महाराष्ट्र राज्य जिला गडचिरोली कर्तव्यदक्ष पोलीस अधीक्षक श्री एम. रमेश द्वारा अनोखी पहल जिला में ‘समाजसेवा’ के नाम पर वसूली का ‘धंधा’ असामाजिक तत्व के गिरोह पर पुलिस की पैनी नजर……
निसर्ग संपन्न गडचिरोली जिला वर्तमान में एक अलग ही कारण से चर्चा में है। समाजसेवा, मानवाधिकार और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की आड़ में कुछ स्वयंभू ‘नेताओं’ और सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा जबरन वसूली (उगाही) का नया तरीका शुरू करने की चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही है। इस गिरोह का जाल अब तहसील और गाव स्तर तक फैल चुका है। छोटे कर्मचारियों को डराने वाला यह गिरोह अब सीधे लाखों रुपये के ‘सेटलेमेंट’ पर हाथ साफ कर रहा है।
लाखों की फिरौती वसूलने का आरोप
एक वन क्षेत्र अधिकारी से 25 लाख रुपये की फिरौती वसूलने की जानकारी।
पता चला है कि वर्तमान में एक अन्य अधिकारी से भी 25 लाख रुपये की ‘डिमांड’ की गई है।
“समाजसेवा का मुखौटा पहनकर लूट करने वाले इस गिरोह का पर्दाफाश होकर रहेगा। किसी को भी कानून से ऊपर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।” — सूत्रों के अनुसार
गिरोह के काम करने का तरीका और मुख्य बातें:
1. चश्मा, ‘ढोल’ और ‘योग’ का अजीब मेल
दक्षिण गडचिरोली में चश्मा पहनकर और गले में ‘ढोल’ लटकाकर घूमने वाला असामाजिक तत्व खुद को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाला योद्धा बताता है। जो रेती घाट (बालू घाट) और वन विभाग के खिलाफ अनशन और आंदोलनों का नाटक करता रहता है।
2. मुख्य लक्ष्य: रेती घाट और वन विभाग
इस गिरोह का मुख्य निशाना रेती घाट और वन विभाग है। इनका तय फंडा है—कमियां ढूंढना, अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाना और फिर उनसे बड़ी रकम की मांग करना।
इस पहल के चलते तेज तर्रार और सक्त कर्तव्यनिष्ठ SDPO श्री अजय कोकाटे और सभी झोनल अधिकारी SP महोदय के मार्गदर्शन मे उचित नीती और झिरो टोलारन्स के साथ एक्शन मोड पर है l
3 : पत्रकार सावधान, अब पुलिस की नजर इन स्वयंभू नेताओं का असली चेहरा अब सामने आने लगा है। इनकी वसूली वाली प्रवृत्ति की जानकारी होने के कारण अब जिले के पत्रकार इनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। आंदोलन के नाम पर चलने वाला इनका गुप्त कारोबार अब पुलिस के रडार पर है।
4. ‘व्हाइट कॉलर’ अपराध का होगा अंत? समाजसेवा की आड़ में लूट करने वाले इस गिरोह का पर्दाफाश होने से कई ईमानदार अधिकारियों और जिले को इस ‘व्हाइट कॉलर’ अपराध से मुक्ति मिलेगी। जनता की मांग है कि इस गिरोह पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
प्रशासन से अपेक्षा:
नागरिकों की मांग है कि जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक इस दुर्गम क्षेत्र पर ध्यान दें और इस ‘राजनीतिक-प्रशासनिक’ सांठगांठ को तोड़ें। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो गडचिरोली तहसील इस वसूली के चंगुल से बाहर नहीं निकल पाएगी। और दलालो से पीडित आमजन अपने हक्क से वंचित रहेंगे l
महेश पांडुरंग
शेंडे की रिपोर्ट…..

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