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April 12, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

बड़वारा लखाखेरा धाम में फ्रांस व बेल्जियम के दल ने किया ध्यान, हुआ जिज्ञासाओं का समाधान भारत की सनातन संस्कृति, सभ्यता, ज्ञान, ध्यान, अध्यात्म को जानने फ्रांस व बेल्जियम से लखाखेरा धाम पहुंचा एक दल

लोकेसन बड़वारा

लखाखेरा धाम में फ्रांस व बेल्जियम के दल ने किया ध्यान, हुआ जिज्ञासाओं का समाधान

भारत की सनातन संस्कृति, सभ्यता, ज्ञान, ध्यान, अध्यात्म को जानने फ्रांस व बेल्जियम से लखाखेरा धाम पहुंचा एक दल

नि.प्र.- भारत की संस्कृति, सभ्यता, लोक रीति, वैदिक ज्ञान, ध्यान, योग, अध्यात्म आदि आज भी देश-विदेश में लोगों के लिए आकर्षण, जिज्ञासा व खोज का विषय बना हुआ है। इसी अनुक्रम में आज फ्रांस और बेल्जियम का 8 सदस्य दल ब्रह्मर्षि अंबाला संस्थान लखाखेरा धाम (ब्रह्मर्षि आश्रम) में पंहुचा।समाजसेवी निर्भय सिंह जी के मार्गदर्शन में भारत भ्रमण कर रहे इस दल में फ्रांस व बेल्जियम के मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सक, रिसर्चर आदि उच्च पदों से सेवानिवृत अधिकारी व शिक्षाविद् उपस्थित रहे। उनके साथ उनके अंग्रेजी व फ्रेंच भाषा के अनुवादक (ट्रांसलेटर) व उनके अन्य पांच सहायकों की टीम थी। ब्रह्मर्षि आश्रम लखाखेरा धाम पहुंचने के बाद ये सभी यहाँ के परम पूज्य संत महायोगी हरि ओम दास जी महाराज से मिले। परंपरागत सनातन संस्कृति अनुसार तिलक लगाकर व मंगल कलश के साथ वैदिक रीति से उनका स्वागत किया गया। आश्रम भ्रमण उपरांत इनकी मुख्य जिज्ञासा का केंद्र ध्यान योग साधना और आस क्रिया योग रहा है। तत्संबंध में उन्होंने महायोगी हरिओम दास जी से विस्तृत चर्चा की। भाषाई संवादहीनता के अभाव में स्पष्ट वार्तालाप नहीं होने की वजह से गहन ध्यान की अनुभूति के माध्यम से महायोगी हरिओम दास जी महाराज ने ओम मंत्र की शक्ति को बताया। साथ ही आस क्रिया योग (आत्म साक्षात्कार) की अद्भुत, अलौकिक व विश्वव्यापी क्रिया के बारे में बताया। उनके प्रश्नों के उत्तर देकर उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया व उन्हें संतुष्ट भी किया। ज्ञात होवे, आस क्रिया या (आत्म साक्षात्कार) के प्रणेता व मार्गदर्शक महायोगी हरिओम दास जी महाराज जन-जन को उनकी अंतर्निहित शक्तियों के बारे में बताना चाहते हैं, जागृत कराना चाहते हैं और आत्म साक्षात्कार की अनुभूति को आज क्रिया योग के माध्यम से विश्व व्यापी भी बनाना चाहते हैं। आज इस प्राचीन तपोभूमि में विदेशी पर्यटकों का भ्रमण उनकी भारतीय तपस्वियों, संतों की तपस्या, जीवन शैली व ध्यान के तरीके सीखने पर केंद्रित था। पर ब्रह्मर्षि आश्रम लखखेरा धाम पहुंचने के बाद वो आत्म विभोर हो गए। उनकी अनुभूति के शब्द शायद हमारे शब्दकोश में नहीं थे, पर उनके फेस रीडिंग और उनके संवदिया (ट्रांसलेटर) द्वारा बताए गए टूटे-फूटे शब्दों से जो भाव निकल कर आया, वह वाकई इस आश्रम और देश की सनातन धरोहर को गौरवान्वित करने वाला है।आज के सम्मिलन में अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचिका व विश्लेषक परम पूज्या दीदी उषा रामायणी जी, भागवताचार्य दीदी रमा किशोरी जी, दीदी सिया शर्मा जी ने भी ध्यान व सत्संग में सहभागिता की एवं उनके प्रश्नों के उत्तर दिए। विदाई स्वरूप उन्हें आस क्रिया योग की मार्गदर्शिका व स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।