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Dharmendra Singh

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April 12, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

लोकेशन – कोटा, राजस्थान

रिपोर्ट – निश्चल शर्मा

 

*शिक्षा संवाद कार्यक्रम*

*समाज को दिशा देने में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण*

*शिक्षक का जीवन दूसरों के लिए आदर्श ऐसे में नैतिक मूल्य बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी*

*-शिक्षा मंत्री*

कोटा, 12 अप्रेल। शिक्षा मंत्री श्री मदन दिलावर ने कहा कि शिक्षक समाज को दिशा देने और व्यक्तित्व का निर्माण करने का कार्य करते हैं। सर्वश्रेष्ठ राजनेता, उद्योगपति, विधिवेत्ता, वैज्ञानिक के साथ ही श्रेष्ठ नागरिकों को तैयार करने का कार्य एक शिक्षक द्वारा किया जाता है। किसी भी व्यक्ति के लिए उसके जीवन एवं व्यक्तित्व को संवारने वाला शिक्षक सर्वाधिक सम्माननीय होता है। ऐसे में यह शिक्षकों का दायित्व है कि वे सुनिश्चित करें कि सर्वश्रेष्ठ नागरिक तैयार करने के इस पुनीत कार्य में किसी तरह की न्यूनता नहीं आए। हमारे विद्यालय सर्वश्रेष्ठ हों और शिक्षक के पद की गरिमा ऊंचाईयों पर पहुंचे यह सभी का प्रयास होना चाहिए।

श्री दिलावर रविवार को सियाम ऑडिटोरियम में शिक्षा संवाद कार्यक्रम में कोटा एवं बूंदी जिलों के 627 प्रधानाचार्यों एवं शिक्षा अधिकारियों से संवाद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षक का जीवन विद्यार्थियों एवं अन्य लोगों के लिए आदर्श होता है। दूसरे हमेशा उनसे सीखते हैं ऐसे में सार्वजनिक जीवन में भी उन्हें नैतिकता के मापदंडों पर खरा उतरना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानाचार्य विद्यालय का मुखिया होता है ऐसे में उन्हें भी समय की पाबंद के ध्यान रखते हुए अपने व्यवहार और हाव-भाव से दूसरों को प्रेरणा देने वाला होना चाहिए।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि विद्यालयों का संचालन करने वाले प्रधानाचार्यों से बात करने और उनके सुझाव आमंत्रित करने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि कोई भी शिक्षक अपनी भूमिका अच्छे से निभाए तो उसे विद्यार्थियों द्वारा जीवन भर याद रखा जाता है। शिक्षक सिर्फ मानदेय या वेतन के लिए नहीं कार्य करने वाले कर्मचारी नहीं बल्कि समाज को दिशा देने वाली भूमिका से अपने आपको परखें।

 

*पूर्व छात्रों को विद्यालय से जोड़ें*

शिक्षा मंत्री ने प्रधानाचार्यों को सुझाव दिया कि सभी अपने विद्यालय में पढ़ चुके पूर्व छात्रों की सूची बनाकर एलुमनाई मीट में उन्हें बुलाएं। उन्होंने कहा कि आपके विद्यालय से पढ़े हुए छात्र कहीं अच्छे राजनेता, प्रोफेसर, उद्योगपति, वैज्ञानिक एवं सफल बिजनेसमैन बन चुके होंगे। उन्हें एलुमनाई मीट में बुलाएं और मुझे पक्का विश्वास है कि वह आपके विद्यालय के भवन, कमरे, फर्नीचर, स्मार्ट क्लास रूम एवं अन्य सुविधाओं के लिए आगे बढ़कर सहयोग करेंगे क्योंकि उस विद्यालय में प्राप्त शिक्षा से ही उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। उन्होंने स्थानीय स्तर पर भी भामाशाहों का सहयोग लेने के लिए कहा।

 

*नशामुक्ति की दिशा में सहयोग दें*

श्री दिलावर ने कहा कि सभी विद्यालय नशा मुक्ति बने और विद्यालयों के आसपास के क्षेत्र में भी कोई गुटखा बीड़ी का सेवन नहीं करें इसके लिए सभी को जागरूक करें। उन्होंने कहा कि शराब पीने गुटखा खाने और तंबाकू खाने वाले कर्मचारियों की सूची तैयार करें।

 

*प्रवेश के समय बच्चों के अच्छे नाम सुझाएं*

श्री दिलावर ने कहा कि हाल ही में प्रवेशोत्सव मनाया गया जिसमें कई बच्चों के नाम स्कूलों में जोड़े गए हैं। प्रधानाचार्य इस बात पर जरूर ध्यान दें कि यदि किसी बच्चे का नाम सुनने में अच्छा नहीं लगे और भविष्य में उसे उससे उस बच्चे के मन में शर्मिंदगी का भाव आए, ऐसा लगने पर अभिभावकों को जरूर समझाएं कि बच्चे के लिए कोई अच्छा नाम चुनें।

 

*3 हजार नामों की सूची भेजेंगे*

श्री दिलावर ने कहा कि राज्य सरकार ऐसे 3 हजार नाम की सूची विद्यालयों में उपलब्ध कराएगी जिनमें से अभिभावकों की सहमति से प्रवेश के समय अच्छे नाम चुने जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कोई बच्चा बाद में भी अपना नाम बदलना चाहे तो दस्तावेजों में नाम बदलने के लिए प्रक्रिया में उसका सहयोग करें।

 

*प्रार्थना सभा को रोचक और ज्ञानवर्धक बनाएं*

शिक्षा मंत्री ने विद्यालयों में प्रार्थना सभाओं को ज्ञानवर्धक और रोचक बनाने के लिए प्रधानाचार्यों से सुझाव आमंत्रित किए। इटावा ब्लाक के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मुंगेना के प्रधानाचार्य बाबूलाल मीणा ने बताया कि उन्होंने शिक्षकों के सहयोग से गली-गली में जाकर ढोल बजाकर बच्चों को स्कूल में दाखिला करवाने लिए अभिभावकों को प्रेरित किया और उन्हें पीले चावल भी बांटे। परिणामस्वरूप पिछले वर्ष के मुकाबले अभी करीब 80 से अधिक बच्चे बढ़े हैं।

*एआई आधारित अध्यापन के लिए ऐप बनाए*

विद्यालयों में किए गए नवाचारों के बारे में शिक्षा मंत्री द्वारा पूछे जाने पर अर्जुनपुरा उच्च माध्यमिक विद्यालय, कोटा के भूगोल के व्याख्याता गजेंद्र गौतम ने बताया कि उन्होंने एआई आधारित चार ऐप विकसित किए हैं। इन ऐप पर चैटबोट की मदद से एएआई शिक्षक बच्चों को भूगोल विषय पढ़ा रहे हैं।

शिक्षा मंत्री ने शिक्षक गजेंद्र गौतम को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया और निर्देश दिए कि विभागीय कार्यशाला में उन्हें बुलाकर डेमो दिलाया जाए ताकि दूसरों को भी प्रेरणा मिले।

*शारीरिक शिक्षक भी खेल के कालांश लें*

खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के उपायों के बारे में पूछने पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि अक्सर देखा जाता है विद्यालयों में शारीरिक शिक्षण सप्ताह में एक या दो बार ही बच्चों को खेल के मैदान में ले जाकर उन्हें गतिविधियां करवाते हैं। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था की जाएगी कि पीटीआई भी प्रतिदिन अन्य शिक्षकों की तरह अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों के खेल के पीरियड लेंगे ताकि सभी बच्चों को खेलो में भाग लेने का अवसर मिले और उनका शारीरिक विकास हो। उन्होंने कहा कि सभी कलक्टर को निर्देश दिए गए हैं कि स्कूलों में खेल मैदान से अतिक्रमण हटाए जाएं और जहां खेल मैदान नहीं है वहां भूमि आवंटित की जाए।

*बीएलओ का स्कूल आना अनिवार्य*

शिक्षा मंत्री ने कहा कि राजस्थान में एसआईआर की प्रक्रिया करीब-करीब पूर्ण हो चुकी है ऐसे में जिला कलक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बीएलओ को अग्रिम आदेश तक पूरे दिन के लिए स्कूल में रहने के लिए रिलीव करें। उन्होंने कहा कि उपखंड कार्यालय और कलेक्ट्रेट कार्यालय में लगाए गए शिक्षकों को भी वापस स्कूलों में भेजने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि किसी कार्य से यदि इन कार्यालयों में शिक्षक को लगाया जाना है तो उसे जिला मुख्यालय के शहरी स्कूलों से ही लगाया जाए ना कि ब्लॉक स्तर के स्कूलों से। उन्होंने कहा कि बीएलओ की ड्यूटी में लगाए जाने वाले शिक्षकों को भी विद्यालय के आसपास के क्षेत्र में ही लगाया जाए ताकि वे कम से कम आधे दिन स्कूल में जाकर अध्यापन कार्य कर सकें। उन्होंने स्पष्ट किया की सिफारिश करवा कर सुविधाजनक जगह पर लगने की प्रवृति पर रोक लगाई जाएगी।

 

*भामाशाह जिला शिक्षा अधिकारी का सम्मान*

कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री ने शिक्षा मंत्री ने जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक, कोटा श्री रामचरण मीणा को अपने पैतृक गांव मुंगेना के सीनियर सेकंडरी स्कूल में उनके परिवार द्वारा करीब सवा दो बीघा भूमि दान करने और आरओ एवं सोलर पैनल की स्थापना में 1 लाख 21 हजार रुपए के आर्थिक सहयोग के लिए मंच पर बुलाकर सम्मानित किया। उन्होंने अन्य को भी प्रेरणा लेते हुए विद्यालयों के विकास के लिए सहयोग करने की सीख लेने को कहा।

शिक्षा मंत्री ने प्रवेश उत्सव के दौरान किए गए नवाचारों के बारे में भी जानकारी ली।

 

*मानवीय मूल्यों को स्वयं समझना होगा*

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर एवं यूजीसी की मूल्य समिति के अध्यक्ष श्री एच. डी. चारण ने कहा कि विद्यार्थियों को मानवीय मूल्यों की शिक्षा देना हम सभी की जिम्मेदारी है। शुरुआती शिक्षा के दौरान ही विद्यार्थियों को नैतिक रूप से सुदृढ़ बनाकर आने वाली पीढ़ियों को भी संस्कारित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों, प्रधानाचार्य और समाज के हर जिम्मेदार व्यक्ति को पहले मानवीय मूल्यों को स्वयं समझना होगा फिर उन्हें बच्चों को समझाना होगा तभी उनका जीवन सार्थक बन पाएगा। उन्होंने कहा कि मानवीय मूल्यों की शिक्षा लागू करने के संदर्भ में सीबीईओ एवं पीएम श्री स्कूलों के प्राचार्यों के प्रशिक्षण आयोजित किए जा चुके हैं एवं अन्य को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

 

*शिक्षा मंत्री की अभिनव पहल*

कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री के ओएसडी श्री सतीश गुप्ता ने कहा कि नीचे के स्तर तक जाकर सीधे प्रधानाचार्य से संवाद करने की शिक्षा मंत्री की अभिनव पहल सराहनीय है। उन्होंने कहा कि इस बार 1 अप्रेल से नया सत्र शुरू होने के साथ ही किताबें विद्यार्थियों के पास पहुंच चुकी हैं। पिछले सत्र में डीपीसी के माध्यम से करीब 50,000 शिक्षकों के प्रमोशन किए गए थे। इस सत्र में भी डीपीसी जल्द करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि राजस्थान को शिक्षा के क्षेत्र में ऊंचाइयों पर ले जाने की संकल्पना के साथ शिक्षा से संवाद समाधान और सकारात्मक परिवर्तन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

शिक्षा संवाद कार्यक्रम में कोटा एवं बूंदी जिले के करीब 627 प्रधानाचार्य, कार्यवाहक प्रधानाचार्य एवं जिला शिक्षा अधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर दिए गए प्रस्तुतीकरण में दोनों जिलों में शैक्षिक परिदृश्य, विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, स्कूली बालिकाओं के लिए शुरू की गई सरकारी योजनाओं तथा वर्ष 2025-26 के बोर्ड परीक्षा परिणामों के बारे में जानकारी दी गई।

 

इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत में संयुक्त निदेशक कोटा संभाग आशा मांडावत ने शिक्षा मंत्री एवं अन्य का स्वागत करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। डॉ. राजश्री गोहटकर ने वंदे मातरम की प्रभावी प्रस्तुति दी। संगीत विद्यालय रामपुरा, कोटा की कत्थक गुरु बरखा जोशी के निर्देशन में केसरिया बालम आओ नी…पधारो म्हारे देश स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया गया। स्वामी की विवेकानंद विद्यालय की बालिकाओं ने भी प्रस्तुतियां दी। सभी को मंच पर बुलाकर उन्हें सम्मानित किया गया। मंच संचालन पुरुषोत्तम शर्मा ने किया।

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