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Dharmendra Singh

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February 18, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

बुद्धनाथ चौहान रिपोर्टर

तिनसई में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बोले शुभम कृष्ण शास्त्री जी क्षमा निर्मल जल के समान होता है

उमरेठ तहसील की ग्राम पंचायत चारगांव के ग्राम तिनसई में चल रही श्रीमद् भागवत कथा वाचक श्री शुभम कृष्ण शास्त्री जी बहुत ही सरल और सुलभ स्वभाव में कहा की क्षमा मनुष्य की शोभा रूप से है रूप की शोभा गुण से है उनकी शोभा ज्ञान से है और ज्ञान की शोभा क्षमा से है क्षमा वह शब्द है जो सज्जन को संत और आत्मा का स्वभाव है जिस प्रकार जल का स्वभाव शीतलता से होता है उसी प्रकार अग्नि का स्वभाव उष्णता है शक्कर का स्वभाव मीठा पन है और नमक का स्वभाव खारापन है उसी प्रकार आत्मा का स्वभाव क्षमापन है किसी व्यक्ति के द्वारा मन वचन और आया से बिना कारण ही किसी व्यक्ति को पीड़ा पहुंचाने पर या गाली देने पर अथवा अभद्र व्यवहार करने पर उसके लिए प्रतिकार तिरस्कार करने की शक्ति होने पर भी अत्यंत शांति एवं समता पूर्वक उस कष्ट को सहन लेना और किसी भी प्रकार का प्रतिकार नहीं करना ही क्षमा होता है क्षमा वीरो का आभूषण है क्षमा निर्मल जल के समान है जो कि विरोधियों को क्रोध रूपी अग्नि को शांत कर देती है वह एक शब्द ऐसा अद्भुत है जिससे देने वाला और लेने वाला दोनों ही सुखी हो जाते हैं किंतु क्षमा धारी व्यक्ति ही संसार में संकटों पर विजय प्राप्त कर मान सम्मान और प्रतिष्ठा यश और कीर्ति प्राप्त कर सकता है क्षमा से इंद्र लोक और परलोक दोनों स्थान को प्राप्त करते हैं पंडित शुभम कृष्ण शास्त्री कहते हैं की क्रोध जीतने की आसान सी चाबी है हमेशा धीरज व धैर्य बनाए रखें और मीठा बोलने की कोशिश करें यथासंभव लोगों की मदद करें गलती होने पर भी दूसरों को क्षमा करें यही सभी श्रद्धालु भक्तगण अपनी आदत में कथा का वाचन करते हुए अपने स्वभाव में लाएं और अपने जीवन में उतारे अर्थात मनुष्य गलती का पुतला होता है हम सभी से गलती तो होती ही रहती है किंतु धर्म और कर्म ही ऊपर जाएगा श्रीमद् भागवत कथा बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोग कथा का श्रवण कर रहे हैं