बी.एल.सूर्यवंशी रिपोर्टर


जिले की बदनावर तहसील के अंर्तगत ग्राम भेसोला में तीन साल में लाखों रुपए से बनी नहरों की नालिया कुछ सालों में खत्म हो गई हैं। किसानों का कहना है कि घटिया निर्माण कार्य के कारण नहर की नालियाँ ख़त्म हो रही हैं। नहरों की नालियां कभी किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने का आधार होती थीं। अब ऐसा नहीं है। अधिकांश नालियों को शोपिस बनी पड़ी है। नहर में पानी आने के बावजूद नालियों के अभाव में खेतों में पानी नहीं पहुंच पाता है। पहले नहरों की तरह ही नालियों की भी सफाई हुआ करती थी। अब ऐसा नहीं है। भैसोला व धारसीखेड़ा,मुंगेला मे नालियों की यह हालत है कि नालियों की सफाई नहीं हुई या टुटी पड़ी है। उपयोग नहीं हुआ। मगर विभागीय उदासीनता से नहर से जुड़ी नालियों का अस्तित्व खतरे में है। किसानों के खेतों के सिंचाई का जरिया नहरों की नालियां ही हैं। नहर से पानी निकलकर इसके जरिए दो से तीन किलोमीटर दूर तक खेतों मेें पहुंचता था। नहर से सटे किसान जैसे-तैसे खेतों की सिंचाई कर लेते हैं। लेकिन दूर वाले किसानों के समक्ष मुसीबत है। वे नहर के पानी का लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में महंगा डीजल खरीदकर किसानों को खेतों की सिंचाई करनी पड़ती है। पैसे के इंतजाम में कमजोर किसान खेतों की सिंचाई समय से नहीं कर पाते हैं। ग्रामीण खेमा ठन्ना का कहना है कि मैं नहर के वार्ड क्रमांक दस का सदस्य था मैंने कई बार अधिकारीयों से शिकायत की हैं। पर कोई भी सुनने के लिए तैयार नहीं है। उक्त जानकारी भेसोला से राजेश उपाध्याय ने दी।

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