




मैहर अब कस्बा नहीं रहा, जिला बन चुका है। बीते दिनों जिले की घोषणा कर दावा-आपत्तियों हेतु 1 माह का समय दिया गया था, जिसका निस्तारण कर कैबिनेट ने प्रस्ताव पारित कर मैहर को जिला घोषित कर दिया है तथा इस हेतु राजपत्र का प्रकाशन भी किया जा चुका है। यही नहीं, गुरुवार रात मैहर जिले को पहली कलेक्टर भी मिल गयी, रानी बाटड को मैहर की पहली कलेक्टर बनाया गया है। जल्द ही मैहर को पहले SP भी मिलेंगे। उम्मीद है जिला बनने के बाद मैहर में व्याप्त अव्यवस्थाओं से निजात मिल सकेगी। हाथ ठेला, गोमती वाले विस्थापित होंगे, योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा, ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार होगा, निर्माण कार्यो की गुणवत्ता बढ़ेगी। सड़कें अब ऐसी बनेंगी जो कुछ साल चलेंगी, कानून व्यवस्था बेहतर होगी। अवैध शराब की बिक्री नहीं होगी, जुआ-सट्टा, नशाखोरी बन्द होगी। अवैध उत्खनन बन्द होगा। नदियों तालाबो की सफाई होगी। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। बेहतर प्रशासन और शासन होगा।
क्योंकि अगर ये सब न हो सका तो जिला बनने से सिर्फ आम जनता की मैहर में रहने की लागत बढ़ेगी, टैक्स बढ़ेंगे, भूमि की दर और रजिस्ट्री शुल्क बढ़ेगा और दलों का राजनैतिक मकसद पूर्ण होगा और कुछ नहीं।

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