कटनी में दलित बेटी की शादी में पुलिस कार्रवाई का आरोप, मंडप से दूल्हा-दुल्हन को थाने ले जाने पर उठा विवाद

“क्या शादी के मंडप से दुल्हन को उठाना ही कानून का राज है?” — पीड़ित परिवार ने लगाई न्याय की गुहार
कटनी। जिले के कुठला थाना क्षेत्र अंतर्गत इंद्रानगर में एक दलित परिवार की शादी समारोह के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई अब बड़ा विवाद बनती जा रही है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि 20 अप्रैल 2026 को विवाह समारोह के दौरान पुलिस ने बारात एवं घरातियों पर बल प्रयोग और लाठीचार्ज किया, जिससे शादी की रस्में बाधित हो गईं और पूरे परिवार में भय व आक्रोश का माहौल बन गया।
परिवार का आरोप है कि पुलिस ने विवाह मंडप से दूल्हा-दुल्हन को उठाकर थाना परिसर में बैठा दिया, जिसके कारण धार्मिक एवं पारंपरिक वैवाहिक अनुष्ठान अधूरे रह गए। घटना में वधू की माता भगवती चौधरी सहित करीब 8 लोगों के घायल होने की बात कही जा रही है।
पीड़ित पक्ष ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि घटना के दौरान कोई महिला पुलिस अधिकारी मौजूद नहीं थी, इसके बावजूद महिलाओं के साथ पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा बल प्रयोग किया गया।
वधू की माता भगवती चौधरी ने भावुक होते हुए कहा कि परिवार अपनी बेटी का विवाह सम्मान और खुशी के साथ करना चाहता था, लेकिन पुलिस कार्रवाई ने पूरे समारोह को अपमान और डर में बदल दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बुजुर्गों तक को नहीं बख्शा गया और आज भी परिवार न्याय की उम्मीद में प्रशासन की ओर देख रहा है।
वधू रिचा चौधरी ने कहा कि उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन तनाव और भय में बदल गया। उन्होंने आरोप लगाया कि विवाह की रस्में अधूरी रह गईं और उन्हें थाना ले जाकर बैठाया गया, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
मामले में अधिवक्ता अनिल सिंह सेंगर ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को गरिमा, समानता और धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। यदि किसी दलित परिवार की बेटी के विवाह समारोह में हस्तक्षेप कर धार्मिक संस्कारों को बाधित किया गया है, तो यह बेहद गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
वहीं अधिवक्ता यश खरे ने कहा कि यदि पुलिस द्वारा अधिकारों का अतिक्रमण, महिलाओं के साथ विधि विरुद्ध बल प्रयोग तथा धार्मिक अनुष्ठानों में बाधा डाली गई है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रशासन और पुलिस पर उठे बड़े सवाल
क्या विवाह मंडप से दुल्हन को उठाकर थाने ले जाना कानून सम्मत है?
क्या दलित समाज को व्यवहारिक रूप से समान न्याय मिल पा रहा है?
क्या धार्मिक रीति-रिवाजों से विवाह संपन्न करना अपराध है?
यदि लाठीचार्ज हुआ तो जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
पीड़ित परिवार की प्रमुख मांगें
पूरे मामले की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जाए।
कुठला थाना प्रभारी सहित संबंधित पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित किया जाए।
प्रथम दृष्टया दोषी अधिकारियों के विरुद्ध FIR दर्ज की जाए।
पीड़ित परिवार को सुरक्षा एवं न्याय प्रदान किया जाए।
यह मामला अब केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सामाजिक सम्मान, संवैधानिक अधिकारों और न्याय व्यवस्था में आमजन के विश्वास से जुड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं

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