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Dharmendra Singh

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June 22, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

लमतरा ब्रिज हादसा: पत्थर के अवैध परिवहन की बलि चढ़ी 4 मासूम जिंदगियां, खनिज माफिया का खूनी खेल उजागर हादसे के बाद सतना से योजनाबद्ध तरीके से काटी गई ईटीपी रसूखदारों को बचाने सिस्टम का खेल

लमतरा ब्रिज हादसा: पत्थर के अवैध परिवहन की बलि चढ़ी 4 मासूम जिंदगियां, खनिज माफिया का खूनी खेल उजागर

हादसे के बाद सतना से योजनाबद्ध तरीके से काटी गई ईटीपी

रसूखदारों को बचाने सिस्टम का खेल

कटनी:
लमतरा ब्रिज के पास कन्हावरा मोड़ पर हुए भीषण सड़क हादसे में 4 मासूमों की जान जाने के मामले में अब तक का सबसे बड़ा और सनसनीखेज डिजिटल खुलासा हुआ है। प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती पुलिस पड़ताल में जिस ओवरलोडिंग को हादसे की वजह माना जा रहा था, वह दरअसल खनिज माफिया के संगठित नेटवर्क का एक खूनी खेल है। मध्य प्रदेश शासन के ‘ई-खनिज’ (e-khanij) पोर्टल से प्राप्त आधिकारिक दस्तावेज़ (eTP) ने यह साबित कर दिया है कि हादसे के वक्त हाइवा बिना किसी वैध परमिट के, पूरी तरह अवैध रूप से पत्थर का परिवहन कर रहा था। दुर्घटना के बाद कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए सरकारी तंत्र और कंप्यूटर ऑपरेटरों की मिलीभगत से जालसाजी का एक बड़ा खेल रचा गया।

ईटीपी नंबर 2610398685: समय के अचूक गणित ने खोली पोल
‘ई-खनिज’ पोर्टल के इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिट पास के विश्लेषण से जो टाइमलाइन सामने आई है, उसने माफिया की चालाकी को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है:
हादसे का समय: पुलिस रिकॉर्ड और चश्मदीदों के अनुसार, लमतरा ब्रिज पर यह दर्दनाक हादसा 14 जून 2026 को शाम लगभग 4:00 से 4:15 बजे के बीच हुआ था।
ईटीपी जनरेट होने का समय: दुर्घटनाग्रस्त हाइवा को कानूनी रूप से वैध दिखाने के लिए जो पास जारी किया गया, वह eTP No: 2610398685 है। यह ईटीपी हादसे के बाद यानी शाम 4:44 बजे (14/06/2026 4:44 PM) जनरेट की गई।
असंभव दूरी और समय का गणित: ईटीपी के अनुसार, खनिज की लोडिंग सतना जिले के ग्राम सकरिया (तहसील रघुराजनगर) से दिखाई गई है। दस्तावेज़ में सतना से कटनी की दूरी 125 किलोमीटर और यात्रा की अनुमानित अवधि 4 घंटे 10 मिनट (4:10 Hrs) दर्ज है।
दस्तावेजी विरोधाभास: नियम और गणित के मुताबिक, यदि कोई वाहन शाम 4:44 बजे सतना से रवाना होता है, तो उसे रात 8:54 बजे के बाद ही कटनी की सीमा में होना चाहिए था। सवाल यह उठता है कि जो गाड़ी कागजों पर शाम 4:44 बजे सतना से चली ही नहीं, वह उससे 45 मिनट पहले (शाम 4:00 बजे) कटनी के लमतरा ब्रिज पर दुर्घटनाग्रस्त कैसे हो गई?

कागजों में दर्ज रसूखदारों के नाम
इस खूनी खेल के पीछे जिन रसूखदारों और फर्मों के नाम ई-खनिज पोर्टल पर सामने आए हैं, वे इस प्रकार हैं:
पट्टाधारक (Lessee): आशुतोष मिश्रा – श्री बद्री विशाल मिश्रा, बैंक कॉलोनी, बिरला रोड, सतना।
क्रेता (Buyer): अनिल सुहाने, कटनी।
वाहन और मालिक: दुर्घटनाग्रस्त ट्रक (MP21H2099) खनिज पोर्टल पर ‘मेसर्स विजय कुमार कंकने’ (पन्ना रोड, कुठला, कटनी) के नाम पर दर्ज है। नियमों को ठेंगा दिखाकर इसमें क्षमता से अधिक 18 क्यूबिक मीटर पत्थर (Sub Mineral: Gitti) लोड किया गया था और रूट ‘मैहर-कैमोर रोड’ निर्धारित था।

परिवहन विभाग की ‘रस्म अदायगी’ और जनता का आक्रोश
हालांकि हादसे के तुरंत बाद अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (ARTO) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बस और हाइवा के परमिट व फिटनेस निरस्त करने का पत्र जारी कर दिया है, लेकिन स्थानीय जनता इस दिखावे की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है।
कटनी के प्रबुद्ध नागरिकों और पीड़ित परिवारों का सीधा सवाल है कि जब बिना ईटीपी के यह ‘यमदूत’ सड़कों पर दौड़ रहा था, तब रास्ते के चेकपोस्ट और खनिज बैरियर क्या कर रहे थे? हादसा होते ही महज आधे घंटे के भीतर सतना में बैठकर फर्जी डिजिटल पास जारी करने वाला सिंडिकेट बिना प्रशासनिक संरक्षण के इतना बेखौफ कैसे हो सकता है?

news 24×7 india की मांग: सिर्फ ड्राइवर नहीं, मुख्य सरगनाओं पर दर्ज हो हत्या का मुकदमा
समय और दूरी के इस अकाट्य डिजिटल प्रमाण के बाद अब यह स्पष्ट है कि यह केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि संगठित खनिज माफिया द्वारा किया गया सामूहिक हत्याकांड है। जनता की मांग है कि पुलिस केवल हाइवा चालक या मालिक पर धारा 304A (लापरवाही से मौत) का हल्का केस दर्ज करके इतिश्री न करे।
इस डिजिटल हेरफेर के आधार पर पट्टाधारक, क्रेता और फर्जी ईटीपी जारी करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटर व अधिकारियों के खिलाफ जालसाजी (धारा 420, 467, 468), अवैध उत्खनन और खनिज अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उन्हें सह-आरोपी बनाया जाना चाहिए। जब तक इस खूनी सिंडिकेट की जड़ों पर प्रहार नहीं होगा, तब तक कटनी की सड़कें बेगुनाहों के खून से लाल होती रहेंगी।