Chief Editor

Dharmendra Singh

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April 1, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

ढीमरखेड़ा | उमरियापान के समीप नर्मदा नहर में तीन बच्चियों के डूबने की दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना में दो बच्चियों की मौत हो चुकी है, जबकि तीसरी बच्ची की तलाश जारी है। यह हादसा रविवार की सुबह हुआ जब तीनों बच्चियां नहर में नहाने गई थीं। मृतक बच्चियों की पहचान सिद्धि पटेल (12 वर्ष, कक्षा आठवीं) एवं अंशिका पटेल (14 वर्ष, कक्षा नवमी) के रूप में हुई है, जबकि सिद्धि की छोटी बहन मानवी पटेल (8 वर्ष) अब भी लापता है। इस हृदयविदारक घटना के बाद गांव में मातम पसर गया है। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है, और प्रशासनिक अमला लगातार तीसरी बच्ची की तलाश में जुटा हुआ है।रविवार की सुबह परसवारा गांव की तीन बच्चियां उमरियापान के समीप नर्मदा नहर में नहाने के लिए गई थीं। नहर का पानी गहरा होने के कारण तीनों बच्चियां उसमें डूबने लगीं। आस-पास कोई मौजूद नहीं था, जिससे उन्हें तुरंत बचाया नहीं जा सका। कुछ देर बाद जब स्थानीय लोगों को इस घटना की जानकारी मिली, तो उन्होंने प्रशासन को सूचित किया और बच्चियों की तलाश शुरू की गई। बचाव कार्य में लगे स्थानीय गोताखोरों और पुलिस दल ने सिद्धि पटेल और अंशिका पटेल के शव बरामद कर लिए, लेकिन आठ वर्षीय मानवी पटेल अब भी लापता है। गोताखोर और प्रशासनिक अधिकारी उसकी तलाश में जुटे हुए हैं, लेकिन पानी के तेज बहाव के कारण खोज अभियान में कठिनाइयां आ रही हैं।

घटना के बाद गांव में माहौल

जैसे ही यह खबर गांव में फैली, चारों ओर शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। सिद्धि और अंशिका की मौत ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है। मृतक बच्चियों के माता-पिता को सांत्वना देने के लिए आस-पास के गांवों के लोग भी बड़ी संख्या में जुट गए हैं। परिजनों के अनुसार, यह पहली बार नहीं था जब ये बच्चियां नहर में नहाने गई थीं, लेकिन इस बार यह हादसा हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस नहर के किनारे चेतावनी बोर्ड लगाने चाहिए थे और बच्चों को नहर में जाने से रोकने के लिए उचित प्रबंध करने चाहिए थे।

प्रशासन की भूमिका और बचाव कार्य

घटना की सूचना मिलते ही उमरियापान थाना प्रभारी और तहसीलदार मौके पर पहुंचे। पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने गोताखोरों की मदद से तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। कुछ ही घंटों में दो बच्चियों के शव बरामद कर लिए गए, लेकिन तीसरी बच्ची अब भी लापता है। प्रशासन ने स्थानीय गोताखोरों और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीम को भी खोज अभियान में शामिल किया है। नहर में पानी का प्रवाह तेज होने के कारण खोज अभियान में मुश्किलें आ रही हैं, लेकिन प्रयास जारी हैं।

गांव वालों की मांग

नहर के किनारे कोई चेतावनी बोर्ड या सुरक्षा घेरा नहीं है, जिससे बच्चे और अन्य लोग आसानी से नहर के पास चले जाते हैं। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन तुरंत चेतावनी बोर्ड लगाए और नहर किनारे बाड़ लगवाई जाए।

बच्चियों के परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए

पीड़ित परिवारों की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। ऐसे में प्रशासन से मांग की जा रही है कि बच्चियों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि इस इलाके में गोताखोरों की कमी है। यदि समय पर बचाव दल पहुंच जाता, तो शायद तीनों बच्चियों को बचाया जा सकता था। प्रशासन से मांग की जा रही है कि क्षेत्र में प्रशिक्षित गोताखोरों की नियुक्ति की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूलों में बच्चों को जल सुरक्षा (Water Safety) की ट्रेनिंग दी जाए ताकि वे ऐसी परिस्थितियों में खुद को सुरक्षित रख सकें।

बीते वर्षों में हुई ऐसी घटनाएं

यह कोई पहली घटना नहीं है जब नर्मदा नहर में किसी की जान गई हो। बीते वर्षों में भी इस नहर में कई डूबने की घटनाएं हो चुकी हैं। 2022 उमरियापान के ही समीप एक युवक की नहर में डूबने से मौत हो गई थी। 2021 परसवारा गांव के दो किशोर नहर में डूब गए थे, जिनमें से एक की लाश मिली थी, जबकि दूसरे का शव काफी खोजबीन के बाद बरामद हुआ था। 2019 कटनी जिले के एक अन्य हिस्से में एक महिला और उसका बच्चा नहर में डूब गए थे। इन घटनाओं के बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है।

सरकार और प्रशासन को क्या कदम उठाने चाहिए?

नहरों के किनारे चेतावनी बोर्ड लगाने चाहिए और बाड़ लगानी चाहिए ताकि कोई गलती से पानी के करीब न जाए। नहरों और जलाशयों के पास रहने वाले लोगों को जल सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाए। जिन इलाकों में बार-बार ऐसी घटनाएं होती हैं, वहां स्थायी रूप से रेस्क्यू टीम तैनात की जाए। बच्चों को तैराकी सिखाने और जल में सुरक्षित रहने के तरीके बताने की जरूरत है। तीन मासूम बच्चियों की नहर में डूबने की यह घटना अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है। सिद्धि और अंशिका की असमय मौत ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया है, जबकि मानवी पटेल की तलाश अब भी जारी है। प्रशासन को इस घटना से सबक लेते हुए नहरों के किनारे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। ग्रामीणों की मांग है कि इस मामले में उचित कार्रवाई की जाए और पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाए। इस घटना ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जल सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैलाना अब बेहद जरूरी हो गया है। सरकार और प्रशासन को तत्काल कदम उठाकर इस दिशा में ठोस उपाय करने चाहिए ताकि किसी अन्य परिवार को इस तरह की पीड़ा से न गुजरना पड़े