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Dharmendra Singh

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February 2026
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February 4, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

महाराष्ट्र राज्य जिला गडचिरोली आष्टी वक्त के साथ हालात भी बदलने की उम्मीद….

 

मेहनत से मुकाम हासिल न हो तो दुख होता है, मगर जब मुकाम हासिल करने के बाद भी ज़िंदगी न बदले तो इंसान टूट जाता है l महेश के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, जिन्हें दो वक़्त की रोटी के लिये अभी भी वक्त के साथ हालात भी बदल जायेंगे इस उम्मीद मे है l आइए जातने हैं महेश पांडुरंग शेंडे की कहानी, जिन्हें लोगों ने भुला दिया

 

अक्षय कुमार कुडो कराटे खेल मे वनवैभव शिक्षण के संस्थापक श्री बबलूभैया हकीम और शाहीन भाभी हकीम के मार्गदर्शन मे MJF कालेज का प्रतिनिधित्व किया था l लाईफ का उनका पहला इवेंट था l मुंबई छत्रपती शिवाजी महाराज क्रीडा संकुल मे उन्होंने अपनी लाइफ़ में पहली बार इतनी संख्या में भीड़ देखी थी, जिनकी नज़रें उन पर थीं. ऐसे मौके पर किसी का भी नर्वस होना बनता है l लेकिन महेश नर्वस नहीं हुए कहते हैं उन्हें उस समय सिर्फ अपनी जीत और गाव के लिए पदक दिख रहा था l कराटे मास्टर श्री कपिल मसराम और इंटरनॅशनल गोल्ड मेडलिस्ट कराटे मास्टर श्री विनय बोढे के मार्गदर्शन और आत्मविश्वास का कमाल था कि वो 2013 में मुंबई में हुए अक्षय कुमार कुडो कराटे में ब्रांझ मेडल जीत लाये l

 

उसके बाद 2016-2017 मे हरियाणा महर्षी दयानंद विद्यालय रौहतक मे आयोजित तायकांडो प्रतियोगिता दुर्भाग्य से 1 पॉईंट से जीत की दुरी रह गई l कामयाबी के साथ जीत हासील के लिये यह सील- सीला निरंतर शुरु रहा l

 

2024-2025 नांदेड मे आयोजित वु-शु मार्शल आर्ट प्रतियोगिता मे जिला क्रीडा अधिकारी मिलिंद साळवे और नॅशनल गोल्ड मेडलिस्ट प्रीती बोरकर के मार्गदर्शन मे कठीण परिश्रम, मेहनत और समर्पण के साथ ब्राँझ मेडल जीतकर लोगो के उम्मीद पर खरे उतरे l लेकिन अभी के हालात देखकर कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था उसके लिए दो वक़्त की रोटी कमाना भी मुश्किल हो जाएगा l

 

 

ग़रीबी से जूझने की स्थिति में वो अपने आपको संभालना मुश्किल हो रहा है l q

ज़ाहिर है आज के कलयुग मे पैसों के बिना में ज़िंदगी का गुज़ारा नामुमक़िन है l

वाक़ई ये देखना बेहद दुखद है कि जिस खिलाडी ने गाव का नाम रौशन किया, वो आज ख़ुद अपनी ज़िंदगी अंधेरे में गुज़ारने के लिये मजबूर है l अभी तक किसी भी सेवा या संस्था से मदत नही मिली l उनका कहना है l उम्मीद पर दुनिया टिकी हुवी है l