बी.एल.सूर्यवंशी रिपोर्टर

जिले की बदनावर तहसील के अंतर्गत ग्राम काछीबड़ौदा एवं क्षेत्र के बेबस गरीब लोग आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए दर-दर भटक रहे है। ग्राम पंचायत पर जाते हैं तो उनको वहां से भगा दिया जाता है।और जवाब में कहा जा रहा हैं कि आयुष्मान कार्ड तो कियोस्क सेंटर पर बनेगा। किंतु कियोस्क सेंटर से भी गुमराह करके लोगों को भगाया जा रहा है। ऐसे में गरीब बेबस जाए तो जाए कहां। ग्राम पंचायत के पंचायतकर्मी बताते है कि तुम लोगों के नाम ऊपर से ही लिस्ट में नहीं आने के कारण तुम्हारा आयुष्मान कार्ड नहीं बन पाएगा।
उक्त समस्या से पीड़ित सादीक पिता मुंशी खा मेवाती निवासी काछीबड़ौदा ने बताया कि विगत एक-दो माह से मेरे पापा बीमारी से ग्रसित है एवं अहमदाबाद के हॉस्पिटल में इलाज के लिए ले गए थे। मैं एक गरीब तबके का मजदूर व्यक्ति हूं मेरे पास इलाज के लिए पैसे नहीं थे। तो मैंने मेरी पत्नी के चांदी के कुछ छोटे-मोटे आभूषण थे,उन्हें बाजार में बेंचकर उससे मेरे पापा का इलाज करवाया गया हैं। अगर मेरे पास आयुष्मान कार्ड बना हुआ होता तो मुझे शासन-प्रशासन से मेरे पापा के इलाज में थोड़ा सहयोग मिल सकता था व मेरी आर्थिक स्थिति भी नही बिगड़ती और न ही मेरी पत्नी के आभूषण बाजार में बेचना पड़ते। उधर मेरी सोयाबीन की फसल भी पूरी तरह नष्ट हो गई है समय से पहले पिला मोजक नामक बीमारी से फल व फूल नही आये थे एवं समय से पहले सोयाबीन के पत्ते पीले पड़ चुके थे। जिससे मेरा आर्थिक व मानसिक संतुलन बिगड़ चुका है। जबकि इस ग्राम को शासन-प्रशासन ने राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत आयुष ग्राम का भी दर्जा दे रखा है। साथ ही निर्मल ग्राम पंचायत भी पूर्व में घोषित कर रखी है। फिर भी यहाँ के लोग शासन-प्रशासन की कई महत्वाकांक्षी योजनाओं से वंचित हो रहे है। ऐसी स्थिति में शासन-प्रशासन की महत्वकांक्षी योजनाएं यहां साबित होती नजर आ रही है। और साथ ही सारी शासन-प्रशासन की योजनाएं फिल्मों की तरह फ्लॉप होती नजर आ रही है।

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