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Dharmendra Singh

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सच दिखाने की हिम्मत

स्टेट ब्यूरो हेड प्रियंका माली की रिपोर्ट

जयपुर, 17 जून। मेवाड़ की आन, बान और शान, वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती प्रताप नगर स्थित प्रताप चौक पर श्रद्धा, उत्साह एवं राष्ट्रभक्ति के वातावरण में मनाई गई। घुमंतू जाति उत्थान न्यास एवं हिन्दू शरणार्थी सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस भव्य समारोह में बड़ी संख्या में महिलाओं, बच्चों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता एवं महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। मुख्य अतिथि भूतपूर्व सैनिक विकास समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल देव आनंद लोहमारोड़ सहित अन्य अतिथियों का माल्यार्पण एवं तलवार भेंट कर स्वागत किया गया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में वक्ताओं ने महाराणा प्रताप के अद्वितीय संघर्ष और शौर्य का स्मरण करते हुए कहा कि हल्दीघाटी के युद्ध में उन्होंने अदम्य साहस, स्वाभिमान और स्वतंत्रता की रक्षा का परिचय दिया तथा दिवेर के युद्ध में मुगल सत्ता को निर्णायक चुनौती देकर मेवाड़ के अधिकांश भूभाग को पुनः स्वतंत्र कराया। उन्होंने कहा कि उस समय आक्रांता शक्तियों को स्थानीय सहयोग भी प्राप्त था, किंतु महाराणा प्रताप कभी पराजित नहीं हुए और जीवनभर राष्ट्र तथा स्वाभिमान की रक्षा के लिए संघर्षरत रहे। उनका जीवन आज भी देशवासियों को राष्ट्रभक्ति, त्याग और आत्मसम्मान की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम के दौरान घुमंतू समाज के कलाकारों एवं बच्चों द्वारा विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। रस्सी पर संतुलन एवं साहसिक करतब, मलखंभ प्रदर्शन, लोककलाओं की प्रस्तुतियां तथा महाराणा प्रताप के शौर्य और राष्ट्रभक्ति पर आधारित गीतों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति एवं वीर रस के कार्यक्रमों की भी खूब सराहना की गई।
उद्बोधन सत्र में राजाराम गुर्जर ने महाराणा प्रताप के जीवन, संघर्ष और बलिदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं घुमंतू समाज के प्रदेश संयोजक महेंद्र जी ने महाराणा प्रताप और घुमंतू समाज के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए वीर महाराणा पूंजा के योगदान को रेखांकित किया।
मुख्य अतिथि कर्नल देव आनंद लोहमारोड़ ने कहा कि महापुरुष किसी जाति, वर्ग या क्षेत्र विशेष के नहीं होते, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र और मानवता के प्रेरणास्रोत होते हैं। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप आज भी राष्ट्रभक्ति के सर्वोच्च प्रेरणास्रोत हैं। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार महाराणा प्रताप ने अपने समय में आक्रांता एवं राष्ट्रविरोधी शक्तियों का डटकर सामना किया था, उसी प्रकार आज भी देश को कमजोर करने वाली ताकतों के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान भारत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता, आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति, अनुच्छेद 370 का निरसन, सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे के विकास, साइबर एवं स्पेस वारफेयर की तैयारी तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बढ़ती प्रतिष्ठा के माध्यम से एक सशक्त राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ तत्व देश का मनोबल गिराने और विकास कार्यों को कमतर दिखाने का प्रयास करते हैं, लेकिन नागरिकों को ऐसे प्रयासों से प्रभावित हुए बिना राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना चाहिए।
कर्नल लोहमारोड़ ने कहा कि सैनिक केवल वर्दी पहनने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि भारत माता, तिरंगे की आन-बान-शान और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए समर्पित प्रत्येक भारतवासी एक सैनिक है। महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर उन्होंने सभी नागरिकों से राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर रहने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित नागरिकों को स्वच्छ भारत एवं स्वच्छ जयपुर का संकल्प दिलाया गया। साथ ही विभिन्न प्रकार के कचरे के पृथक्करण एवं वैज्ञानिक निस्तारण की जानकारी देकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।