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Dharmendra Singh

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February 15, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

सादरप्रकाशनार्थ
गुना
08/10/25
भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिखाए गए विश्वरूप का परम दृश्य इन श्लोकों में प्रकट होता है। श्रीकृष्ण अर्जुन को कहते है कि ये सब योद्धा पहले ही मेरे द्वारा मारे जा चुके हैं; तू केवल निमित्त मात्र बन,इससे पता चलता है कि ईश्वर की योजना में मानव केवल एक साधन मात्र है। अर्जुन, भगवान के विराट स्वरूप को देख भय और श्रद्धा से भर जाता है। वह अपने अपराधों के लिए क्षमा मांगता है वह बार-बार प्रणाम करते हुए भगवान से विनती करता है कि जैसे पिता पुत्र को, मित्र मित्र को, या प्रियजन अपने प्रिय को क्षमा करता है, वैसे ही भगवान भी उसे क्षमा करें । जब मनुष्य अहंकार छोड़कर परमात्मा के समक्ष पूर्ण आत्मसमर्पण करता है, तभी उसे सच्चे धर्म और कर्तव्य का बोध होता है। उक्त आशय के विचार सिद्धेश्वरी माता मंदिर पर आयोजित गीता स्वाध्याय में श्री देवेंद्र भार्गव ने व्यक्त किये वै श्रीमद् भगवत गीता के विश्वरूप दर्शन योग नामक 11वे अध्याय के निर्धारित श्लोकों के संबंध में बोल रहे थे । सूचना खंड में विश्वगीताप्रतिष्ठानम् गुना के जिला गीता परीक्षा प्रमुख श्री नरेंद्र भारद्वाज ने गीता ओलंपियाड परीक्षा के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिवर्ष जन सामान्य हेतु गीता ओलंपियाड प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है जिसमें संस्था, जिला और प्रांत तथा अखिल भारतीय स्तर से होते हुए तीन वर्गों में से विजेता चुने जाते हैं।कक्षा 6 से 8 तथा 9 से 12 एवं महाविद्यालय – सामाजिक वर्ग के प्रतिभागियों के प्रोत्साहन हेतु इस बार अखिल भारतीय स्तर पर प्रोत्साहन राशि बढ़ा कर प्रथम 11000, द्वितीय 5000 तथा तृतीय पुरस्कार 3000 रुपए कर दी गई है। उल्लेखनीय है कि विगत वर्ष महाविद्यालय-सामाजिक वर्ग में ₹5000 का प्रथम पुरस्कार शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के संस्कृत विभाग के विद्यार्थी ने प्राप्त किया था । प्रेरक प्रस्तुतियों के क्रम में अमृतवचन प्रस्तुत करते हुए श्री लखन नामदेव ने कहा कि जो सिर्फ अपना भला चाहे वह पापात्मा है जो अपनों का भला चाहे वह पुण्यात्मा है और जो सबका भला चाहे वह परमात्मा है इसीलिए दुर्योधन का पापात्मा है युधिष्ठिर पुण्यात्मा है और भगवान कृष्ण परमात्मा है। श्रीरामस्वरूप सेन ने प्रेरक प्रसंग प्रस्तुत करते हुए बताया कि जो ना ईर्ष्या करता है ना द्वेष करता है ना शोक करता है और शुभ और अशुभ का परित्यागी है वह भगवान को प्रिय और उसपर भगवान सदैव अपरिमित कृपा करते है। सुभाषित के माध्यम से श्री राधेश्याम शर्मा जी ने स्पष्ट किया की योजनाओं का प्रचार करने की अपेक्षा उन योजनाओं पर कार्य करना उचित है। आगामी स्वाध्याय के लिए गीता जी की गरिमामय आगवानी करते हुए श्री सुभाष त्रिवेदी ने सभी से आगामी रविवार को अपराह्न ४:०० बजे सिद्धेश्वरी माता मंदिर प्रांगण में ही पधारने का अनुरोध किया। गीता स्वाध्याय के यजमान श्री उमाशंकर भार्गव ने सभी का आभार व्यक्त किया। आयोजन में अनेक धर्म प्रेमी जनों ने भाग लिया।

प्रेषक
मनोज शर्मा प्रचार प्रमुख
गीतास्वाध्याय मंडल गुना 9039871197