एस पाटीदार रिपोर्टर



लोकेशन :—मनावर।
विओ :– मनावर की चैतन्य धाम में “नानी बाई नो मायरो ” की कथा के प्रथम दिवस पर राजस्थान जोधपुर से पधारे कथाकार पंडित अमृत राम शास्त्री जी ने कहा कि अनादिकाल से हमारी मातृभूमि साधु संतों की भूमि रही है। संतों का ही जन्म इसीलिए हुआ कि जिससे आम सत्संगी को सही मार्ग बताकर उनका मार्ग प्रशस्त करे। नरसी मेहता एक ऐसे महान भक्त थे जिनका जन्म गिर पर्वत के पास जूनागढ़ के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वे गिर पर्वत के जंगल में जाकर शिवजी की आराधना करने पर दर्शन प्राप्त हो जाते हैं ।”नानी बाई नो मायरो ” भक्त नरसी मेहता के भगवान कृष्ण के भक्ति पर आधारित कथा है ।मायरो या भात भगवान कृष्ण ने नानी बाई को रोककर कहा कि कल वह स्वयम नरसी के साथ मायरा भरने के लिए आएंगे। यह सब सत्संग की ही देन है ।व्यक्ति का जितना भगवान से प्रेम रहेगा ,भगवान स्वयम चलकर आते हैं। नरसी मेहता का मायरा के रचनाकार स्वयम मीराबाई ही थी।कथा रात्रिकालीन हो रही है।कथा के मुख्य यजमान स्वर्गीय हुकुम चंद जी शर्मा की स्मृति मे उनके पुत्र अमित जी शर्मा “नानी बाई नो मायरो ” की कथा करवा रहे है। उनके मकान के उद्घाटन की बेला मे ” गंगा दशहरा ” का त्यौहार होने पर बावड़ी से गंगाजल लेकर गंगा माता मनाते हुए घर पर लाने मे श्रीफल का अम्बार लग गया।

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