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Dharmendra Singh

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April 7, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

राहुल राठोड़ रिपोर्टर

शिवमहापुराण कथा में दुसरे दिन शिवभक्तों का उमड़ा सैलाब

उघोग मंत्री दत्तीगांव भी हुए शामिल

प्रसिद्ध कोटेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आयोजित प्रख्यात कथावाचक पं प्रदीप मिश्रा की पंचपुष्प शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन आज श्रोताओं की संख्या लगभग दोगुनी हो गई। इनमें 80 प्रतिशत से अधिक तादाद महिलाओं की थी। जिन्होंने भाव विभोर होकर रसमयी कथा का आनंद लिया।
कथा की शुरुआत में जब पंडित मिश्रा ने वर्तमान हालातों में घर घर की कहानी की चर्चा की तो असंख्य महिलाएं सुबकने लगी और उनकी आंखों से अश्रु धारा बह निकली। आपने पंचपुष्प के अंतर्गत आज केतकी फूल की चर्चा की और बताया कि यह फूल महादेव को क्यों नहीं चढ़ाया जाता है और चढ़ाने पर कितना बड़ा दोष लगता है। आपने कथा के दौरान कहा कि हम पर भक्ति का रंग तभी चढ़ता है अब मुक्ति की चाहत रहती है। यदि भक्ति पर विश्वास बढ़ता है तो यह माना जाना चाहिए कि हम पर परमात्मा की कृपा अवश्य है। आपने कहा कि श्रोता तपती धूप में यहां सुबह से आकर बैठते हैं तो कथा को अपने दिल में बिठाना चाहिए तभी इसका पुण्य मिलेगा। कई बार अच्छा कार्य करते हुए भी हमारे मन में अहम का भाव पैदा हो जाता है। इसे दूर रखने के लिए सत्कर्म करना जरूरी है और जो करते हैं उसका अभिमान नहीं करना चाहिए। आपने फूलों के बारे में कहा कि हमें जो अच्छा लगता है उसे तोड़ कर अपने पास रखते हैं और मृत्यु लोक में भगवान शिव को जो पुष्प अच्छा लगता है अपने पास रख लेते हैं। हम महादेव को एक लोटा जल चढ़ाने मंदिर जाते हैं पर यह समझना चाहिए कि महादेव बुलाते हैं तभी हम वहां जा पाते हैं। उनकी कृपा होना जरूरी है।

कभी माता-पिता, गुरु, संत सन्यासी का शीश नहीं उनके चरणों को देखा जाता है। जिसने इनके चरणों को पकड़ लिया समझो वह भवसागर पार हो गया। जो बड़ों की बात मान लेता है वह एक दिन बड़ा बन जाता है। इसी तारतम्य में आपने कहा कि आज घर में बहू को सास ससुर की बात बुरी लगती है और पड़ोसन की कही बात अच्छी लगती है। घर के बड़ों की बात मानने लग जाओगे तो छोटे नहीं रहोगे। दूसरों की बात मान लेते हैं पर अपनों की बात नहीं मानते। यह बड़ी विडंबना है। हम घर के बुजुर्गों से बात नहीं करते। पास बैठकर खाना नहीं खिलाते हैं। जबकि वृद्धाश्रम में जाकर बुजुर्गों से बात करते हैं। उन्हें खाना खिलाकर फोटो खिंचवाते हैं। जरूरी है कि वहां जाने से पहले घर के बुजुर्गों के पास बैठ जाना सीख जाओ। वे तुम्हारा इंतजार करते हैं कि मेरा बेटा 5 मिनट मेरे पास बैठकर दिल की बात करेगा। आज प्रत्येक घर के युवक, बहू बेटा घर के बुजुर्गों का आदर करना सीख जाए तो वृद्धाश्रम की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। साधु सन्यासी का चोला पहनकर ढोंग की जिंदगी जीने से अच्छा है कि ढंग की जिंदगी जीना सीख जाए तो किसी को भी शर्मिंदा नहीं होना पड़ेगा। करीब 2 घंटे की कथा में आपने अपार हर्ष ध्वनि के बीच कहा कि तुमने जो प्रॉपर्टी बनाई है वह यहीं छूट जाएगी। साथ में केवल यही जाएगा कि किसे एक गिलास पानी पिलाया। किस जरूरतमंद की मदद की। सत्संग में शामिल हुए। आपने समझाइश दी कि अपने परिवार के साथ रहो और घर का भोजन व घर का दरवाजा कभी मत छोड़ना। परिवार में किससे कितना भी झगड़ा हो जाए, आधे घंटे बाद फिर अम्मा के पास पहुंच जाओ और चाय बनाकर पियो। हम घर क्यों छोड़े यह निर्णय लेना है।

आपने वाणी बोलते समय संयम बरतने की भी सलाह दी। कहा कि वाणी का घाव इतना विचित्र होता है कि वह जिंदगी भर नहीं भरता। मन दुखे ऐसी वाणी कभी नहीं बोलना चाहिए। जमीन पर दरार पड़ती है तो बारिश का पानी भर देता है और फटा हुआ कपड़ा भी सुई धागे से जुड़ जाता है किंतु वाणी का घाव कभी नहीं भरता। आपने कहा कि संसार में झूठ बोलोगे तो चल जाएगा किंतु शिव मंदिर में जाकर कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए। जिससे कि बुढ़ापा बिगड़ जाए। बोले कि दुनिया में छल कपट, अंधविश्वास और चमत्कार के चक्कर में कभी मत पड़ना किंतु महादेव के चक्कर में पड़ गए तो जीवन की नैया पार हो जाएगी।

सिसोदिया परिवार हैआयोजक
कथा के बीच में कई मधुर लोकप्रिय भजन भी सुनाए गए। समापन पर आरती का लाभ आयोजक शरदसिंह सिसोदिया परिवार एवं प्रदेश सरकार के उद्योग मंत्री व क्षेत्रीय विधायक राजवर्धनसिंह दत्तीगांव ने लिया। उन्होंने पूरी कथा सुनी और गुरुदेव से आशीर्वाद लिया। कथा को लेकर समूचे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल बना हुआ है। कथा का आयोजन स्व शिवकुमार सिंह सिसोदिया व ओमप्रकाश पांडे की स्मृति में हो रहा है। आयोजक शरद सिंह सिसोदिया है।