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Dharmendra Singh

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April 2, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

सलैया जलाशय मरम्मत कार्य चढ़ा भ्रष्टाचार की भेंट, 1 करोड़ 72 लाख की लागत, पटल फीलिंग बिना ही दिखाया पूर्ण, 35 लाख के फर्जी बिलों का आरोप

सलैया जलाशय मरम्मत कार्य चढ़ा भ्रष्टाचार की भेंट, 1 करोड़ 72 लाख की लागत, पटल फीलिंग बिना ही दिखाया पूर्ण, 35 लाख के फर्जी बिलों का आरोप

कटनी
बहोरीबंद क्षेत्र के बहुप्रतीक्षित सलैया जलाशय मरम्मत कार्य पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लगभग 1 करोड़ 72 लाख रुपये की स्वीकृत लागत से किए गए इस कार्य में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं । पटल फीलिंग कार्य के नाम पर लाखों रुपये की राशि आहरित की गई, वह जमीनी स्तर पर किया ही नहीं गया । इसके बावजूद विभागीय अभिलेखों में कार्य को पूर्ण दर्शाकर भुगतान कर दिया गया है। जलाशय की मरम्मत का मुख्य उद्देश्य जल संग्रहण क्षमता बढ़ाना, रिसाव रोकना और सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करना था । लेकिन मौके पर निरीक्षण करने पर स्पष्ट दिखाई देता है कि जलाशय के तल में अपेक्षित स्तर तक मिट्टी भराई नहीं की गई है।कई स्थानों पर पुरानी दरारें और गड्ढे जेसे के तेसे मौजूद हैं। इससे यह आशंका गहराती है कि कागजों में दिखाए गए कार्य और वास्तविक स्थिति में भारी अंतर है।
पटल फीलिंग के नाम पर 35 लाख के बिल
सूत्रों के अनुसार, मरम्मत कार्य में पटल फीलिंग के नाम पर लगभग 35 लाख रुपये के बिल प्रस्तुत किए गए हैं । आरोप है कि यह राशि फर्जी बिलों के माध्यम से आहरित की गई । यदि यह सत्य है तो यह सीधे-सीधे सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला बनता है । ग्रामीणों का कहना है कि यदि वास्तव में इतनी बड़ी मात्रा में मिट्टी भराई का कार्य हुआ होता, तो उसका प्रभाव जलाशय की गहराई और संरचना में स्पष्ट रूप से दिखाई देता । स्थानीय किसानों ने बताया कि जलाशय में पानी भरने के बाद भी उसकी भंडारण क्षमता में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई । कुछ किसानों ने तो यहां तक कहा कि पहले की तुलना में जलाशय की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा।ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर 1 करोड़ 72 लाख रुपये की राशि खर्च कहां हुई?
गुणवत्ता पर भी उठे सवाल
केवल पटल फीलिंग ही नहीं, बल्कि पूरे मरम्मत कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। जल निकासी नालों की सफाई और मजबूती का कार्य भी अधूरा बताया जा रहा है। यदि समय रहते इन खामियों को दूर नहीं किया गया, तो बरसात के मौसम में जलाशय की सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशय जैसे महत्वपूर्ण संरचनात्मक कार्यों में तकनीकी मानकों का पालन अनिवार्य है।यदि ठेकेदार और संबंधित अधिकारी मिलीभगत कर गुणवत्ता से समझौता करते हैं, तो इसका खामियाजा सीधे किसानों और आम जनता को भुगतना पड़ता है।
प्रशासनिक मौन से बढ़े संदेह
मामला सामने आने के बाद भी संबंधित विभाग की ओर से अब तक कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। सलैया एवं मोहतरा के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि शिकायत करने के बावजूद जांच की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। इससे प्रशासनिक भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।यदि आरोप निराधार हैं तो विभाग को सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि आरोप सही हैं तो तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
किसानों की उम्मीदों पर पानी
सलैया जलाशय क्षेत्र के सैकड़ों किसानों की जीवनरेखा माना जाता है। इसकी मरम्मत से किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद थी। लेकिन यदि मरम्मत कार्य में ही अनियमितता हुई है, तो यह सीधे किसानों के भविष्य से खिलवाड़ है। ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग,सलैया एवं मोहतरा के किसानों का कहना है कि यदि 35 लाख रुपये के फर्जी बिल लगाए गए हैं, तो इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। दोषी पाए जाने पर न केवल राशि की वसूली हो, बल्कि संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट भी किया जाए। साथ ही जिन अधिकारियों ने कार्य पूर्ण होने का प्रमाणपत्र जारी किया, उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। सलैया जलाशय मरम्मत कार्य में कथित अनियमितताओं ने एक बार फिर जल संसाधन विभाग पर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विकास कार्यों में जनता के पैसे की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए । 1 करोड़ 72 लाख रुपये की बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद यदि जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।आखिर सवाल केवल एक जलाशय का नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और मेहनत की कमाई का हैं।