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Dharmendra Singh

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February 2026
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February 17, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

मध्यप्रदेश के धार जिले में सैकड़ों किसान, मजदूरों की नफरत छोड़ो। संविधान बचाओ।। अभियान की 75 की.मी. की वाहन यात्रा।

कौन बनाता हिंदुस्तान भारत का मजदूर किसान।

शकील खान रिपोर्टर

मनावर आज नफरत छोड़ो संविधान बचाओ अभियान, वाहन यात्रा का चौथा दिन ग्राम सेमल्दा से शुरू होकर ग्राम बड़गांवखेड़ी से होकर, जोतपुर,वायल,मनावर,बाकानेर तक जाएगी।
मनावर में तहसील कार्यालय के सामने आमसभा हुई बड़े बांधों की नहर व्यवस्था और किसानों को घाटे में धकेलती अर्थव्यवस्था पर सवाल किये
उद्योगपतियों की करोड़ों की करमाफी और कर्जमाफी तो किसानों को MSP क्यों नहीं?
जाति- धर्म के नाम पर हिंसा और महिलाओं पर अत्याचार जनजन को नामंजूर!

मध्य प्रदेश के धार जिले के कुक्षी तहसील से शुरू होकर 8 गांव में सभाओं के द्वारा संदेश देते हुए ‘नफरत छोड़ो| संविधान बचाओ’|| यात्रा आज तीसरे दिन आगे बढ़ रही है| नर्मदा घाटी के गांव-गांव में सैकड़ों महिला -पुरुषों के साथ एक विशेष संवाद हुआ है, देश के मुट्ठीभर उद्योगपति और किसान -मजदूरों के बीच बढ़ती बीभत्स गैरबराबरी पर! पिछले 8 सालों में उद्योगपतियों को 44 लाख करोड़ की करमाफी और 30 लाख करोड़ की कर्जमाफी पर सवाल उठाते हुए किसानों के प्रतिनिधियों ने कहा कि किसानों की हर उपज को, अनाज, सब्जी, फल, दूध और वनोपज को भी हमें चाहिए सही दाम| संपूर्ण कर्जमाफ़ी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश अनुसार C2 + 50 के आधार पर समर्थन मूल्य के दो विधायक {bills}-कानूनों के मसौदे- अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की ओर से 2018 में संसद के समक्ष पेश किए गए हैं; जिन पर विशेष संसद सत्र की मांग पुरजोर रूप से उठाई गयी| फांसी के फंदे पर झूलने के लिए किसान -मजदूर और बेरोजगार युवाओं को मजबूर करने वाली अर्थव्यवस्था संविधान को कुचल रही है, यह कहते हुए संविधान बचाओ| देश बचाओ|| का नारा गूंज उठा| भगवान भाई सेप्टा ने किसानों के अधिकार पर जोर देकर आंदोलन व्यापक करने की जरूरत दर्शायी|
चुनाव में अपनी वोटबैंक बनाने के लिए सच्चाई छुपाते हैं| ओमकारेश्वर और जोबट बांधों की नहरों से सिंचाई कितनी असफल हो रही है, इसकी पोलखोल की गई| सरदार सरोवर से मध्यप्रदेश को कोई लाभ {जो मात्र बिजली का मिलना था} न मिलते, पीढियों पुराने गांव ,अतिउपजाऊ जमीन, मंदिर, मस्जिद, और सतपुड़ा- विंध्य के घने जंगलों को डूबाया गया तो अपना हक लेने के लिए 37 साल चला संघर्ष और हजारों ने पाया पुनर्वास, जिसकी हकीकत कई वक्ताओं ने दोहरायी| आज भी जिनका पुनर्वास बाकी है, उनके लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प व्यक्त हुआ| वाहिद भाई मंसूरी, कैलाश यादव, रामदास पाटीदार, रामसिंग भिलाला, देवेंद्र पाटीदार, विजय मरोला, जगदीश पटेल, लोभीराम धनगर, कमला यादव प्रमुख वक्ता रहे|
यात्रा का 19 तारीख सुबह धरमपुरी में समारोप करते हुए, नर्मदा घाटी के किसान, मजदूर, मछुआरे, पशुपालक 26 जनवरी से शुरू हो रही पदयात्रा में प्रतिनिधिक रूप से और सैकड़ों की संख्या में 30 जनवरी के शहादत दिवस पर जंतर मंतर, नई दिल्ली में शामिल होने का आवाहन किया गया| सभाओं का संचालन वाहिद भाई मंसूरी ने किया|