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Dharmendra Singh

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May 14, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

कमलकिशोर साहू की रिपोर्ट


केशवाही/अमलाई |
शहडोल जिले के केशवाही वन परिक्षेत्र के अमलाई में हाथियों का तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा है, लेकिन वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं। बीती रात ग्राम गिरवा में छोटेलाल सिंह की हाथी के हमले में हुई नृशंस मौत ने केशवाही वन परिक्षेत्र अधिकारी (Ranger) अंकुर तिवारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं।
👉रेंजर साहब! जब हाथी सरहदें पार कर रहा था, तब आप कहाँ थे?
सवाल सीधा है और तीखा भी। जब हाथी अनूपपुर के खोलगढ़ी से चलकर रामपुर बीट, बेलिया गांव और फिर गिरवा तक पहुंच गया, तो रेंजर अंकुर तिवारी का निगरानी तंत्र क्या कर रहा था?
सूचना तंत्र का फेल होना: हाथी के मूवमेंट की जानकारी होने के बावजूद ग्रामीणों तक ‘अर्ली वार्निंग’ क्यों नहीं पहुंचाई गई? क्या रेंजर साहब केवल कागजों पर हाथियों की ट्रैकिंग कर रहे हैं?
👉सुरक्षा के नाम पर शून्य: गिरवा और आसपास के संवेदनशील इलाकों में विभाग की गश्ती टीम नदारद क्यों थी? किसान छोटेलाल और उनके मवेशी को हाथी ने कुचल डाला, लेकिन विभाग को खबर तब लगी जब सब कुछ खत्म हो गया।
संसाधनों का दुरुपयोग: हाथियों की निगरानी के लिए आने वाले फंड और संसाधनों का उपयोग आखिर कहां हो रहा है? जब धरातल पर न तो टॉर्च की रोशनी दिखती है और न ही वनकर्मियों की मौजूदगी, तो क्या सारा तामझाम सिर्फ सरकारी फाइलों तक सीमित है?
👉अंकुर तिवारी के कार्यकाल में दहशत का साया
क्षेत्र के ग्रामीणों का आरोप है कि रेंजर अंकुर तिवारी के नेतृत्व में वन विभाग केवल औपचारिकताएं निभाने तक सीमित रह गया है। हाथी रात के 9 बजे रिहायशी इलाकों में मौत बांट रहा है और अधिकारी क्षेत्र से नदारद हैं। ग्रामीणों का आक्रोश इस बात पर भी है कि घटना के बाद केवल संवेदना जताने से काम नहीं चलेगा, जवाबदेही तय होनी चाहिए।
आज फिर खतरे में अमलाई, क्या अब जागेंगे अधिकारी?
आज 14 मई की सुबह हाथी के अमलाई वन क्षेत्र में ठहरने की पुख्ता जानकारी है। क्या अब भी रेंजर साहब और उनका अमला इसी तरह हाथ पर हाथ धरे बैठा रहेगा? क्या प्रशासन किसी और ग्रामीण की बलि चढ़ने का इंतजार कर रहा है?
👉हमारा सवाल: क्या वरिष्ठ अधिकारी रेंजर अंकुर तिवारी की इस घोर लापरवाही पर संज्ञान लेंगे? क्या इस मौत की जिम्मेदारी तय करते हुए उन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी?
ग्रामीणों की मांग है कि तत्काल प्रभाव से हाथियों की वास्तविक ट्रैकिंग शुरू की जाए और लापरवाह अधिकारियों को फील्ड से हटाया जाए।