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Dharmendra Singh

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May 6, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

सुप्रीम कोर्ट न्यूज़:- हाल ही में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला ने महेंद्र गोयनका से संबंधित एक मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग (recuse) कर लिया है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पारदीवाला ने मामले पर असंतोष व्यक्त करते हुए टिप्पणी की, “इस केस में कौन हैं महेंद्र गोयनका,” और इसके पश्चात उन्होंने इस प्रकरण की सुनवाई करने से इंकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट न्यूज़:- हाल ही में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला ने महेंद्र गोयनका से संबंधित एक मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग (recuse) कर लिया है।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पारदीवाला ने मामले पर असंतोष व्यक्त करते हुए टिप्पणी की, “इस केस में कौन हैं महेंद्र गोयनका,” और इसके पश्चात उन्होंने इस प्रकरण की सुनवाई करने से इंकार कर दिया।

उल्लेखनीय है कि महेंद्र गोयनका, जो रायपुर स्थित निवासी है और पूर्व में एम॰पी के विधायक संजय पाठक के परिवार की कंपनी में काम करता था एवं यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में एक प्रमुख प्रबंधकीय पद पर कार्यरत रहा है, गोयंका पर जालसाजी एवं धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोपों के अनुसार, यह मामला सैकड़ों करोड़ रुपये के कथित वित्तीय अनियमितताओं और कंपनी के बिके हुए माल को छल-कपट करके बेचने से जुड़ा हुआ है।

यह भी आरोप है कि महेंद्र गोयनका, जो पूर्व में मध्य प्रदेश के एक प्रभावशाली विधायक श्री संजय पाठक के कर्मचारी रह चुके हैं, ने कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षरों के माध्यम से उनके परिवार के स्वामित्व वाली कई कंपनियों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। इस संबंध में कोलकत्ता में भी भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120बी सहित अन्य धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

इसके अतिरिक्त, गोयनका के डायरेक्टर्स के विरुद्ध भी कटनी म॰प्र में दो अलग-अलग प्रकरण 420/120B/467/468/471 की प्राथमिकी दर्ज हैं। जानकारी के अनुसार, उनके सहयोगियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा खारिज की जा चुकी हैं, उसके बाद भी वे पिछले लगभग डेढ़-दो वर्ष से फरार बताए जा रहे हैं। मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा अब तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सका है।

मामले की आगे की सुनवाई अब माननीय सर्वोच्च न्यायालय की किसी अन्य उपयुक्त पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किए जाने की संभावना है।
महेंद्र गोयंका फ़र्ज़ीबाड़े के दलदल में फँसते नज़र आ रहे हैं
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इसके अतिरिक्त, यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि महेंद्र गोयनका को मध्य प्रदेश में कुछ अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त रहा है, साथ ही कुछ सत्ता से जुड़े दलालों का भी समर्थन मिलने की बात कही जा रही है। यह भी चर्चा में है कि छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से उनकी नज़दीकियां रही हैं।

इसके अतिरिक्त, इस मामले में कुछ विशिष्ट नामों के साथ राजनीतिक एवं प्रशासनिक संरक्षण के आरोप भी सामने आए हैं। आरोपों के अनुसार, महेंद्र गोयनका को कांग्रेस के एक राज्यसभा सदस्य का वरदहस्त प्राप्त होने की बात कही जा रही है। साथ ही, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कई बार गोयंका द्वारा लगवाये गए प्रकरण से जुड़ी खबरों को अपनी सोशल मीडिया पोस्ट्स के माध्यम से लगातार साझा किए जाते रहे है।

इसी क्रम में यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस से जुड़े कटनी के आशुतोष “मनु” दीक्षित एवं दिव्यांशु मिश्रा जैसे व्यक्तियों को माध्यम बनाकर जनहित याचिकाएं (PIL) दायर कराई जा रही हैं तथा विभिन्न शासकीय विभागों में शिकायतें करवाई जा रही हैं, जिससे व्यवसायिक गतिविधियों को प्रभावित किया जा सके।

बताया जा रहा है कि मुंबई स्थित राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के 9 मई 2025 के आदेश में महेंद्र गोयनका एवं उनकी पत्नी मीनू गोयनका द्वारा वित्तीय गबन से संबंधित टिप्पणियां दर्ज की गई हैं। इसके अतिरिक्त, उनकी एक अन्य कंपनी निसर्ग इस्पात में भी कथित रूप से वित्तीय अनियमितताओं और धन के हेरफेर की खबरें सामने आई हैं।