पं संदीप शर्मा रिपोर्टर



*• केवलारी और निपनिया के आदिवासी किसानों ने रोपे चिरौंजी के 2000 पौधे*
*• प्रसंस्करण इकाई भी स्थापित, अब आर्थिक रूप से सक्षम होंगे किसान*
कटनी। आर्थिक रूप से पिछड़े किसानों और आदिवासी परिवारों को आत्म निर्भर बनाकर आर्थिक रूप से मजबूत बनाने को लेकर कलेक्टर कटनी अवि प्रसाद द्वारा जिले में निरंतर नव सृजन, नवाचार और नव प्रयास किए जा रहे हैं। जिनका सीधा लाभ जहां इन परिवारों को मिल रहा है तो वहीं जिले के विकास में भी ये प्रयास महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। ऐसे ही एक नव प्रयास के रूप में कलेक्टर श्री प्रसाद के मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और प्रेरणा से जिले के बहोरीबंद विकासखंड के दो गांवों के आदिवासी किसानों ने चिरौंजी के प्रसंस्करण और पौधरोपण की राह चुनी है और अब धीरे धीरे इस राह पर चलकर आर्थिक रूप से सक्षम होने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
*जिले में पहली बार हुआ चार का पौध रोपण*
कलेक्टर श्री प्रसाद जिले के सुदूर ग्रामों का निरंतर भ्रमण कर वहां की समस्याओं, आवश्यकताओं और संभावनाओं से स्वयं वाकिफ होते हैं और उनके इन्हीं भ्रमण कार्यक्रमों से निकल रही है नवप्रयास की भागीरथी गंगा। भ्रमण कार्यक्रम दौरान बहोरीबंद के ठेठ आदिवासी गांवों निपनिया और केवलारी में चार उत्पादन की प्रबल संभावना और वहां के आदिवासियों में इसको लेकर रुचि के मद्देनजर कलेक्टर श्री प्रसाद द्वारा यहां के आदिवासी किसानों को आत्मा प्रोजेक्ट के तहत चार के पौधारोपण के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया गया। कलेक्टर श्री प्रसाद के निर्देश पर आत्मा प्रोजेक्ट की परियोजना संचालक रजनी चौहान द्वारा इस दिशा में पहल की गई और मौसम की अनुकूलता को देखते हुए गत अगस्त माह में इन दोनों गांवों के आदिवासी किसानों के 6 समूहों द्वारा वन विभाग की नर्सरी से चार (चिरौंजी) के 2000 पौधों को लाकर रोपित किया गया । उल्लेखनीय है कि यह पहला अवसर है जब जिले में किसी शासकीय परियोजना के तहत चार ( चिरौंजी) के पौधों को व्यवसायिक दृष्टिकोण से बड़े पैमाने पर रोपित कराया गया।
*10 गुना अधिक मुनाफा कमा रहे किसान*
उल्लेखनीय है कि करीब साढ़े 6 सौ की आबादी वाले ग्राम निपनिया और केवलारी के आदिवासी परिवारों द्वारा यहां पूर्व से लगे हुए चार के करीब 600 वृक्षों से वनोपज का संग्रह कर चार की गुठलियों को बाजार में करीब 150 रुपए किलो के दाम से वर्षों से बेचा जा रहा था। लेकिन कलेक्टर श्री प्रसाद के प्रोत्साहन उपरांत आत्मा प्रोजेक्ट के तहत परियोजना संचालक आत्मा द्वारा यहां पर रानी दुर्गावती बहुउद्देशीय सहकारी समिति का गठन कर प्रसंस्करण इकाई स्थापित कराई गई। जिसमें उक्त समिति द्वारा बैंक से ऋण लेकर मशीन स्थापित कर चिरौंजी की गुठलियों से चिरौंजी निकालकर उसकी पैकिंग कर बाजार में विक्रय शुरू किया गया। जिससे किसानों को अब 1600 रुपए प्रति किलो का दाम मिल रहा है। जिससे अब किसान 10 गुना अधिक दाम अर्जित कर आर्थिक रूप से सक्षम हो रहे हैं।
*बदलेगी ग्रामीणों की तकदीर*
कलेक्टर श्री प्रसाद के विशेष प्रयास और प्रोत्साहन के बाद अब गांव निपनिया और केवलारी के किसानों की तकदीर और गांव की तस्वीर अगले 5 साल में तेजी से बदलते नजर आएगी। कलेक्टर श्री प्रसाद की पहल पर इन दोनों गांवों में अगस्त माह में चार के 2000 पौधे रोपे जा चुके हैं। काबिलेगौर यह है कि ये पौधे इन आदिवासी किसानों के 6 समूहों के सदस्यों ने अपनी स्वयं की भूमि पर लगाए हैं। जिसके लिए आत्मा परियोजना के तहत प्रत्येक समूह को 10 हजार रुपए की सीड मनी (रिवॉल्विंग फंड) प्रदान किया गया। स्वयं की जमीन पर लगाए गए इन पौधों की देखरेख भी ये समूह कर रहे हैं। इससे इन पौधों के जीवित रहने की संभावना भी अधिक होगी। साथ ही 4 से 5 साल में ये पौधे फल देने लायक हो जायेंगे। जिनसे भविष्य में ये इन किसानों की आगामी पीढ़ी भी इसका लाभ उठाकर आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो अपना बेहतर जीवन यापन कर सकेंगे।

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