दवा दुकानों में मनमानी, कुछ की लापरवाही से बदनाम हो रहा पूरा दवाओं का कारोबार
कटनी। जिले में दवा दुकानों का संचालन नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। बिना फार्मासिस्ट के कई मेडिकल स्टोर खुलेआम चल रहे हैं। सूत्रों की माने तो कई दुकानदारों ने किराये पर फार्मासिस्ट के प्रमाणपत्र लेकर दस्तावेजों में लगाकर लाइसेंस प्राप्त किया है। ऐसे दुकानदार हर महीने प्रमाणपत्र धारकों को पाँच से दस हजार रुपये तक “किराया” देते हैं।
खानापूर्ति बन गई जांच
स्वास्थ्य विभाग की ओर से की जाने वाली जांच भी महज़ औपचारिकता बनकर रह गई है। जांच के नाम पर अधिकारी दुकानों का दौरा तो करते हैं, लेकिन वास्तविक अनियमितताओं पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
बिना प्रिस्क्रिप्शन के दवाएं
जिले की अधिकांश दुकानों में बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के दवाएं दी जा रही हैं। हाल ही में बड़वारा क्षेत्र में एक बच्चे को बिना प्रिस्क्रिप्शन दवा देने का वीडियो वायरल हुआ था।
टीम ने की औपचारिक जांच, दुकानदार बच निकला
वीडियो वायरल होने के बाद जांच टीम मौके पर तो पहुंची, लेकिन सूत्रों के अनुसार कार्रवाई करने की बजाय औपचरिकता पूरी कर लौट गई। वही एक सरकारी कर्मचारी ने दुकानदार को सलाह दी कि वीडियो बनाने वाले की थाने में शिकायत कर दो। संयोगवश, वीडियो बनाने वाला संबंधित मीडिया संस्थान से जुड़ा व्यक्ति था, इसलिए यह योजना सफल नहीं हो सकी।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
लाइसेंस नियमों के उल्लंघन, दवा वितरण में अनियमितता और औषधि नियंत्रण विभाग की निष्क्रियता पर अब सवाल उठने लगे हैं। हैरानी की बात है कि छिंदवाड़ा कांड के बाद भी चेतने को तैयार नहीं है। निर्धारित मापदंड का पालन तक नहीं कराया जा रहा।

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