महेंद्र चौहान रिपोर्टर






कहावत है “किसी इंसान को खिलाने कि बजाय जानवर को पाल लेना चाहिए। क्युकी जरूरत पढ़ने पर इंसान नहीं काम आता वह अपना खा कर भी साथ नहीं देता है” कुछ ऐसा ही वाकया उस वक्त घटा जब ग्राम रातिमाली में एक 22वर्षीय युवक शंकर पिता निहाल वास्केल जो अपने पीछे पत्नी, 2 नन्ही सी बेटियां और एक बालक को छोड़ कर इस दुनिया को अलविदा कह गया। मात्र 8 दिन तबियत खराब रही । जिसमें पीलिया और टाई फाइट का इलाज जारी रहा, जिसका गुजरात में ईलाज चल रहा था। और ईलाज के दौरान डॉक्टर उसे नहीं बचा पाए आखिर शंकर की मृत्यु हो गई। जिसके बाद अपने घर रातीमाली से शंकर के शव को अंतिम संस्कार हेतु शमशान ले जाया जा रहा था। तब शंकर की शव यात्रा के साथ साथ शंकर का पाला हुआ एक पालतू कुत्ता भी शमशान तक आया। और वह शंकर के दाह संस्कार तक वहीं रुका जब दाह संस्कार हो गया तब वह कुत्ता भी शमशान से वापस शंकर के घर आ गया।इस वाकिए को देखकर हर किसी की आखे नम हो गईं।

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