राहुल राठोड़ रिपोर्टर






सरदारपुर -जहां एक और सरकार है स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़े-बड़े वादे एवं ग्रामीण स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं पहुंचाने का वायदा करती है अगर देखा जाए तो जमीनी हकीकत इससे कई उलट है अगर बात की जाए आदिवासी बहुल धार जिले के सरदारपुर विधानसभा के ग्राम राजोद की तो यह सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं की तो उन बड़े-बड़े दावों की जमीनी हकीकत बयां करता दिख रहा है क्योंकि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र राजोद धार जिले का सबसे बड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के बावजूद यहां विगत डेढ़ माह पूर्व एक डॉक्टर रिटायर्ड हो चुके हैं लेकिन उनकी जगह अभी तक किसी डॉक्टर को नियुक्त ना करना सरकार और स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही है किसी भी आपातकालीन स्थिति में यह अस्पताल वर्तमान में नर्स एवं आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर के भरोसे चल रहा है इतना ही नहीं किसी मरीज के ज्यादा तबीयत खराब हो जाने पर उसे यहां से 35 किलोमीटर दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है बजाएं उसे राजोद इतना ही नहीं पुलिस थाना राजोद में कई बार अपराधिक प्रकरण के मेडिकल के लिए पुलिस को भी इन परिस्थितियों से गुजर कर एक एमएलसी के लिए हर बार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरदारपुर की ओर जाना पड़ता है जिससे पुलिसकर्मियों को भी कई बार मुसीबत का सामना करना पड़ता है पर सवाल वही है कि क्या सरकार की स्वास्थ्य सेवाएं केवल पोस्टरों तक ही सीमित है क्योंकि जमीनी हकीकत तो यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बयां कर रहा है और सरकार और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का नतीजा ग्रामीण जनता एवं आसपास से आने वाले लोग काफी परेशानियों का सामना करते हैं

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