श्रीमद्भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया, श्रद्धालु भक्ति रस में हुए सराबोर
राजोद। सुतार गली में दुमालेश्वर मित्र महिला मंडल के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा पांडाल भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान रहा। व्यासपीठ से कथा प्रवक्ता पंडित सुरेश द्विवेदी ने भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति, राजा बलि के गर्व मर्दन, मत्स्य अवतार, राजा सगर के पुत्रों के उद्धार तथा भगवान श्रीराम के जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया।
कथावाचक ने भक्त प्रह्लाद की कथा सुनाते हुए कहा कि सच्ची श्रद्धा और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास रखने वाले भक्त की सदैव भगवान रक्षा करते हैं। चाहे कितनी भी विपरीत परिस्थितियां क्यों न हों, प्रभु अपने भक्तों का साथ कभी नहीं छोड़ते। उन्होंने राजा बलि और वामन अवतार का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि अहंकार मनुष्य के पतन का कारण बनता है, जबकि विनम्रता और समर्पण उसे महान बनाते हैं।
कथा के दौरान भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार का वर्णन करते हुए धर्म और सृष्टि की रक्षा का संदेश दिया गया। वहीं राजा सगर के साठ हजार पुत्रों के उद्धार हेतु राजा भागीरथ द्वारा कठोर तपस्या कर मां गंगा को पृथ्वी पर लाने की कथा का मार्मिक वर्णन किया गया। इस प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
इसके पश्चात भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव की कथा सुनाई गई। व्यासपीठ से बताया गया कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं। कथा के अंत में भगवान श्रीकृष्ण जन्म का दिव्य प्रसंग सुनाया गया। जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का वर्णन हुआ, पूरा कथा पांडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोषों से गूंज उठा।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन कर भगवान का जन्मोत्सव मनाया तथा पुष्पवर्षा कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। महिलाओं, युवाओं एवं बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति रस का भरपूर आनंद लिया।
कार्यक्रम के अंत में महाआरती कर समस्त श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। कथा स्थल पर प्रतिदिन बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या आयोजन की सफलता को दर्शा रही है।

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