायकों ने देश की आजादी और भारत माँ की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी. उन्होंने कहा कि हर काल खंड में जनजाति समाज के लोगों ने अपने पारंपरिक मूल्यों की रक्षा करते हुए देश की रक्षा के लिए प्राण को न्यौछावर कर दिया. उन्होंने तांत्या भील, बिरसा मुंडा सहित देश के जनजाति समाज के क्रांतिकारियों के द्वारा चलाये गये विभिन्न आन्दोलनों की भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि देशज ज्ञान की जानकारी के सबसे प्राथमिक समाज जनजाति समाज ही है. इस ज्ञान की समृद्धि और संरक्षण के लिए अकादमिक शोध होना चाहिए ताकि हम अपने पारंपरिक ज्ञान की विरासत को आज के युवा पीढ़ी तक पहुंचा सकें.
विषय विशेषज्ञ डॉ. दीपिका खन्ना ने राष्ट्रीय जनजाति आयोग के गठन, उद्देश्य, इसकी संरचना, कार्य, शक्तियों एवं अन्य जानकारियों को साझा किया. उन्होंने कहा कि बहुत से लोगों को जनजाति समाज के अधिकारों के बारे में जानकारी नहीं है. उन्होंने जनजाति समाज के लिए भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं एवं उनके क्रियान्वयन पर भी प्रकाश डाला. सामाजी आर्थिक विकास में जनजाति समाज के योगदान की भी उन्होंने चर्चा की.

जनजाति नायकों पर केंद्रित चित्र प्रदर्शनी आयोजित
जनजाति नायकों पर केंद्रित निबंध प्रतियोगिता के विजित प्रतिभागी पुरस्कृत
संगोष्ठी में स्वतंत्रता संग्राम के जनजाति नायकों पर केंद्रित चित्र प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया. बड़ी संख्या में शिक्षकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शहर के गणमान्य नागरिकों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और इतिहास से परिचित हुए. राष्ट्रीय जनजाति आयोग के गठन, संरचना, कार्यों एवं शक्तियों एवं उनके कर्तव्यों पर आधारित वृत्त चित्र का प्रदर्शन किया गया.
इस अवसर पर जनजाति नायकों पर केंद्रित निबंध प्रतियोगिता के विजित प्रतिभागियों को मंचस्थ अतिथियों द्वारा पुरस्कृत किया गया.
कार्यक्रम का संचालन डॉ शालिनी चोइथरानी ने किया. आभार कुलसचिव संतोष सोहगौरा ने ज्ञापित किया. कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, शोधार्थी, विद्यार्थी, कर्मचारी गण, शहर के गणमान्य नागरिक, समाजसेवी संगठनों के पधाधिकारी गण, प्रबुद्ध पत्रकार गण, सागर जिला प्रशासन के अधिकारीगण एवं कर्मचारी सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे.