

22 जनवरी 2022 जयपुर, गवर्नमेंट पोदार कॉलेज राजस्थान यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित एन एस एस के वर्ग के दौरान गेस्ट स्पीकर बतौर भूतपूर्व सैनिक का विकास समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल देव आनंद गुर्जर ने विद्यार्थियों को “युवा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा” पर संबोधित किया . कार्यक्रम के संयोजक डॉक्टर जगदीश सैनी ने बताया 23 जनवरी के सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिवस एवं प्रक्रम दिवस के दिन कोरोना कर्फ्यू के मद्देनजर 1 दिन पूर्व ही युवाओं के लिए “युवा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा” पर व्याख्यान रखा गया .
कार्यक्रम मैं पहुंचने पर एनसीसी कैडेट्स द्वारा मुख्य वक्ता को लेक्चर हॉल तक एस्कॉर्ट किया एवं कॉलेज के प्राचार्य द्वारा स्वागत की कड़ी में कर्नल देव आनंद गुर्जर को पुष्पगुच्छ भेंट किया गया एवं कार्यक्रम के संयोजक डॉ जगदीश सैनी जी द्वारा राजस्थान की परंपरा के अंतर्गत साफा पहनाकर सम्मानित किया गया.
कार्यक्रम में अपने विचार रखते हुए कर्नल देव आनंद गुर्जर ने राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में विस्तार पूर्वक बताते हुए युवाओं से आह्वान किया कि इस बदलते हुए भारत के दौर में आने वाले समय को स्वर्णिम अक्षरों में लिखने के लिए युवाओं के कंधे पर बहुत बड़ी जिम्मेवारी है. कर्नल ने अंग्रेजों द्वारा किए गए अत्याचार एवं देश के बांटे जाने की साजिश को सांझा करते हुए बताया कि किस प्रकार अंग्रेजों द्वारा भारत के टुकड़े करने की साजिश को अंजाम दिया गया एवं किस प्रकार अंग्रेजों ने भारतीय नेशनल आर्मी के जवानों के बगावत के डर से भारत से तयशुदा समय से 1 वर्ष पूर्व ही कार्यरतापूर्वक भागना पड़ा . नेताजी के योगदान को याद करते हुए बताया कि सुभाष चंद्र बोस जयंती के अवसर पर भारत सरकार द्वारा प्रक्रम दिवस को घोषित करने के सराहनीय कार्य बताते हुए केंद्र सरकार का धन्यवाद किया एवं सभागार में मौजूद युवा एवं व्यक्तियों से पूछा कि भारत के विभाजन के दिन 15 अगस्त को आजादी का दिवस मानना कितना उचित है। अपनी बात रखते हुए कर्नल देव आनंद ने सुभाष चंद्र बोस के भारत की आजादी की लड़ाई में योगदान एवं इंडियन नेशनल आर्मी का गठन के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान इंडियन नेशनल आर्मी के पराक्रम की चर्चा एवं ब्रिटिश साम्राज्य में किस प्रकार से वर्मा के युद्ध में खौफ पैदा किया और अंततः अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर किया। उन्होंने यह भी बताया कि सुभाष चंद्र बोस 21 अक्टूबर 1943 मैं बनी भारत की पहेली सरकार के पहले प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करते हुए देश के युवाओं में भारत माता की सेवा के लिए किसी भी प्रकार के बलिदान के लिए तैयार रहें । उन्होंने यह भी बताया कि इस भारत की सरकार को दुनिया के 11 प्रमुख देशों द्वारा मान्यता प्राप्त थी और इसकी अपनी ही सेना एवं मुद्रा को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा मान्यता प्राप्त थी । 60,000 की संख्या वाली इंडियन नेशनल आर्मी के युद्ध के दौरान 26000 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए जो दुनिया के इतिहास में एक अनोखा आयाम है।
मौजूद युवाओं के दोनों हाथ ऊपर करते हुए भारत मां अमर रहे के नारे से पूरा हॉल गूंज उठा एवं राष्ट्र को सर्वोपरि रखने की शपथ ली. निशा सेन मैं अपनी बात रखते हुए युवाओं की ओर से बात रखते हुए भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में भारत के नाम को पुनः स्थापित करने के लिए देश का युवा हर कुर्बानी देने को तैयार है.
डॉक्टर सरिता प्रभाकर प्रिंसिपल पोदार कॉलेज, डॉक्टर विक्रम गुर्जर, डॉक्टर कमल तिवारी, मिस्टर अजीत सिंह शेखावत, मनु खुडालिया, रमन चौहान, कैडेट दिवाकर पारीक मुस्कान गोयल, ज्योति गुर्जर समेत कॉलेज फैकल्टी मौजूद रही

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