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Dharmendra Singh

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सच दिखाने की हिम्मत

इमलिया धान खरीदी केंद्र में फर्जी तौल का आरोप, एक ही नाम से तीन गांवों के खसरा नंबर पर तुली धान, नियमों पर उठे सवाल

इमलिया धान खरीदी केंद्र में फर्जी तौल का आरोप, एक ही नाम से तीन गांवों के खसरा नंबर पर तुली धान, नियमों पर उठे सवाल

कटनी /बहोरीबंद
कटनी जिले की बहोरीबंद तहसील अंतर्गत इमलिया धान खरीदी केंद्र एक बार फिर विवादों में घिर गया है।आरोप है कि केंद्र में नियमों को ताक पर रखकर एक ही नाम अशोक कुमार के नाम से तीन अलग – अलग गांवों के खसरा नंबरों पर धान की तौल कर ली गई । जिन खसरा नंबरों का उल्लेख सामने आया है, उनमें खसरा नंबर 81 और 53 प्रमुख हैं । संबंधित गांवों में अशोक कुमार खड़रा, अशोक कुमार कछारगांव तहसील बहोरीबंद और अशोक कुमार कठौतिया तहसील रीठी के नाम से धान तौली जाने की जानकारी सामने आई है। यह पूरा कार्य फर्जी तरीके से किया गया और खरीदी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हो गए हैं।
एक नाम, तीन गांव कैसे संभव
स्थानीय किसानों के अनुसार, धान खरीदी की प्रक्रिया में प्रत्येक किसान को अपने संबंधित गांव, खसरा नंबर और पंजीयन के आधार पर ही उपज बेचने की अनुमति होती है। ऐसे में एक ही नाम से तीन अलग-अलग गांवों के खसरा नंबरों पर धान की तौल होना कई सवाल खड़े करता है।क्या यह केवल नाम की समानता है या फिर सुनियोजित तरीके से किसी प्रकार की हेराफेरी की गई? ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह मात्र संयोग होता तो दस्तावेजों की जांच में स्पष्टता आ जाती, लेकिन यहां आरोप है कि रिकॉर्ड में हेरफेर कर नियमों को दरकिनार किया गया।किसानों ने मांग की है कि संबंधित रजिस्टर, पंजीयन रिकॉर्ड, तौल पर्ची और भुगतान विवरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
खरीदी प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप
धान खरीदी केंद्रों में शासन द्वारा तय किए गए दिशा – निर्देशों के अनुसार प्रत्येक किसान का सत्यापन, भू-अभिलेख मिलान और ऑनलाइन पंजीयन की जांच अनिवार्य होती है। लेकिन इमलिया केंद्र में सामने आए प्रकरण ने इन व्यवस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि तीन अलग-अलग गांवों के खसरा नंबरों पर एक ही नाम से धान की तौल हुई है, तो या तो पहचान सत्यापन में भारी लापरवाही हुई है या फिर जानबूझकर मिलीभगत से यह कार्य किया गया है। खरीदी केंद्रों में कई बार प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए इस तरह के फर्जीवाड़े किए जाते हैं। इससे वास्तविक किसानों का नंबर पीछे चला जाता है और उन्हें कई दिनों तक अपनी उपज बेचने के लिए इंतजार करना पड़ता है।
किसानों में आक्रोश
इस मामले के उजागर होने के बाद क्षेत्र के किसानों में आक्रोश देखा जा रहा है। उनका कहना है कि पहले ही परिवहन में देरी और भुगतान की सुस्ती से वे परेशान हैं, ऊपर से यदि इस प्रकार की फर्जी तौल होगी तो ईमानदार किसानों का भरोसा तंत्र से उठ जाएगा । किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। किसानों का यह भी कहना है कि यदि जांच में यह सिद्ध हो जाता है कि फर्जी तरीके से तौल की गई है, तो संबंधित खरीदी प्रभारी, ऑपरेटर और निगरानी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देना समस्या का समाधान नहीं होगा।
प्रशासन की चुप्पी, उच्च अधिकारी संदेह के घेरे में
धान खरीदी की पूरी व्यवस्था डिजिटल और पारदर्शी बताई जाती है। पंजीयन से लेकर भुगतान तक सब कुछ ऑनलाइन दर्ज होता है। ऐसे में यदि तीन गांवों के अलग-अलग खसरा नंबरों पर एक ही नाम से तौल संभव हो जाती है, तो यह तकनीकी प्रणाली की कमजोरी को भी उजागर करता है। क्या सिस्टम में ऐसी खामियां हैं जिनका फायदा उठाया जा सकता है या फिर सिस्टम को दरकिनार कर मैनुअल स्तर पर गड़बड़ी की गई, यह भी जांच का विषय है कि संबंधित किसानों के बैंक खातों में भुगतान किस प्रकार और किस नाम से किया गया। यदि भुगतान एक ही खाते में गया है, तो यह स्पष्ट रूप से फर्जीवाड़े की ओर इशारा करेगा।यदि अलग-अलग खातों में गया है, तो फिर नाम और पहचान के सत्यापन की प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े होंगे । इमलिया धान खरीदी केंद्र में एक ही नाम से तीन गांवों के खसरा नंबरों पर धान तौल का मामला साधारण त्रुटि नहीं, बल्कि गंभीर अनियमितता का संकेत देता है।यह घटना न केवल खरीदी केंद्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि पूरे सिस्टम की निगरानी व्यवस्था की पोल भी खोलती है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है और क्या दोषियों तक जांच की आंच पहुंचती है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह समय के साथ दबा दिया जाएगा। किसानों की निगाहें अब प्रशासनिक कदमों पर टिकी हुई हैं।