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Dharmendra Singh

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February 13, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

लापता लॉ स्टूडेंट का मामला पहले तलाशने में बेपरवाही अब दस्तयाब करना नहीं चाह रही पुलिस विवाह माफिया दलालों ने उलझाया कोतवाली पुलिस का नहीं बदला ढुलमुल रवैया

लापता लॉ स्टूडेंट का मामला
पहले तलाशने में बेपरवाही अब दस्तयाब करना नहीं चाह रही पुलिस
विवाह माफिया दलालों ने उलझाया
कोतवाली पुलिस का नहीं बदला ढुलमुल रवैया

कटनी। केडीसी की लापता लॉ स्टूडेंट को तत्परता से तलाशने पहले ही कोई कार्यवाही नहीं की गई, और अब दो-दो थानों की सूचना के बाद भी उसे ग्वालियर से दस्तयाब करने की बजाय पुलिस मामला ‘बालिग का मानकर नामजद आरोपी को लगातार राहत देने का काम कर रही है। उसके बचाव में लगे विवाह माफिया दलालों का बड़े इत्मिनान से इंतजार किया जा रहा है।
बता दें, घटना दिनांक 21 मई की सुबह जब ग्वालियर निवासी एक कामुक प्रवृत्ति का आदतन अपराधी संदिग्ध परिस्थितियों में कटनी डिग्री कॉलेज गेट से एलएलबी प्रथम वर्ष की छात्रा को ले-भागा। गुमशुदगी रिपोर्ट में नामजद आरोपी सुनील मंडेलिया से करीबी रिश्ता, उसके निवास का पता एवं मोबाइल नंबर की जानकारी दिए जाने पर भी पुलिस की जांच का रवैया ढुलमुल बना रहा। 7 दिन बीतने के बाद भी पुलिस ने आरोपी के निवास थाना क्षेत्र- थाटीपुर पुलिस ग्वालियर को ना तो इत्तला की और ना ही उसके मोबाइलों की लोकेशन्स ट्रेक कराई।

फिर कुछ दिन बाद आरोपी के बचाव में तथाकथित आर्य समाज वैदिक संस्कार एवं जन कल्याण संस्था सिटी सेन्टर, ग्वालियर से शादी हो जाने की सूचना देकर मामला निपटाने विवाह माफिया दलालों का कोतवाली पुलिस से पत्राचार होता है। इसी बीच सीएसपी-तहसीलदार दम्पत्ति के हाई प्रोफाइल विवाद में वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले और कोतवाली व महिला थाना प्रभारियों की विभागीय जांच शुरू हो जाने के कारण यह मामला टाल दिया जाता है? अब चूंकि एक माह से अधिक का समय बीत चुका है ऐसे में कोतवाली पुलिस की चुप्पी से कई सवाल उठ रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ग्वालियर में वकीलों और दलालों के शादी माफिया के रूप में कतिपय संस्थाएं चमकदार डिजाईनिंग भवन, हॉल व ऑफिस खोलकर मोटी रकम ऐंठती है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने ऐसे जारी विवाह प्रमाण पत्रों को अवैध माना है और इस संबंध में सख्ती बरतने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल सक्षम प्राधिकारी ही विवाह प्रमाण-पत्र जारी कर सकते हैं, जबकि हाईकोर्ट ने फर्जी दस्तावेजों और अवैध गतिविधियों की जांच के लिए कदम उठाए हैं।

जैसा कि विदित है, अखिल भारत आर्य समाज ट्रस्ट द्वारा संचालित एकमात्र अधिकृत और मान्यता प्राप्त आर्य समाज संस्कार केन्द्र महावीर पुरा, डबरा में स्थित है। यह केन्द्र ग्वालियर क्षेत्र में आर्य समाज की गतिविधियों का मुख्य आधार है। इसके अलावा ग्वालियर में अन्य कोई केन्द्र (जैसे कि सिटी सेन्टर में) उनके द्वारा अधिकृत नहीं है। फिर कोतवाली पुलिस कैसे यकीन कर हाथ पर हाथ धरे बैठी है।

बताते हैं, विवाह माफिया दलालों ने बड़ी चालाकी से कोतवाली पुलिस को लड़की बालिग है, कहकर उलझाए रखा। हो सकता है लड़की को इमोशनल ब्लैकमेल कर सगे रिश्तों की मर्यादाओं को तार-तार करने विवश किया हो? कमउम्र में उसे झूठ फरेब व निषिद्ध नातेदारी की उतनी जानकारी न हो? फिर भी कोतवाली पुलिस बिना जांच के ही आरोपी को क्लीनचिट देने का मन बना बैठी है। अव्वल माता-पिता ही उसके संवैधानिक प्रथम संरक्षक हैं, उसे तत्परता से दस्तयाब कर परिजनों को सौंपा जाए। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों के दिशा-निर्देशन में ग्वालियर पुलिस के साथ मिलकर संस्था की कथित गतिविधियां, उसके द्वारा जारी विवाह प्रमाण-पत्रों, बोगस दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच शुरू की जाए ताकि विवाह माफिया दलालों के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हो सके।