*सबसे बड़ा गांव, सबसे बड़ी परेशानी; अस्पताल खुद ‘आईसीयू’ में*
*स्वास्थ्य सुविधाओं पर जिम्मेदारों की चुप्पी, बरमंडल की जनता परेशान*
बरमंडल – वैसे तो सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे है। वहीं दूसरी ओर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बरमंडल में पदस्थ डॉक्टर कभी भी समय से हॉस्पिटल नहीं आते है। मंगलवार को सुबह 11 बजे तक हॉस्पिटल में पदस्थ चारों डॉक्टर नदारद रहे। बरमंडल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ग्राम सहित आसपास के लगभग 30 से अधिक गांव मजरे टोले के लोग निर्भर है। प्रतिदिन इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भी इंतजार करना पड़ता है। स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टरों के समय पर ना आने के चलते मरीजों को झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे रहना पड़ता है। क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टर कुकुरमुत्ते की तरह पनप रहे है। विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नहीं कि जाती है इन झोलाछाप डॉक्टरों को मौन स्वीकृति दर्शाता है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर शासन स्तर पर तो यहां चार डॉक्टर पदस्थ किंतु मंगलवार को एक भी डॉक्टर 11 बजे तक हॉस्पिटल नहीं आए साथ ही आए दिन हॉस्पिटल में समय पर डॉक्टर नहीं रहने की शिकायतें रहती है किंतु फिर भी कोई सुधार नहीं हो पा रहा है। अब देखना है कि विभाग इन लापरवाह डॉक्टरों पर कोई कार्यवाही करता है या नहीं।
इनका कहना है –
आज अवकाश पर हूं किस कारण से स्टाफ नहीं आया है मै पता लगातीं हूं।
डॉक्टर मोनिका पटेल
मेडिकल ऑफिसर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरमंडल
मै बात करती हूं कि ड्यूटी पर चारों डॉक्टर क्यों नहीं आए है
शीला मुजाल्दा
ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर सरदारपुर

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